Coronavirus Lockdown: गांव लौटे मजदूरों को घरों में क्वारंटीन करने से नहीं बनेगी बात
- अपने को स्वस्थ मानकर कर रहे व्यवहार घर-पड़ोस से
- भीलवाड़ा से जुड़े बांसवाड़ा के हालात भी चुनौती भरे
- होम आइसोलेशन नहीं साबित हो रहा कारगर
- ग्राम पंचायतों को सक्षम बनाना है जरूरी
- कार्यरत कार्मिकों को संक्रमण से पूर्व चिकित्सीय सुविधा प्रदान करना है जरूरी
विस्तार
ग्रामीणों और युवाओं के विभिन्न समूहों के साथ जमीनी काम करने के 15 साल के अनुभव वाली इस सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रशासन से प्राथमिकता के आधार पर कुछ काम करने की अपील भी की है। उनका कहना है कि गांव की मौजूदा चुनौतियां लगभग सभी जगह ऐसी ही हैं।
इसलिए इस जमीनी हकीकत पर ध्यान देकर सभी जिलों के प्रशासनिक अमले को ध्यान देने की जरूरत है। बिहार, मध्य प्रदेश के अनुभव के बाद राजस्थान में जयपुर में काम का अनुभव लेकर वर्तमान में बांसवाड़ा में काम कर रही नसीमा खातून ने गांव स्तर पर काम कर रहे कार्मिकों के सहयोग से अलग-अलग स्तर पर बातचीत की है।
उनका स्पष्ट कहना है कि अगर कोरोना को हराना है, तो घर लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए ग्राम पंचायतों को सक्षम बनाना ही होगा और यह जरूरी भी है। नसीमा का कहना है कि बाहर से लौटे श्रमिकों को जो होम आइसोलेट किया गया है, उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ये श्रमिक घर में सभी परिवारजनों के साथ निवास कर रहे हैं।
पाबंदी के बाबजूद गांव में इधर-उधर निकल जाते हैं। कोरोना के लक्षण 14 दिन में नजर आते है, लेकिन ये स्वयं को स्वस्थ मान रहे हैं। इन 14 दिनों में एक मजदूर सबसे पहले परिवार के सभी सदस्यों को संक्रमित करेगा और परिवार के सदस्य गांव में इन 14 दिनों में कितने ही से मिलेंगे।
इस हिसाब से सोचें तो गिनती मुश्किल हो जाएगी। ऐसे में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। इसके लिए ग्राम पंचायत मुख्यालय पर, रा.उ.मा.वि या राजकीय छात्रावासों को इसका केंद्र बनाकर सभी पलायित श्रमिकों को आइसोलेट किया जाए, तो ही ग्राम पंचायत में कोरोना संक्रमण का खतरा नियंत्रित किया जा सकता है।
यहां पर इनके भोजन का इंतजाम विद्यालय में संचालित मिड डे मिल से हो सकता है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर कोरोना संक्रमण रोकने में कार्यरत कार्मिकों को संक्रमण से पूर्व चिकित्सीय सुविधा प्रदान कि जाए, जो अभी हो नहीं हो रहा है।
मनमाने दाम वसूलने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई जरूरी
ग्राम पंचायतों में कोरोना के संक्रमण के रोकने सोडियम हाइपो क्लोराइड के छिड़काव हेतु पंचायत समिति स्तर से स्वीकृति जारी करावाई, तब जाकर सोडियम हाइपो क्लोराइड ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराया जाए क्योंकि यह बाजार में उपलब्ध नहीं हो रहा है।
ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2019-2020 में एसएफसी की कोई भी राशि प्राप्त नहीं हुई है। आमजन में खाद्य सामग्री को लेकर गांवों में माहौल खराब किया जा रहा है। स्थानीए दुकानदार मनमाने दामों पर लोगों से राशि वसूल रहे है। ऐसे दुकानदार लोगों के खिलाफ विशेष कार्यवाही कि जाए।
शराब की अवैध दुकानें भी चुनौती
आदिवासी इलाका होने के कारण यहां बांसवाड़ा के कुछ गावों में संक्रमण फैलने का एक सम्भावित कारण अवैध शराब की दुकानें भी बन सकती हैं, जो शाम के समय खुली रहती है। इन पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है।
ऐसी दुकानों और शराबियों से आमजन भी परेशान है। गांव वाले रोकते है तो ये लोग झगड़े-मारपीट पर उतारू हो जाते है। इनका पूर्णतया बंद होना ही बेहतर होगा।
यहां कहां भामाशाह
ग्राम पंचायतों में 200-200 सूखे भोजन के पैकेट भामाशाहों के माध्यम से रखने को आदेशित किया गया है, जबकि बांसवाड़ा में बिखरी बस्ती की ग्राम पंचायतों में ज्यादातर लोग गरीब हैं। इनमें भामाशाह ही नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में यह व्यवस्था उपखंड स्तर या पंचायत समिति स्तर पर भामाशाहों से करवाई जाए तो बेहतर होगा।