कोरोना से प्रभावित पड़ोसी देशों की मदद करेगी नौसेना और सेना, डीआरडीओ भी देगा साथ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय सेना ने भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी ताकत झोंक रही है। एक तरफ, नौसेना के छह जहाज मालदीव, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, श्रीलंका व बांग्लादेश की आपात मदद पहुंचाने को तैयार हैं। वहीं, सेना, नौसेना व वायुसेना के स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर व अस्पतालों में बदलने की तैयारी है। इसे लेकर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत सीधे पीएम नरेंद्र मोदी, स्वास्थ्य मंत्री और कैबिनेट सचिव के संपर्क में हैं।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मुंबई, जैसलमेर, जोधपुर, हिंडन, मानेसर और चेन्नई में क्वारंटीन सेंटर चल रहा है, जहां अब तक 1700 से अधिक लोगों को रखा गया है। हिंडन से दो और मानेसर सेंटर से एक कोरोना पॉजिटिव को सफदरजंग अस्पताल भेजा गया है। ऐसे 15 अतिरिक्त केंद्र बनाए गए हैं।
सेना के 51 अस्पतालों में डिपेंडेंसी यूनिट और इंटेसिव केयर यूनिट बेड तैयार हैं। कोलकाता, विशाखापत्तनम, कोच्चि, डिंडीगुल, बंगलूरू, कानपुर, जैसलमेर, जोरहाट और गोरखपुर में यह सुविधा शुरू की जा चुकी है।सेना ने कोरोना जांच को अपने छह अस्पतालों को नेशनल ग्रिड में शामिल किया है। इनमें दिल्ली कैंट रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल, बंगलूरू का आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे, लखनऊ व उधमपुर का कमांड अस्पताल शामिल हैं।
डीआरडीओ को 379 वेंटिलेटर का ऑर्डर
सेना ने अपने अस्पतालों के लिए डीआरडीओ को 370 वेंटिलेटर का आर्डर दिया है। वायुसेना का परिवहन विभाग दवाइयां, मेडिकल उपकरण और जरूरी सामान को पहुंचाने का मुख्य जरिया बना हुआ है। इमरजेंसी के लिए 20 विमान और 21 हेलिकॉप्टर को स्टैंड बाई पर रखा गया है।
जनरल रावत ने कहा, भारत को लॉकडाउन की अवधि तक कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ना ही होगा। इसके बाद की स्थिति से निपटने की तैयारी अगर पुख्ता नहीं हैं तो देश को अप्रत्याशित दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। सेना हर स्थिति से निपटने को तैयार है।