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कोरोना वायरस: देश में वित्तीय आपातकाल लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

Thu, 26 Mar 2020 10:42 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Thu, 26 Mar 2020 10:42 PM IST
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Coronavirus: petition filed in Supreme Court for imposing financial emergency in the country
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कोरोना वायरस के मद्देनजर संविधान के अनुच्छेद- 360 के तहत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने की गुहार की गई है। याचिका सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमैटिक चेंजेज ने दायर की है। वकील विराग गुप्ता के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है कि कोरोना वायरस की महामारी के दौरान राज्यों एवं स्थानीय अथॉरिटी द्वारा की जा रही मनमानी को देखते हुए कानून के शासन को सरंक्षित करने की दरकार है। 

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याचिका में गुहार की गई है 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान बिजली, पानी टेलिफोन सहित अन्य जरूरी बिलों और ईएमआई भुगतान को निलंबित कर दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि लॉकडाउन से एक मायने में कहीं भी जाने-आने के अधिकार सहित अन्य मौलिक अधिकार निलंबित हो गए हैं। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है जब आम आदमी को अखबार तक नहीं मिल पा रहा है। 
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अदालतों के बंद होने से न्याय पाने का अधिकार भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में संविधान के तहत वित्तीय आपातकाल लगाने की जरूरत है। याचिका में यह दावा किया गया है भारत की आजादी के बाद का सबसे बड़ा आपातकाल है लिहाजा संवैधानिक प्रावधानों के तहत इससे निपटने की जरूरत है। याचिका में कहा गया है ऐसा करना न केवल कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग को परास्त करने बल्कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भी आवश्यक है।
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साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री द्वारा 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा करने के बाद गृह मंत्रालय द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत अधिसूचना जारी की गई लेकिन अलग-अलग राज्य और पुलिस अथॉरिटी द्वारा धारा 144 के तहत अपने हिसाब से कार्रवाई की जा रही है जो एक मायने में संवैधानिक फ्रॉड है। 


विभिन्न अथॉरिटी द्वारा अलग-अलग उठाए जा रहे कदमों की वजह से भ्रम एवं अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। किसी भी स्थिति में कोरोना वायरस से निपटने के लिए यह समाधान नहीं हो सकता। लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से रुक गई है।  याचिका में यह भी गुहार की गई है कि राज्य पुलिस और स्थानीय अथॉरिटी को गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देशों का सही तरीके से पालन करने का निर्देश दिया जाए जिससे कि आवश्यक सेवाओं मैं किसी तरह का व्यवधान न आए।

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