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कोरोना: सरकार का फैसला, हॉटस्पॉट के बाद अब कोल्ड स्पॉट में होंगे कोविड-19 टेस्ट

Mon, 13 Apr 2020 10:18 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 13 Apr 2020 10:18 AM IST
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coronavirus In a bid to widen testing govt plans to expand testing in clusters chosen in cold spot areas
जांच के लिए सैंपल लेते स्वास्थकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भारत सरकार ने फैसला किया है कि वह अब कोल्ड स्पॉट यानी उन जगहों पर कोविड-19 की जांच करेगी जहां से अब तक कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। जिससे कि कोई भी संदिग्ध न बच पाए। यह एक महत्वपूर्ण फैसला है जो हॉटस्पॉट क्षेत्रों वाले लगभग 133 जिलों से परे ध्यान केंद्रित करता है। जहां से वायरस के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।

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जिन जिलों का चुनाव सैंपलिंग के लिए जाएगा, उनकी पहचान की जा रही है और वहां कोविड-19 की उपस्थिति जानने के लिए रैपिड टेस्टिंग (त्वरित परीक्षण) की जाएगी। यह कदम भारत को न केवल बीमारी के लिए अतिरिक्त क्लिनिकल डाटा मुहैया कराएगा बल्कि उन आलोचनाओं को भी खत्म करेगा जिसमें कहा जा रहा है कि यहां पर्याप्त परीक्षण नहीं हो रहे हैं और पॉजिटिव मामले शायद सामने नहीं आ पा रहे हैं। 
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सैंपलिंग निगरानी के आधार पर होगी और कोरोना वायरस की उपस्थिति को ट्रैक करने के लिए आईएलआई (इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी) के रोगियों का परीक्षण किया जाएगा। अब तक भारत के 720 जिलों में से कम से कम आधे में कोविड-19 की रिपोर्ट नहीं आई है। अब तक सामने आए मामले कुछ जिलों और शहरों के एक पैटर्न पर केंद्रित हैं जो राज्य से राज्य और राज्यों के अंदर अलग हो सकते हैं।
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पूल टेस्टिंग एक आरटी-पीसीआर प्रक्रिया है, जिसे बीमारी का पता लगाने के एक विश्वसनीय साधन के रूप में देखा जाता है। वहीं रैपिड टेस्ट का उद्देश्य एंटीबॉडी के लिए परीक्षण करना है। चीन से रैपिड टेस्ट किट आने में देरी हुई है लेकिन जल्द ही बहुत सारी किट पहुंचने की उम्मीद है। इनका उपयोग हॉटस्पॉट और कोल्ड स्पॉट क्षेत्रों में किया जाएगा। जिससे मरीजों का जल्द पता लगाया जा सके।


सूत्रों का कहना है कि भारत की परीक्षण रणनीति पहले से ज्यादा विकसित हुई है। पहले विदेश से वापस लौटे भारतीय और उनके संपर्क में आए लोग वायरस के सबसे ज्यादा खतरे में थे, इसलिए उनकी जांच हुई। फिर सभी श्वसन रोगियों और आईएलआई रोगियों की कोरोना जांच की गई। इसके अलावा आईसीयू में मौजूद और ओपीडी में आने वाले मरीजों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है ताकि कोरोना के गंभीर या सामान्य रोगी न बच पाएं।

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