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क्या वायु प्रदूषण वाले इलाकों में अधिक है कोरोना मरीजों की मृत्यु दर?
Tue, 21 Apr 2020 02:49 PM IST
प्रदीप पाण्डेय
बीबीसी हिंदी, अमर उजाला
बीबीसी हिंदी, अमर उजाला
Published by: प्रदीप पाण्डेय
Updated Tue, 21 Apr 2020 02:49 PM IST
सार
- हालिया स्टडी में मिला कोरोना से मृत्यु को वायु प्रदूषण से लिंक
- वायु प्रदूषण जनित बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए कोरोना बना खतरनाक
- वायु प्रदूषण की वजह से कोविड-19 की मृत्यु दर में करीब 15 फीसदी का इजाफा हो सकता है
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covid 19 and air pollutions
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के अधिकारियों ने कहा है कि वायु प्रदूषण का ऊंचा स्तर कोविड-19 के गंभीर मामलों के लिए एक रिस्क फैक्टर साबित हो सकता है। दो हालिया स्टडीज में ऊंचे वायु प्रदूषण और कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की ज्यादा दर के बीच एक लिंक सामने आया है। इन स्टडीज में से एक हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की है। आइए जानते हैं विस्तार से...
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डब्ल्यूएचओ के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड एनवायरनमेंट की डायरेक्टर डॉक्टर मारिया नीरा के मुताबिक, 'अगर देशों में प्रदूषण का उच्च स्तर होता है तो कोविड-19 से उनकी लड़ाई में इस पहलू पर भी विचार करना जरूरी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वायु प्रदूषण के चलते कोविड-19 मरीजों की मृत्यु दर में इजाफा होने की आशंका है।'
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उन्होंने कहा, 'हम लैटिन अमरीका, अफ्रीका और एशिया पर नजर रखे हैं। हम अपने डाटाबेस के आधार पर सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की मैपिंग कर रहे हैं ताकि इन क्षेत्रों में सरकारों को सपोर्ट किया जा सके। इससे वे महामारी से निबटने की सही तैयारी कर सकते हैं।'
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- कुछ देशों के मेडिकल प्रोफेशनल्स का कहना है कि उन्होंने कुछ ऐसे मरीज देखे हैं जो कि पहले से वायु प्रदूषण आधारित बीमारियों से जूझ रहे थे और फिर वे गंभीर कोविड-19 संक्रमण का शिकार हो गए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन का अनुमान है कि वायु प्रदूषण के चलते हर साल करीब 70 लाख मौतें होती हैं। वर्ल्ड बैंक की वायु प्रदूषण के वैश्विक वितरण पर पिछले साल जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण से प्रभावित देशों में से कई दक्षिण एशिया, मिडल ईस्ट, सब-सहारा अफ्रीका और उत्तरी अफ्रीका के देश हैं।
- वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और यूएन एनवायरनमेंट की कई रिपोर्ट्स में लैटिन अमरीकी देशों में चिली, ब्राजील, मैक्सिको और पेरू में भी वायु प्रदूषण के ख़तरनाक स्तर पाए गए हैं। लंबे वक्त तक वायु प्रदूषण में रहने के असर पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में पता चला है कि महामारी के पहले के सालों में प्रदूषण के स्तर में मामूली बढ़ोतरी से कोविड-19 की मृत्यु दर में करीब 15 फीसदी का इजाफा हो सकता है।
- अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों पर की गई इस स्टडी में पूरे देश के वायु प्रदूषण के स्तर और जनगणना के आंकड़ों की तुलना जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिस्टम्स एंड इंजीनियरिंग कोरोना वायरस रिसोर्स सेंटर की कोविड-19 मृत्यु दर के आंकड़ों से की गई थी। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी टी एच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधार्थियों के निष्कर्षों के मुताबिक, ऐसी जगहों पर मौत की दर ज्यादा है जहां फाइन पार्टिकल्स, जिन्हें पीएम 2.5 कहा जाता है, की सघनता ज्यादा है।
- हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में कहा गया है, "कोविड-19 की मृत्यु दर आमतौर पर ज़्यादा आबादी घनत्व और ऊंचे पीएम 2।5 एक्सपोजर इलाकों दोनों के पैटर्न पर चलती दिखाई दे रही है।" पीएम 2.5 फाइन पार्टिकल्स हैं, जिनका आकार मानव बाल के व्यास का एक बटे तीस हिस्से के बराबर होता है। ये पार्टिकल्स सांस के जरिए फेफड़ों और धमनियों में पहुंच सकते हैं। इन्हें पहले भी रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस और लंग कैंसर जैसी स्वास्थ्य दिक्कतों से जोड़ा जा चुका है।
- इस स्टडी की अभी दूसरे संस्थानों ने समीक्षा नहीं की है, लेकिन जर्मनी की लुडविग मैक्सीमिलियंस यूनिवर्सिटी की एपीडेमियोलॉजी की चेयर प्रोफ़ेसर एनीटे पीटर्स ने कहा कि ये निष्कर्ष प्रशंसनीय हैं। उन्होंने बताया, "ये हॉस्पिटलाइजेशन और निमोनिया के चलते होने वाली मौतों पर आधारित पिछली रिपोर्ट्स की तर्ज पर हैं।" उन्होंने कहा, 'यह उन पहली स्टडीज में से है जो कि हमारे संदेह और हाइपोथेसिस की पुष्टि करती है कि कोविड-19 की गंभीरता को वायु प्रदूषण से जोड़ा जा सकता है।'
- एक और स्टडी के फोकस में उत्तरी इटली रहा। इस स्टडी में भी पता चला कि ज्यादा वायु प्रदूषण और कोविड-19 की ऊंची मृत्यु दर के बीच संबंध हो सकता है। इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिएना और डेनमार्क की आर्हस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह स्टडी की थी। इटली के आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि लोंबार्डी और एमिलिया रोमाग्ना इलाकों में कोविड-19 की वजह से 21 मार्च तक हुई मौतों की दर करीब 12 फीसदी थी, जबकि इटली के बाकी हिस्सों के लिए यह आंकड़ा केवल 4.5 फीसदी था।
- साइंस डायरेक्ट में छपी इस स्टडी में कहा गया है, "उत्तरी इटली में प्रदूषण का ऊंचा स्तर इस इलाक़े में कोविड-19 की वजह से हुई ज्यादा मौतों की एक अतिरिक्त वजह माना जा सकता है।" इसमें यह भी कहा गया है कि आबादी, उम्र, अलग-अलग स्वास्थ्य सिस्टम्स और क्षेत्रों में प्रीवेंशन पॉलिसीज में विविधता जैसी अन्य वजहों को भी देखा जाना चाहिए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि दुनिया की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी ऐसी जगहों पर रहती है जहां वायु प्रदूषण इसकी गाइडलाइन लिमिट्स से ज्यादा है।
- भारत में कुछ डॉक्टरों ने बताया है कि वे वायु प्रदूषण के चलते हुई बीमारियों और कोविड-19 के मामलों में संभावित लिंक को गंभीरता से ले रहे हैं। दिल्ली के प्राइमस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ पल्मोनरी के हेड डॉ। एस के छाबड़ा के मुताबिक, "अगर वायरस का बड़े पैमाने पर विस्तार होता है तो वायु प्रदूषण की वजह से पैदा होने वाली बीमारियों के शिकार लोग निश्चित तौर पर इससे सबसे बुरी तरह से प्रभावित होंगे।"
- पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन इंडिया के प्रेसिडेंट प्रोफेसर श्रीनाथ रेड्डी इससे सहमत हैं। वह कहते हैं, "अगर वायु प्रदूषण से एयरवेज और लंग टिश्यू को नुकसान हो चुका है तो कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता घट जाती है।" लेकिन, भारत सरकार के स्वास्थ्य अफसरों का कहना है कि अभी कोरोना और वायु प्रदूषण के बीच लिंक साबित करने वाली पर्याप्त जानकारी मौजूद नहीं है। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की स्पोक्सपर्सन डॉ। रजनी कांत श्रीवास्त का कहना है, "इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं और हम इस तरह की कोई स्टडी कर भी नहीं रहे हैं।"