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कोरोना के दिल्ली मॉडल से क्या सीख सकता है देश? तेजी से फैल रहे संक्रमण से मिल सकती है निजात!

Mon, 03 Aug 2020 08:12 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 03 Aug 2020 08:12 PM IST
सार

  • देश में कोरोना के मामले 18 लाख के पार, 5.80 लाख एक्टिव केस, संक्रमण से हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर 38201 हुआ  
  • दिल्ली में कोरोना के रोजाना केस की संख्या हुई 1000 से कम, मौतों का आंकड़ा 15 तक पहुंचा
  • विशेषज्ञों की सलाह, दिल्ली मॉडल के कंटेनमेंट जोन, होम आइसोलेशन, ऑक्सीमीटर, तेज टेस्टिंग, मॉनिटरिंग, प्लाज्मा थेरेपी से सीख सकता है देश

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Coronavirus Delhi Model become popular in India, Other states must follow this to prevent infection
एक शख्स के स्वैब का नमूना एकत्र करती महिला स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI (File)

विस्तार

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देश में जहां कोरोना के मामले रिकॉर्ड तेजी के साथ बढ़ते जा रहे हैं, वहीं राजधानी दिल्ली में अब यह काफी कमजोर पड़ गया है। प्रतिदिन नए मामलों की संख्या भी पांच-छह हजार से घटकर एक हजार के लगभग आ चुकी है, तो कोरोना से होने वाली मौतें भी सौ से घटकर 15-20 के आसपास रह गई हैं।


केंद्रीय गृहराज्य मंत्री जी किशन रेड्डी का यह बयान कि सभी राज्यों को दिल्ली मॉडल अपनाना चाहिए, इसी परिदृश्य में देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य अपने स्तर पर दिल्ली मॉडल की तरह प्रयास शुरू भी कर चुके हैं।

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क्या है कोरोना से लड़ाई का दिल्ली मॉडल

दिल्ली देश के उन गिने-चुने क्षेत्रों में शामिल थी, जहां कोरोना ने सबसे पहले अपना विनाशकारी रूप दिखाया। विदेश से आ रहे यात्रियों की वजह से राजधानी में कोरोना का फैलाव शुरू हुआ, तो इसने तेजी से लोगों को अपना शिकार बनाया।

लेकिन सरकार ने कोरोना से लड़ाई का एक मॉडल विकसित किया। इसके तहत किसी भी क्षेत्र में तीन कोरोना संक्रमित सामने आने पर उस क्षेत्र को बाकी क्षेत्र से अलग-थलग या कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया। इससे उस क्षेत्र के लोगों का दूसरे क्षेत्र के लोगों से मिलना-जुलना कम हुआ और इस तरह कोरोना का फैलाव कम किया जा सका। कंटेनमेंट जोन के सभी घरों के सभी कोरोना संभावित लोगों की टेस्टिंग कर उनकी जान बचाना इसी मॉडल के तहत संभव हो पाया।
 
रोजाना टेस्ट्स की क्षमता में बढ़ोतरी की गई। एक समय छह-सात सौ तक होने वाले टेस्ट्स को बढ़ाकर 20 हजार से भी ज्यादा कर दिया गया। आरटी-पीसीआर टेस्ट्स की क्षमता बढ़ाई गई। एंटीजन टेस्ट्स की अनुमति मिलने से रोजाना होने वाले टेस्ट्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई। इससे ज्यादा से ज्यादा नए संक्रमित लोगों की पहचान की जा सकी और उन्हें उचित इलाज उपलब्ध कराया जा सका।
 
कोरोना के नये मामले कम हो जाने के बाद भी दो अगस्त को दिल्ली में 4289 आरटी-पीसीआर टेस्ट और 8441 रैपिड एंटीजन टेस्ट किये गये हैं। दिल्ली अब तक कुल 10,63,669 टेस्ट कर चुकी है। प्रति दस लाख की आबादी पर यह आंकड़ा 55,982 का बनता है जो देश में सबसे ज्यादा है।  
 
सभी राज्यों ने मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने को ही अपनी प्राथमिकता बनाया था, लेकिन दिल्ली ने सबसे पहले इस विचार को आगे बढ़ाया कि लक्षणहीन रोगियों या माइल्ड स्तर के रोगियों को अस्पताल में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्हें थोड़ी से चिकित्सकीय सहायता में उनके घरों में ही बेहतर इलाज दिया जा सकता है। 

इस विधि से केंद्र पहले संतुष्ट नहीं था और उपराज्यपाल अनिल बैजल ने इसे खारिज कर दिया था, लेकिन अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में इस मॉडल से संतुष्ट होने के बाद उन्होंने भी इसे ठीक करार दे दिया।
 
दिल्ली सरकार ने सभी करोना पीड़ितों को ऑक्सीमीटर देकर एक और बेहतरीन कदम उठाया, जिससे लोगों ने अपने ऑक्सीजन स्तर पर लगातार नजर रखी और स्थिति बिगड़ते ही अस्पतालों का रुख किया।

आज भी सच्चाई यह है कि दिल्ली के सभी ठीक होने वाले लोगों में अस्सी फीसदी से ज्यादा लोगों की संख्या होम आइसोलेशन में ठीक होने वालों की ही है। इस समय भी 5663 लोग घरों में रहकर ही अपना इलाज करवा रहे हैं।
 
प्लाज्मा थेरेपी ने गंभीर मरीजों की जान बचाने में काफी कारगर काम किया। राजधानी के एलएनजेपी अस्पताल में सबसे पहले प्लाज्मा थेरेपी को आजमाने की अनुमति मिली थी। लेकिन इसके सटीक नतीजे मिलने के बाद इसे बढ़ाकर प्राइवेट अस्पतालों में भी इजाजत दी गई। साथ ही एलबीएस अस्पताल में प्लाज्मा बैंक बनाया गया। इससे लोगों की जान बचाने में मदद मिली।  

वर्तमान स्थिति

अब तक दिल्ली में कोरोना के कुल 1 लाख 37 हजार 677 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें एक लाख 23 हजार 317 लोग ठीक हो चुके हैं। 10356 लोग इस समय भी संक्रमित हैं, तो 4004 लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार को सामने आये नये मामलों की संख्या केवल 961 रह गई है, वहीं होने वाली मौतों की संख्या केवल 15 रह गई।    
 
दिल्ली कोरोना एप के मुताबिक इस समय दिल्ली में 13,608 बेड्स में से केवल 2980 भरे हुए हैं और 10 हजार से ज्यादा बेड्स खाली हैं। वेंटीलेटर्स वाले 1248 बेड्स में से 358 भरे हुए तो 860 रिक्त हैं। इसी प्रकार बिना वेंटीलेटर वाले 957 बेड्स में से 293 भरे हुए और 664 रिक्त हैं।

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विशेषज्ञ ने कहा

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर अरविंद चोपड़ा ने कहा कि दिल्ली मॉडल कोरोना से लड़ाई के मामले में देश के काम आ सकता है, जिसे अन्य राज्यों को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्धस्तर पर टेस्टिंग, संक्रमण में फैलाव को रोकने के लिए छोटे-छोटे माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाना बेहद कारगर साबित हो सकता है। इस दौरान मरीजों के ऑक्सीजन स्तर पर लगातार नजर बनी रहनी चाहिए क्योंकि अचानक ऑक्सीजन स्तर घटने से व्यक्ति की मौत हो जाती है।

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