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Covid-19: गाय का गोबर इस्तेमाल करने से दूर होता है कोरोना! जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

Tue, 11 May 2021 10:17 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Tue, 11 May 2021 10:17 AM IST
सार

कई लोग कोरोना संक्रमण को दूर करने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गाय के गोबर का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि गाय का गोबर और गो मूत्र कोरोना को दूर करने में सहायक होने के साथ ही प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है, लेकिन डॉक्टरों ने गोबर के इस्तेमाल को लेकर आगाह किया।

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Coronavirus: Doctors warn against use of cow dung as cure for Covid-19 say other diseases can spread
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संक्रमण हर रोज लाखों लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है और हजारों जिंदगियां निगल रहा है। महामारी के कहर से बचने के लिए लोग हरसंभव प्रयास कर रह हैं। फिर चाहे वो काढ़ा पीने की बात हो या अन्य घरेलू उपाय। इन सबके बीच अफवाहों और सलाहों का बाजार भी गर्म है। कई लोग कोरोना संक्रमण को दूर करने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गाय के गोबर का इस्तेमाल कर रहे हैं।लोगों का मानना है कि गाय का गोबर और गो मूत्र कोरोना को दूर करने में सहायक होने के साथ ही प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है, लेकिन डॉक्टरों ने गोबर के इस्तेमाल को लेकर आगाह किया। जानें डॉक्टरों ने गाय के गोबर को लेकर क्या चेतावनी दी।

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देश के डॉक्टरों ने कोरोना वायरस को दूर करने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गाय के गोबर का इस्तेमाल करने को चेतावनी दी है। डॉक्टरों ने कहा कि इसकी प्रभावशीलता का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और इससे अन्य बीमारियों के फैलने का खतरा भी है। पश्चिमी भारत के गुजरात राज्य में कुछ लोग सप्ताह में एक बार गायों के गोबर और मूत्र से अपने शरीर को ढकने के लिए गायों के आश्रमों में जा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह उनकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देगा या कोरोनावायरस से उबरने में मदद करेगा।
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हिंदू धर्म में गाय जीवन और पृथ्वी का एक पवित्र प्रतीक है। लोग अपने कच्चे घरों की लिपाई के लिए गाय के गोबर का इस्तेमाल करते हैं। यह विश्वास करते हुए कि इसमें चिकित्सीय और एंटीसेप्टिक गुण हैं।
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डॉक्टर भी आते हैं गोबर थैरेपी लेने
फार्मास्युटिकल्स कंपनी के एक एसोसिएट मैनेजर गौतम मणिलाल बोरीसा ने कहा, "हम देखते हैं कि डॉक्टर भी यहां आते हैं। उनका मानना है कि इस थेरेपी से उनकी प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हुआ है और वे बिना किसी डर के मरीजों के पास जा सकते हैं।"

गोबर थैरेपी लेने आते हैं लोग

हिंदू भिक्षुओं द्वारा संचालित 'श्री स्वामीनारायण गुरुकुल विश्वविद्या प्रतिष्ठान' में नियमित रूप से लोग आते हैं। यह आश्रम कोरोना वैक्सीन विकसित कर रही कंपनी जायडस कैडिला के भारतीय मुख्यालय से सड़क के उस पार मौजूद है।  आश्रम में आने वाले लोग अपने शरीर पर गोबर और मूत्र के मिश्रण को लगाकर उसके सूखने का इंतजार करते हैं, वे गायों को आश्रय में गले लगाते हैं और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए योग का अभ्यास करते हैं। फिर मिश्रण को दूध या छाछ से धोया जाता है। भारत और दुनिया भर में डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने कोविड -19 के लिए वैकल्पिक उपचार का अभ्यास करने के खिलाफ बार-बार चेतावनी दी है, यह कहते हुए कि वे सुरक्षा की झूठी भावना पैदा कर सकते हैं और स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

नहीं है कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जेए जयलाल ने कहा, ''इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि गाय का गोबर या मूत्र कोविड-19 के खिलाफ प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करता है, यह पूरी तरह से विश्वास पर आधारित है। इन उत्पादों को नष्ट करने या सेवन करने में स्वास्थ्य जोखिम भी शामिल हैं - अन्य बीमारियां पशु से मनुष्यों में फैल सकती हैं।"

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