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कोरोना: पूर्वांचल और बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट... बाहर से आए मजदूरों ने बढ़ाया गांवों में संकट

Tue, 07 Apr 2020 03:32 AM IST
योगेश साहू मनीष मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ/पटना।
मनीष मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ/पटना। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 07 Apr 2020 03:32 AM IST
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coronavirus Ground report : from Purvanchal and Bihar, Workers from outside increased crisis in villages
coronavirus - फोटो : PTI

यूपी और बिहार के दस जिलों में 1000 किमी के रास्ते पर ग्रामीणों का हाल, बाहर से आए लोग धड़ल्ले से इधर उधर घूम रहे... दिल्ली-मुंबई से वापस आए लोगों के सीधे गांव पहुंचने और पहचान छिपाने से बढ़ रही दहशत... पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।


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यूपी और बिहार के दस जिलों में 1000 किमी के रास्ते पर ग्रामीणों का हाल, बाहर से आए लोग धड़ल्ले से इधर उधर घूम रहे... दिल्ली-मुंबई से वापस आए लोगों के सीधे गांव पहुंचने और पहचान छिपाने से बढ़ रही दहशत... पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।

कोरोना के खौफ से घरों में कैद पूर्वांचल और बिहार के गांव के लोगों में अब दहशत और बढ़ गई है। इस दहशत की मुख्य वजह है लॉकडाउन के कारण बड़े शहरों में काम धंधा बंद होने के बाद गांव पहुंचे हजारों प्रवासी मजदूर।

दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे महानगरों से लाखों मजदूरों की पूर्वांचल और बिहार में वापसी के बाद यहां के गांवों का हाल जानने के लिए ‘अमर उजाला’ ने यूपी की राजधानी लखनऊ से बिहार के सीमावर्ती गोपालगंज के बीच दस जिलों (बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, बस्ती, गोंडा, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, गोपालगंज (बिहार) में पहुंच कर ग्रामीणों में बढ़ रहे खौफ को करीब से देखा।  

करीब 1000 किमी की इस यात्रा में नेशनल हाईवे-28 के आसपास दस जिलों में एक चीज जो साफ दिखी वो शहरों से लौटे मजदूरों की गाँवों में चोरी-छिपे घुसने, क्वारंटीन में टिक कर न रहने से लोगों में दहशत कई गुना बढ़ गई है। हाईवे पर अयोध्या से 20 किमी पहले बाईं तरफ एक पगडंडी मुड़ती है। किनारे के खेतों में पकने को तैयार गेहूं के खेत किसानों का जैसे इंतजार भर कर रहे हैं। इसी पगडंडी पर आगे पड़ने वाले गाँव धौरहरा में कुछ मजदूर दिल्ली से वापस आए हैं। 

चिंता का माहौल
मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों से बिहार लौट रहे मजदूरों को लेकर गांवों में चिंता का माहौल है, इन मजदूरों को  जांच के बाद क्वारंटीन सेंटरों में रखा जा रहा है, लेकिन कई लोगों के इन केंद्रों से भाग जाने के कारण हालात बिगड़ने का अंदेशा भी है।

सफाई से कम होगा इंसेफेलाइटिस 

कैलाश सिंह कहते हैं, दारू की दुकानें न खुलने से लोगों की पीने की आदत छूट रही है। छोटे बच्चे साफ-सफाई के मायने और हाथ धाेना सीख रहे हैं। परिवार के लोग करीब आ गए हैं। पूर्वांचल में इंसेफ्लाइटिस जैसी बीमारियां पहले से कहर ढा रही हैं। कैलाश सिंह कहते हैं, कोरोना का प्रकोप फैला तो रोकना मुश्किल हो जाएगा। सफाई होना जरूरी है। चार दशकों में पूर्वांचल में हजारों बच्चे इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं। इंसेफ्लाइटिस के कहर का मुख्य कारण गंदगी, गरीबी और कुपोषण ही है।

गांव में घूमते हैं बाहर से आए लोग
धौरहरा केे किसान विवेक सिंह के मुताबिक, गांव में लोग इसे हल्के में ले रहे हैं। यहां सतर्कता न के बराबर है। बाहर से आ रहे लोगों से डर है। विवेक ने कई साल पहले मुंबई में नौकरी छोड़ कर गाँव में खेती शुरू की है। बाहरी व्यक्ति के पहुंचने भर से कई लोग आकर ऐसे खड़े हो जाते हैं कि जैसे कोई चौपाल हो। विवेक बताते हैं, जो लोग बाहर से आए उनकी कोई पहले जांच नहीं हुई, वो इधर-उधर घूम भी रहे हैं। न तो बाहर से आए लोग जांच के लिए गए, न ही डॉक्टरों की टीम गांव आई।

