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कोरोना : भारत में ओमिक्रॉन के नौ सब वैरिएंट, चीन वाला नहीं मिला, जीनोम सीक्वेंसिंग में नहीं हुई पहचान

Thu, 13 Oct 2022 05:40 AM IST
योगेश साहू परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 13 Oct 2022 05:40 AM IST
सार

Coronavirus : वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक देश में नए सब वैरिएंट की पहचान नहीं हुई है लेकिन सरकारों को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए और विदेश यात्रा को लेकर निगरानी बढ़ानी चाहिए।

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Coronavirus : Nine sub variants of Omicron in India, not found in China, not identified in genome sequencing
कोविड रिसर्च (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के दो-दो सब वैरिएंट ने चीन में फिर से संक्रमण फैला दिया है। यहां पांच से ज्यादा राज्यों में संक्रमण के मामलों में अचानक से उछाल आया है जिसे वैज्ञानिक नए सब वैरिएंट का असर मान रहे हैं लेकिन भारत की स्थिति फिलहाल इससे कुछ अलग है।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले साल से देश में संक्रमित मिल रहे मरीजों में ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि हो रही है। अब तक देश में ओमिक्रॉन के नौ सब वैरिएंट की पहचान हो चुकी है जिनका प्रसार सबसे अधिक है लेकिन इनमें वे दो सब वैरिएंट शामिल नहीं है जो चीन में मिले हैं।
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चीन में तेजी से फैला
जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए गठित इन्साकॉग नेटवर्क के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि देश में अभी तक ओमिक्रॉन के बीए.1, बीए.2, बीए.3, बीए.4, बीए.5, बीए.2.9, बीए.2.12.1, बीए.2.3.8 और बीए.2.73 नामक सब वैरिएंट मिले हैं जो चीन में मिले BF.7 और BA.5.1.7 के समान नहीं हैं। चीन में मिले दोनों सब वैरिएंट अत्यधिक संक्रामक हैं और तेजी से फैल रहे हैं। इनमें से BF.7 नामक सब वैरिएंट की प्रसार क्षमता सबसे अधिक होने की सूचना है।
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सरकारों को तत्काल बढ़ानी चाहिए निगरानी
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक देश में नए सब वैरिएंट की पहचान नहीं हुई है लेकिन सरकारों को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए और विदेश यात्रा को लेकर निगरानी बढ़ानी चाहिए। अगर पुराने अनुभव के आधार पर बात करें तो यह जरूरी नहीं है कि चीन में फैलने वाले सब वैरिएंट दूसरे देशों में नहीं मिल सकते।

  • दरअसल, देश में कोरोना वायरस की निगरानी के लिए सरकार ने साल 2020 में इन्साकॉग नेटवर्क गठित किया था जिसके अधीन देश भर की प्रयोगशालाओं में जीनोम सीक्वेंसिंग की जाती है।
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