कोरोना का खतरा.. मां संक्रमित तो नवजात में वायरस की आशंका 11 फीसदी
1. नागौर: जन्म से मिला संक्रमण
- यहां दो दिन पूर्व जन्मी बच्ची जन्म से ही कोविड-19 की मरीज पाई गई। उसकी मां और पिता सहित परिवार के सभी 10 सदस्य पहले ही कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इसे देश का पहला ऐसा मामला समझा जा रहा है, जिसमें मां से बच्ची में संक्रमण हुआ।
2. आगरा: जन्म से संक्रमण नहीं
- एसएन मेडिकल कॉलेज में संक्रमित महिला ने बच्चे को जन्म दिया। जांच में नवजात में संक्रमण नहीं मिला है, इस पर परिजनों ने राहत की सांस ली है। हालांकि क्वारंटीन की गई उसकी मां से उसे संक्रमण होने की आशंका जताई जा रही है, इसके लिए विशेष देखभाल की जा रही है।
दो शहरों में मिले ये दो मामले गर्भवती महिलाओं से उनके बच्चों में संक्रमण की स्थिति दर्शाते हैं। इसे लेकर भारत में किए गए अध्ययन के अनुसार गर्भवती महिला में संक्रमण होने पर 11 प्रतिशत मामलों में नवजात को भी संक्रमण हो सकता है। यह दावा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय प्रजनन स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान मुंबई के वैज्ञानिकों ने किया है।
साथ ही इन बच्चों में सांस की दिक्कत (रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम) और निमोनिया की भी आशंका जताई गई है। इस अध्ययन के लिए संस्थान के क्लीनिकल रिसर्च, मॉलिक्युलर व सेल्युलर बायोलैब और स्ट्रक्चरल बायोलॉजी विभागों के वैज्ञानिकों ने विश्वभर में 172 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य रिपोर्ट का विश्लेषण व फॉलोअप किया।
उन्होंने रिपोर्ट में लिखा कि गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ या नवजात पर वायरस के असर को लेकर कम जानकारियां उपलब्ध हैं। इस वायरस यानी सार्स-सीओवी-2 के परिवार के ही सार्स-सीओवी और मर्स-सीओवी की वजह से गर्भपात, गर्भस्थ शिशु की शारीरिक वृद्धि पर बुरे असर, समय पूर्व प्रसव और मां की मौत जैसे मामले पहले सामने आ चुके हैं।
इन महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने और कई बार देखभाल में कमी से संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। वहीं अस्पताल आने-जाने, अस्पताल परिसर, जैसी जगहों पर लापरवाही बरतने पर भी संक्रमण हो सकता है। ऐसे में इन महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए।
ऐसे बनाई रिपोर्ट
इन वैज्ञानिकों डॉ. राहुल कुमार, डॉ. दीपक एन मोदी और डॉ. स्मिता महाले ने विश्व के अलग-अलग देशों की 160 प्रसूताओं, उनके 162 नवजातों (दो जुड़वां) और 12 गर्भवती महिलाओं की रिपोर्ट को अध्ययन में शामिल किया। यह सभी महिलाएं संक्रमित थीं।
गर्भवती में संक्रमण: हालात और लक्षण
इन सभी महिलाओं में निमोनिया मिला, यह वायरस की वजह से हुआ था। 11 प्रतिशत में डायबिटीज, 9 प्रतिशत में हाइपरटेंशन, 6 प्रतिशत में अन्य संक्रमण, 5 प्रतिशत में हाइपोथायरॉइडिज्म और चार में एनीमिया पहले से थे।
लक्षण: मांसपेशियों में
- बुखार- 54
- खांसी- 35
- दस्त- 04
- दर्द- 17
- सांस लेने में कष्ट- 12
50 प्रतिशत में प्रसव के समय मिला संक्रमण
चौंकाने वाला तथ्य यह भी था कि करीब आधी गर्भवती महिलाओं में संक्रमण की पुष्टि प्रसव वेदना शुरू होने के बाद हुई। इसकी वजह वायरस का नया होना और जागरूकता की कमी हो सकती है। यह सबक है कि गर्भवती महिलाओं में लक्षणों को पहचान कर समय रहते संक्रमण की जांच होनी जरूरी है ताकि प्रसव के समय नई जटिलताएं पैदा न हों। अधिकतर का प्रसव ऑपरेशन से हुआ।
जटिलता
- सी सेक्शन- 89
- समय पूर्व प्रसव पीड़ा- 21
- भ्रूण के लिए जोखिम- 9
- समय पूर्व झिल्ली फटना- 8
(आंकड़े फीसदी में)