चुपचाप पहुंचने वालों की पहचान मुश्किल

फैजाबाद के जिलाधिकारी अनुज झा ने बताया, बसों से या अन्य साधनों से आए लोगों को बस स्टॉप पर रोक कर जांच की गई और तब उन्हें गांवों में भेजा गया। उन सभी की सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रहने की व्यवस्था की गई है। विदेशों से आने वालों की जांच के बाद होम क्वारंटीन करके बाहर नोटिस भी चस्पा कर रहे हैं। वह आगे बताते हैं। रास्ते में उतरकर गांव पहुंचने वालों और उनके संपर्क में आने वालों के बारे में पता कर पाना कठिन है।

बस्ती में दहशत...
बस्ती में एक युवक हसनैन की मौत के बाद दहशत है। हसनैन मुंबई से आए बीमार दोस्त सिराज से मिला था। बस्ती से 20 दूर गहरवार जोत गाँव में राशन की दुकान के सामने जूट के बोरे बिछाए गए हैं, ताकि लोग दूर-दूर बैठें। काला मास्क लगाए बैठे वकील चौधरी बताते हैं, अब डर अपने गांववालों से नहीं, उनसे लग रहा है कि जो बाहर से आकर इधर-उधर घूम रहे हैं। न तो इनकी कोई जांच  हुई, न ही एक जगह रुक रहे हैं।

क्वारंटीन सेंटर से निकल भागे दो लोग

एनएच-28 पर गोरखपुर से करीब 20 किमी पहले सहजनवा में मुरारी इंटर कॉलेज में बाहर से लौटे लोगों के लिए क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है, लेकिन यहां लाए गए लोगों में से दो रात में ही भाग कर घर चले गए। इस सेंटर में रह रहे 10 से 12 लोग दहशत में हैं। एक मजदूर को खांसी-बुखार है लेकिन इलाज नहीं मिल रहा। सुनील दिल्ली में दिहाड़ी मजदूर थे जिन्हें सहजनवां के कॉलेज में रखा गया है।

गोरखपुर के रमवापुर गांव की शांति ने मुंह को पल्लू से छिपा रखा है, उन्हें भी संक्रमण का डर है। वह कहती हैं, पंद्रह दिन से घर में ही हैं, गांव में कोई किसी से नहीं मिलता। सब एक दूसरे से भाग रहे हैं। ग्राम प्रधान रमाकांत सिंह बताते हैं, गांव में फसल कटाई का समय शुरु होने वाला है, लेकिन सभी लोग गेहूं कम्बाइन मशीन से कटवाएंगे। उसमें किसी को छूने का डर नहीं रहता।

बिहार में पलायन ज्यादा

बिहार में दाखिल होते ही बड़ा सा बोर्ड शराब बंदी की जानकारी भी देता है। गोपालगंज के निचवाजलालपुर पोस्ट के भोभीचक गांव के बाहर एक कोठरी के बाहर दो लोग दिखते हैं, ये बाहर से आए हैं, और बाहर रहने के लिए बोला गया है। वहीं, थोड़ी दूर पर खड़े लखिन्दर यादव कहते हैं जिस बीमारी से दुनिया को खतरा है, उसे इन लोगों ने (क्वारंटीन कोठरी की ओर इशारा करते हुए) मजाक बना दिया। एक यहां पर हैं, दूसरे गांव में घूम रहे हैं।

सशस्त्र पुलिस बलों को 15 तक गैरजरूरी गतिविधि न करने के निर्देश

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) ने अपने कर्मियों और जवानों की गैरजरूरी गतिविधि और आवाजाही 15 अप्रैल तक स्थगित कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि जवानों की छुट्टियां 10 दिन और बढ़ा दी हैं। सीएपीएफ ने जवानों और अधिकारियों से कहा था कि 5 अप्रैल तक जो जहां हैं, वहीं रहें। नए आदेश में सभी गैरजरूरी और नियमित गतिविधियों जैसे स्थानांतरण और पोस्टिंग को टाल दिया है। 
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