Coronavirus से मुकाबले में सरकार और विपक्ष में कोई लड़ाई नहीं- गुलाम नबी आजाद

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Apr 2020 06:12 PM IST
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gulam nabi azad - फोटो : File

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सार

  • दुनिया को देखें तो भारत में कोविड-19 का संक्रमण सीमित, ऊपर वाले का शुक्रिया
  • प्रधानमंत्री ने खुद ही दलों के नेताओं के सुझाव नोट किए, कहा अमल की करेंगे कोशिश
  • प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन पर कहा, सबकी सलाह से करेंगे निर्णय

विस्तार

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कोविड-19 से मुकाबले में विपक्ष केंद्र सरकार के साथ है। हमारा पहला मकसद मिलकर वायरस के संक्रमण को रोकना, जड़ से खत्म करना है।
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आजाद ने कहा कि बुधवार को संसद में विभिन्न दलों के नेताओं (फ्लोर लीडर्स) से हुई बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रवैया भी बहुत सकारात्मक रहा। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सेंट्रल विस्टा के निर्माण और वेलफेयर फंड को कर्मचारियों में वितरित किए जाने के सुझाव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन पर कहा, सबकी सलाह से करेंगे निर्णय

गुलाम नबी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन के बाबत सबको सुना। उन्होंने स्वीकारा कि उनके पास भी लॉकडाउन को आगे बढ़ाने के सुझाव आ रहे हैं, लेकिन अभी उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया है।
प्रधानमंत्री ने विभिन्न पार्टियों के नेताओं से कहा कि वह इस बारे में कोई भी फैसला मुख्यमंत्रियों और अन्य स्तर पर सलाह लेने के बाद करेंगे। प्रधानमंत्री ने इस दौरान सभी दलों के नेताओं को सकारात्मक सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
प्रधानमंत्री ने नेताओं से कहा कि उन्होंने पार्टी के नेताओं के सुझाव को खुद नोट किया है। वह इस पर ध्यान देंगे और यथासंभव अमल में लाने का प्रयास करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने पहले सबको सुना और अंत में 6-7 मिनट में सबको धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त की।

भारत में हुए प्रयास की आजाद ने की सराहना

आजाद ने कहा कि कोविड-19 को लेकर भारत ने भी जनवरी 2020 में सतर्कता भरे प्रयास शुरू कर दिए  थे। यह एक नई बीमारी है। नए वायरस से फैली है। कहा कि इस बीमारी का अनुमान लगाने में दुनिया के विकसित देश तक काफी चूक गए।

इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि भारत ने समय पर इसको लेकर संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उन्होंने ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि आप दुनिया के विकसित देशों के आंकड़े देखेंगे, तो भारत में इसके संक्रमितों की संख्या अभी तक काफी कम है।
 
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में करीब 15 दलों के नेता शामिल थे। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के सुझावों से शुरुआत हुई।

आजाद ने इसमें डाक्टर, नर्स, जांच कार्य में लगे लोग और अन्य स्टाफ को सुरक्षा किट (पीपीई, मास्क) आदि उपलब्ध कराने, कोविड-19 से लड़ने में लगे लोगों को इश्योरेंस की सुविधा देने का सुझाव दिया। आजाद ने कहा कि वायरस को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस और सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है।

सोशल डिस्टेसिंग को लेकर और सख्त हो सरकार

गुलाम नबी आजाद ने अपने सुझाव में यह भी कहा कि केंद्र सरकार को सोशल डिस्टेंसिंग के लिए और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। अभी के उपाय पर्याप्त नहीं हैं। इसी तरह से देश के भीतर कोविड-19 की बड़े पैमाने पर जांच होनी चाहिए।

इसके लिए लक्ष्य निर्धारित करके सेक्टरवाइज जांच किए जाने की आवश्यकता है। वायरस से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री को राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्र सरकार के अधिकारियों तथा जन प्रतिनिधियों को आगे लाना चाहिए।

एक उच्च स्तरीय समिति बनानी चाहिए और जिन राज्यों में संक्रमितों की संख्या अधिक है, इस समिति में उनके मुख्यमंत्रियों को शामिल करना चाहिए।

जहां के सांसद, उसी राज्य में खर्च हो राशि

सांसद निधि को दो साल तक बंद करने और इसका फंड कोविड-19 से लड़ने में लगाने के सवाल पर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्होंने सरकार से कहा है कि सांसद निधि का पैसा उस राज्य में इस्तेमाल होना चाहिए, जहां से जो सांसद हैं।

इस लड़ाई से निपटने के लिए सांसदों का भी योगदान लिया जाना चाहिए। केंद्रीय स्तर पर इनकी भी समितियां बननी चाहिए। मल्टी पार्टी फोरम भी बनना चाहिए, ताकि सभी मिलकर कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोंके।

मजदूर, किसान, गरीब के लिए भी सुझाव

सरसों कट गई है, गेहूं की कटाई का मौसम है। किसान चिंतित है। दिहाड़ी मजदूर परेशान है। लिहाजा गुलाम नबी आजाद ने केंद्र सरकार को मनरेगा के मजदूरों के इस्तेमाल, किसानों की खाद, कृषि के उत्पाद से जीएसटी हटाने, खाद्यान्नों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और बिना राशन कार्ड वाले गरीबों को भी राशन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।

इसे गांव, ब्लॉक और तहसील स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू कराने का आग्रह किया, ताकि देश में कोई इस महामारी के दौर में भूखा न रहे। इस दौरान केंद्र सरकार के कई विभागों के सचिवों ने सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी।
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