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कोरोना: दिल्ली में बढ़ रहे मामले, राष्ट्रीय औसत से 3.5 गुना ज्यादा हो रहे परीक्षण
Sat, 30 May 2020 09:11 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 30 May 2020 09:11 AM IST
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जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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दिल्ली में लगातार दूसरे दिन एक हजार से ज्यादा कोरोना वायरस के मामले दर्ज किए गए। ज्यादा परीक्षण होने से मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें और अधिक परीक्षण करने की जरूरत है।
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पिछले सात दिनों में रोजाना 5,624 परीक्षण किए गए हैं यानी 29 मई के खत्म हो रहे हफ्ते में औसत पॉजिटिव मरीजों की संख्या 12.6 प्रतिशत है। पिछले शुक्रवार को, सात दिनों तक औसत दैनिक पॉजिटिव मरीजों की दर 9.9 प्रतिशत थी और इससे पहले सप्ताह में यह संख्या 6.4 प्रतिशत थी।
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के ताजा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव की दर गुरुवार तक राष्ट्रीय औसत 6.1 प्रतिशत से बहुत अधिक रही। दिल्ली सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ठीक इसी समय एक सप्ताह में परीक्षण किए गए नमूनों की औसत संख्या 5,624 तक बढ़ गई है, जो एक सप्ताह पहले 5,009 थी।
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दिल्ली की परीक्षण संख्या देश के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सबसे अधिक रही है और यहां हर 10 लाख निवासी पर 10,075 परीक्षण किए गए हैं, जो राष्ट्रीय औसत का लगभग 3.5 गुना है। विशेषज्ञों का कहना है कि पॉजिटिव दर लक्षित परीक्षण रणनीति से काफी प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार दिल्ली में उन सभी लोगों का परीक्षण हो रहा है जिनमें इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी या गंभीर श्वसन संक्रमण के लक्षण, जो स्पर्शोन्मुख या कोविड-19 मरीज के संपर्क में आने से उच्च जोखिम में हैं। अप्रैल के अंत में दिल्ली ने उन नमूनों की जांच करना शुरू कर दिया था जो लंबित पड़े थे खासतौर से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के जरिए कंटेनमेंट जोन से लिए गए नमूने।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने 28 अप्रैल को इस मुद्दे को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के सामने उठाया था क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा संचालित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल्स, नोएडा में नमूनों के परीक्षण लंबित थे। बैठक के एक दिन बाद सरकार ने प्रयोगशाला में तब तक के लिए नमूने भेजने बंद कर दिए जब तक लंबित की रिपोर्ट नहीं आ जाती। चार मई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि नमूनों का परीक्षण किया जाए और 48 घंटों के अंदर रिपोर्ट प्रदान की जाए।