हवाई किराये पर कोरोना का असर, कीमतें गिरीं पर सुरक्षा की गारंटी नहीं
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कोरोनावायरस (कोविड-19, डब्लूएचओ द्वारा दिया गया नाम) चीन के अलावा दुनिया के अन्य देशों में तेजी से फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) द्वारा एक मार्च तक दिए गए आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में कोरोना के 87,137 मामले सामने आए हैं। वहीं, 7,619 मामले चीन के बाहर सामने आए हैं, जिनमें ईरान और ईटली जैसे देशों में सामने आए मामले भी शामिल हैं। अकेले एक मार्च को ही चीन के बाहर 1,160 नए मामलों की पुष्टि हुई।
जहां स्टॉक मार्केट कोरोनावारयस के कारण परेशानी की मार झेल रहा है, वहीं ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वायरस हवाई उद्योग पर भी प्रभाव डाल रहा है। दुनिया के कई शहरों के लिए उड़ानों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है। ऑनलाइन यात्रा पोर्टल Ixigo.com के डाटा के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय रूटों पर विमानों किराए में 32 से 35 फीसदी की कमी देखने को मिली है।
अंतरराष्ट्रीय रूटों पर विमानों के किराए में कमी पर Ixigo.com के सह-संस्थापक आलोक बायपेयी ने कहा कि इसके पीछे का मुख्य कारण कोरोनावारयस के प्रकोप के चलते दुनियाभर की सरकारों द्वारा नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श जारी करना है।
विमान किराये में हो रही है इतने रुपये तक कमी
मार्च 2019 में दिल्ली से रोम के बीच एक तरफ के विमान किराये की कीमत 32,371 रुपये थी, जो अब घटकर 26,345 हो गई है। किराये में यह गिरावट लगभग 19 फीसदी है। मुंबई-सिंगापुर हवाई किरायों में भी कमी देखने को मिली है। पिछले साल मार्च में जहां एक व्यक्ति को मुंबई से सिंगापुर जाने के लिए 26,000 रुपये हवाई किराए के तौर पर चुकाने पड़ते थे, वहीं अब यह घटकर 8,727 रुपये हो गया है। मुंबई-सिंगापुर विमान किराए में 66 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।
ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म 'क्लियरट्रिप' की वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालू रामचंद्रन ने कहा कि विमान किराये घटते-बढ़ते रहते है और यह मांग पर निर्भर करते है। आमतौर पर किराये में गिरावट तब होती है जब मांग कम हो जाती है और अगर मांग बढ़ जाती है तो किराए में बढ़ोतरी होती है। इस प्रकार, हम कह सकते हैं कि कई देशों द्वारा लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के कारण ग्राहकों की मांग में कमी हुई है। उन्होंने कहा कि कई संगठनों द्वारा यात्रा प्रतिबंधों के कारण कॉर्पोरेट यात्रा में भी कमी हुई है। साथ ही ग्राहकों में भी कोरोना का डर है इसलिए वह भी यात्रा करने से बच रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए मांग में कमी आई है। खासतौर पर उन देशों में जो चीन के निकट स्थित हैं। रामचंद्रन ने कहा कि कोरोनावायरस के सामने आने के बाद से चीन और अन्य दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में हवाई बुकिंग में 30 से 60 फीसदी की कमी आई है। Ixigo.com के आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली और दुबई के बीच किराए में पिछले साल के समान समय की तुलना में लगभग 53 फीसदी की कमी आई है।
एयरलाइनों के किराये पर नजर बनाने से पता चलता है कि दिल्ली से दुबई के बीच एयर इंडिया के एक तरफ के किराये की कीमत फरवरी में 14,329 रुपये थी, वहीं पिछले साल मार्च महीने में इसके लिए 22,364 रुपये चुकाने पड़ते थे। समान रूप से, इटालियन एयरलाइन एलइटालिया के दिल्ली से रोम के बीच का किराया पिछले साल मार्च में 36,424 रुपये था, जो अब घटकर 26,422 रुपये हो गया है।
ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म 'यात्रा डॉट कॉम' की सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सबीना चोपड़ा ने कहा कि इटली द्वारा कोरोनावायरस के कई मामलों की रिपोर्ट के बाद यूरोप के लिए यात्रा करने की जानकारी की खोज में बहुत कमी हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशियाई नागरिक एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं क्योंकि इनमें कोरोना के लक्षण देखने को मिले हैं, इसलिए लोग अब इनसे सावधान हो रहे हैं। यह एक उतार-चढ़ाव और अस्थिर स्थिति है। हमें उम्मीद नहीं थी कि यूरोप भी इससे प्रभावित होगा लेकिन हम इसके प्रभावित होने से आश्चर्यचकित है।
कोरोना के डर के बीच क्या आपको विदेश यात्रा करनी चाहिए?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन और अन्य क्षेत्रों में कोरोनावायरस के ठीक हुए मरीजों में एक बार फिर वायरस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। इन मरीजों की जांच रिपोर्ट के नतीजे पॉजीटिव पाए गए हैं।
रामचंद्रन ने कहा कि इस बात का अंदाजा लगाना कठिन है कि हालात कब ठीक होंगे। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देखा जाता है भारतीय दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में घूमने जाना पसंद करते हैं। अगर वायरस का प्रभाव कम नहीं होता है तो हमें दक्षिण पूर्व एशिया में जाने वाले भारतीयों की तादाद में कमी देखने को मिल सकती है और भारतीय दक्षिण पूर्व एशिया के बजाय अन्य देशों में घूमने के विकल्प की तलाश करेंगे।
कई एयरलाइनों ने दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ क्षेत्रों के लिए उड़ानों की संख्या पहले ही कम कर दी है। सबीना चोपड़ा ने कहा कि एयरलाइनों ने थाईलैंड, हांगकांग और सिंगापुर के बीच चलने वाली फ्लाइटों की आवृत्ति में कमी की है। उन्होंने कहा कि सिंगापुर और थाईलैंड में कोरोनावायरस के ज्यादा मामले नहीं हैं, इसलिए दुनिया का ध्यान अब यूरोप की तरफ चला गया है। लेकिन फिर भी एयरलाइंस सतर्क हो रही है।
चोपड़ा ने कहा कि यदि आप अगले कुछ महीनों में यात्रा करना चाहते हैं तो घरेलू गंतव्य बेहतर विकल्प हो सकते हैं। यदि आप वास्तव में विदेश यात्रा करना चाहते हैं, तो आप श्रीलंका, मॉरीशस, मध्य पूर्व, मालदीव, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे स्थलों पर विचार कर सकते हैं, जहां अभी तक मामले सामने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि यात्रियों को हालांकि इस बात का ख्याल रखना होगा कि वह उन फ्लाइटों को लेने से बचे जो कोरोनावायरस प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरेंगी।
रामचंद्रन ने कहा कि यात्रा से पहले शोध करना लाभकारी होगा। असल में, कई लाइव ऑनलाइन काउंटर भी हैं जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कोरोनावायरस की स्थिति को लेकर जानकारी प्रदान कर रहे हैं। हालांकि, अप्रभावित क्षेत्रों में भी यात्रा करते समय निवारक उपाय किए जाने चाहिए।
प्रमाणित फाइनेंशियल प्लानर और 'इंवेस्टोग्राफी' की संस्थापक श्वेता जैन ने कहा कि स्थिति के जल्द ही स्थिर होने की संभावना नहीं है। इस तरह की नाजुक स्थिति में, मेरा सुझाव है कि आप कम किराए से लुभाएं नहीं और अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि विदेश में छुट्टी की योजना बनाने से पहले अगले कुछ हफ्तों तक स्थिति पर बारीकी से नजर रखें।