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कोरोना: केवल छह फीसदी मरीजों को अस्पताल जाने की जरूरत, संक्रमण से मुक्त हुए 40 हजार

Thu, 21 May 2020 09:44 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 21 May 2020 09:44 AM IST
सार

  • भारत में केवल 6.39 प्रतिशत सक्रिय मामलों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ती है।
  • वर्तमान में केवल 0.45 प्रतिशत मामलों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है।
  • मरीजों के ठीक होने की दर जो पहले 7.1 प्रतिशत थी वो वर्तमान में बढ़कर 39.62 प्रतिशत हो गई है।

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coronavirus govt data shows only 6 percent active cases need hospitalisation 40 thousand people recoverd
छह प्रतिशत सक्रिय मामलों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत होती है। (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसी बीच सरकार के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि केवल 6.39 प्रतिशत सक्रिय मामलों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत होती है। डाटा दिखाते हैं कि देश में महामारी अन्य देशों की तुलना में ज्यादा गंभीर नहीं है। भारत में वर्तमान में केवल 0.45 प्रतिशत मामलों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है। वहीं वैश्विक तौर पर यह दर दो से तीन प्रतिशत है।

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बुधवार तक लगभग तीन प्रतिशत मामलों में गहन उपचार प्रदान किया जा रहा था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि मरीजों के ठीक होने की दर में इजाफा हुआ है। मार्च के अंत में जहां यह दर 7.1 प्रतिशत थी, वहीं वर्तमान में यह बढ़कर 39.62 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा, 'यह एक सकारात्मक संकेत है कि 40,000 से अधिक पॉजिटिव मरीज ठीक हो गए हैं और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या वैश्विक आंकड़ों की तुलना में बहुत कम है।'
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अग्रवाल ने कहा कि वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित 15 देशों की 1.4 बिलियन (एक अरब 40 करोड़) से अधिक आबादी में 3.6 मिलियन (36 लाख) मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है लेकिन यहां संक्रमितों की संख्या अब तक केवल एक लाख से ऊपर पहुंची है। संयुक्त सचिव ने कहा, '15 देशों में भारत की तुलना में कम से कम 34 गुना अधिक मामले और 83 गुना अधिक मौतें हुई हैं। यह स्थिति के प्रबंधन को लेकर हमारे द्वारा उठाए गए उपायों के बारे में बहुत कुछ कहता है। भारत का ध्यान हमेशा प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने पर रहा है।'
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वैश्विक स्तर पर 62.3 की तुलना में भारत में प्रति एक लाख जनसंख्या पर केवल 7.9 मामले हैं। वैश्विक औसत मृत्यु दर प्रति एक लाख जनसंख्या पर 4.2 प्रतिशत है जबकि भारत में यह दर केवल 0.2 प्रतिशत है। सरकार ने इसके लिए समय पर पहचान और नैदानिक प्रबंधन को सही कदम बताया है। भारत की परीक्षण क्षमता भी पहले से मजबूत हुई है। अग्रवाल ने बताया कि सोमवार से प्रतिदिन एक लाख से अधिक परीक्षण किए जा रहे हैं।

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