कोरोना वायरस : भवन निर्माण मजदूरों को सेस फंड से रकम भेजने के निर्देश, सीधे खाते में आएगी राशि
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कोरोना वायरस के चलते तीन हफ्ते के लॉकडाउन में लोगों को परेशानी से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को असंगठित भवन निर्माण कारीगरों और मजदूरों के लिए सेस फंड का रकम जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और उससे जुड़ी गतिविधियों को लॉकडाउन के दायरे से बाहर रखा गया है।
श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को कानूनी प्रावधान के तहत एडवाइजरी जारी करते हुए कहा, कारीगरों और मजदूरों को एक निश्चित राशि डीबीटी के जरिए सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। असंगठित क्षेत्र के ये मजदूर और कारीगर रोज के दिहाड़ी से अपना जीवन यापन करते हैं। लॉकडाउन से इनकेजीवनयापन का स्रोत रुक गया है। मंत्रालय के मुताबिक लेबर वेलफेयर बोर्ड में सेस के तहत 52,000 करोड़ रुपये जमा हैं। इस बोर्ड में 3.5 करोड़ मजदूर और कारीगर पंजीकृत हैं।
वहीं, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर फूड प्रॉसेसिंग के सभी निर्माण यूनिटों को खोले रख उत्पादन को मांग के मुताबिक पर्याप्त रखने को कहा है। मंत्रालय के सचिव की ओर से जारी सूचना के मुताबिक खाद्य प्रसंस्करण के निर्माण, परिवहन और उससे जुड़े कच्चे माल और लोगों की आवाजाही धारा 144 से अलग रहेंगी, ताकि लोगों तक खाद्य पदार्थों की कोई कमी नहीं हो। मंत्रालय ने ई-कॉमर्स से जुड़े लोगों की आवाजाही को भी लॉकडाउन के दायरे से बाहर रखा है।
राज्यों को जरूरी सामान सुनिश्चित करने के निर्देश, निजी गार्डों को दें पूरा वेतन
उधर, गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वह लॉकडाउन में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करें। मंगलवार रात पीएम मोदी के लॉकडाउन की घोषणा के बाद लोगों में जरूरी सामान को लेकर हड़कंप मच गया था। मंत्रालय ने कहा है कि इस लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए जरूरी है कि लोगों तक जरूरी सामान पहुंचता रहे। इसके लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश चौबीस घंटे हेल्पलाइन सेवा शुरू करें।
इसके तहत मांग और आपूर्ति से जुड़ी सभी शिकायतों के निपटारे में सुविधा होगी। वहीं, गृहमंत्रालय ने निजी गार्ड मुहैया कराने वाली कंपनियों को भी निर्देश दिया है कि 21 दिन के लॉकडाउन में वह गार्डों को पूरी तनख्वाह दें। संकट की इस घड़ी में निजी गार्ड को किसी भी कारण नौकरी से बाहर न करें। यह समय मानवतावादी नजरिया रखने का है।