कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाना कितना जरूरी, इस बात को बयां करते ये उदाहरण...
दुनिया में जैसे-जैसे कोरोना वायरस का प्रसार हो रहा है। वैसे-वैसे दुनिया भर के देशों में लोगों के बीच मास्क लगाने का चलन बढ़ रहा है। दुनिया भर की सरकारें अपने नागरिकों से मास्क लगाने का आग्रह कर रही हैं।
एशिया में रहने वाले लोगों के लिए इस तरह की घोषणाएं आम है। यहां के लगभग हर देश ने अपने नागरिकों को कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाने की सलाह दी है। सरकारों का कहना है कि यह बीमारी सांस संबंधी है, इसलिए इससे बचाव के लिए मास्क लगाना जरूरी है।
एशिया को छोड़ अन्य देशों में मास्क को लेकर दुविधा का माहौल
वही, एशिया के अलावा दुनिया के अन्य हिस्सों में मास्क लगाने को लेकर लोगों के बीच दुविधा का माहौल है। यहां के नेता, अधिकारी और मीडिया के प्रमुख लोगों द्वारा लगातार यह कहा जा रहा है कि मास्क लगाने से कोरोना से बचाव नहीं हो सकता है और लोगों को इसके बजाय हाथ धोने और सामाजिक दूरी बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
एक अमेरिकी सर्जन जनरल जेरोम एडम्स ने तो फरवरी महीने में ट्वीट कर मास्क नहीं खरीदने की अपील तक कर दी। उसी सप्ताह अमेरिका के 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन' (सीडीसी) के निदेशक रॉबर्ट रेडफील्ड अमेरिकी सासंदों के समक्ष आए और जब सांसदों ने उनसे पूछा कि क्या लोगों को मास्क लगाना चाहिए, तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर जवाब दिया 'नहीं'।
लेकिन अब वह अपने जवाब को लेकर ही असमंजस में है। सोमवार को एक अमेरिकी रेडियो पर बातचीत के दौरान रेडफील्ड ने कहा कि सीडीसी अपने दिशानिर्देशों की समीक्षा कर रहा था और वह जल्द ही सामुदायिक संक्रमण से बचाव के लिए मास्क के उपयोग की सिफारिश कर सकता है।
सार्स महामारी के दौरान मास्क लगाने से संक्रमण से बचने में मदद मिली
पिछले महीने, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में माइक्रोबायोलॉजी के एक विशेषज्ञ एड्रियन बुर्च ने कहा कि यह सुनने के बावजूद भी कि मास्क काम नहीं करते हैं, लेकिन आपने शायद उस दावे का समर्थन करने के लिए किसी को ठोस सबूत रखते नहीं देखा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस तरह के दावे को सच साबित नहीं किया जा सकता है।
वास्तव में, इसके ठीक विपरीत इस बात का सबूत है कि मास्क मौजूदा महामारी की तरह वायरल संक्रमण को रोकने में मदद करता है। बुर्च ने कहा कि 2003 में सार्स महामारी के दौरान मास्क लगाने से संक्रमण को रोकने में काफी मदद मिली थी।
बीजिंग में सामुदायिक प्रसारण के ऊपर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सार्वजनिक रूप से मास्क पहनने से सार्स महामारी से बचनी की संभावना 70 फीसदी तक बढ़ जाती थी। सार्स महामारी भी कोरोना वायरस की तरह था, जिसमें लोगों को सांस संबंधी बीमारी का सामना करना पड़ता था।
सार्स महामारी दुनिया भर में फैला, लेकिन इसका बुरा प्रभाव चीन और हांग कांग में देखने को मिला। लोगों के बीच सार्स का खौफ बरकरार था, इसलिए जैसे ही कोरोना वायरस की खबर सुर्खियों में आई लोगों ने मास्क लगाना शुरू कर दिया।
यूरोप और उत्तर अमेरिका में मास्क न लगाने से कोरोना का प्रसार तेज हुआ
कोरोना वायरस के फैलने की शुरुआत से ही हांग कांग सहित एशियाई देशों की तमाम सरकारों ने अपने नागरिकों को मास्क लगाने की सलाह दी, फिर चाहें वो संक्रमित हो या ना। ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन में महामारी के प्रभाव को रोकने में मास्क ने अहम भूमिका निभाई है।
वही, अगर यूरोप और उत्तर अमेरिकी देशों के बात करें तो यहां लोगों के बीच मास्क लगाने की आदत ना होने से संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। जब मामलों में बढ़ोतरी होना शुरू हुआ तो तब जाकर इन देशों में लोगों ने मास्क लगाना शुरू किया।
हांग कांग विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसीन में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ इवान हंग ने कहा कि यदि हांग कांग से मिले डाटा को देखा जाए तो पता चलता है कि संक्रमण को रोकने के लिए मास्क संभव ही बहुत महत्वपूर्ण चीज रहा है।
उन्होंने कहा कि और यह न केवल कोरोना वायरस के मामलों को कम करता है, यह इन्फ्लूएंजा होने की संभावना में भी कमी लाता है। वास्तव में, यह अब इन्फ्लूएंजा का मौसम है और हमें शायद ही कोई इन्फ्लूएंजा का मामला देखने को मिले और ऐसा इसलिए है क्योंकि मास्क वास्तव में न केवल कोरोना वायरस के खिलाफ बल्कि इन्फ्लूएंजा वायरस के खिलाफ भी संरक्षण देने में मदद करते हैं।