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कोविड 2.0 में राजनीति: सोनिया गांधी ने भाजपा को बताया 'स्टॉकहोम सिंड्रोम' का मतलब

Sun, 18 Apr 2021 06:05 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 18 Apr 2021 06:05 PM IST
सार

देश में जारी कोविड 2.0 के कहर के बीच राजनीति भी चरम पर है। कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मोदी सरकार को निशाने पर ले लिया। उन्होंने भाजपा को इशारों में 'स्टॉकहोम सिंड्रोम' का मतलब समझाते हुए कह दिया कि केंद्र के लिए राज्यों से दूरी बनाना ठीक नहीं है। केंद्र, 'सहकारी संघवाद' की भावना के विरुद्ध काम न करे। 

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Coronavirus and Politics: Sonia Gandhi told BJP meaning of stockholm syndrome
सोनिया गांधी - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

कोरोना संक्रमण को आधार बनाकर सोनिया गांधी ने केंद्र को यह संदेश भी दे दिया कि राज्यों की उपेक्षा हो रही है। केंद्र सरकार का हर आदेश तथा निर्देश कानून बन जाता है। राज्य सरकारों के पास राज्य-विशिष्ट रणनीतियों और प्रशासनिक उपायों को अपनाने तथा लागू करने का कोई अधिकार या स्वतंत्रता नहीं रही। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, इस समय राज्यों के पास एक करोड़ 58 लाख डोज हैं, जबकि सप्लाई के अंदर वैक्सीन की एक करोड़ 16 लाख 84 हजार डोज हैं। वैक्सीन की कहीं कोई कमी नहीं है। केंद्र सरकार इस आपदा में राज्यों को पूरा सहयोग दे रही है।

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भाजपा ने क्यों और कब कहा था 'स्टॉकहोम सिंड्रोम' से ग्रसित है कांग्रेस 
बता दें कि 2019 में जब भाजपा ने देश की अर्थव्यस्था को पांच हजार अरब डॉलर तक ले जाने की बात कही तो कांग्रेस पार्टी ने उस पर कई सवाल खड़े कर दिए थे। कांग्रेस ने कहा था, सरकार का विचार तो नेक है, लेकिन उसके पास यह लक्ष्य हासिल करने का न तो कोई खाका है और न ही दिशा है। विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया था कि सरकार उपकर और अधिभार लगाकर धन संग्रह कर रही है, लेकिन राज्यों की उपेक्षा कर रही है। यह सहकारी संघवाद की भावना के विरुद्ध है। भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा था, यह पार्टी सबसे ज्यादा ज्ञानवान होने के 'स्टॉकहोम सिंड्रोम' से ग्रसित है। मोदी सरकार ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार से विरासत में मिली जर्जर अर्थव्यवस्था को कर आतंकवाद की व्यवस्था एवं नीतिगत पंगुता से निकालकर सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाया है। लोकसभा में 'वित्त (संख्यांक 2) विधेयक-2019' पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि सरकार उपकर और अधिभार लगाकर धन संग्रह कर रही है, लेकिन इसमें राज्य सरकारों को उपेक्षित रखा जा रहा है।
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कोरोना काल में सोनिया गांधी ने बताया सिंड्रोम का मतलब
सोनिया गांधी ने कार्यसमिति की बैठक में अपने वक्तव्य का अधिकांश हिस्सा 'राज्यों' के आसपास रखा है। उन्होंने कहा, पहले दिन से ही केंद्र सरकार ने महामारी के नियत्रंण से संबंधित सभी शक्तियां और अधिकार अपने हाथों में ले लिए। महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार का हर आदेश तथा निर्देश कानून बन गया है। राज्य सरकारों के पास राज्य-विशिष्ठ रणनीतियों और प्रशासनिक उपायों को अपनाने तथा लागू करने का कोई अधिकार या स्वतंत्रता नहीं रही। गत वर्ष भारत में बिना कोई पूर्व सूचना के लॉकडाउन लगा दिया गया। राज्यों के साथ भी यही हुआ, केंद्र सरकार ने बिना तैयारी के लॉकडाउन लागू कर दिया। मजबूरन लाखों लोग अपने राज्यों में वापस जाने के लिए पैदल निकल पड़े। एक अनुमान के अनुसार इनमें से 198 लोगों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मौजूदा स्थितियों में टीकाकरण का क्रियान्वयन राज्य सरकारों और सरकारी तथा निजी अस्पतालों को सौंपने में केंद्र की विफलता सामने आई है। 

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आपदा से निपटने का सारा उत्तरदायित्व राज्य सरकारों पर डाल दिया

कांग्रेस के मुताबिक, तीसरी तालाबंदी की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को आदेश और निर्देश जारी करने की अपनी शक्ति बरकरार रखते हुए कोरोना से निपटने का सारा उत्तरदायित्व राज्य सरकारों पर ही डाल दिया। इससे भी बदतर बात ये हुई कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को देश के सबसे गंभीर चिकित्सा आपातकाल से लड़ने के लिए पर्याप्त राशि मुहैया नहीं करवाई। ऐसी परिस्थितियों में धन की कमी की समस्या से जूझ रही राज्य सरकारों ने महामारी से लड़ने के लिए डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, परीक्षण किट, अस्पताल के बिस्तर, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर आदि को जुटाने का यथासंभव प्रयास किया। राज्य सरकारों द्वारा किए गए इन्हीं प्रयासों के लिए उन्हें साधुवाद, जिसमें केंद्र सरकार का कोई योगदान नहीं। विभिन्न राज्यों को वैक्सीन खुराक की आवश्कता अनुसार उचित और न्यायसंगत आवंटन दिलवाने में केंद्र विफल रहा है। कांग्रेस पार्टी के अनुसार, आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा शासित कई राज्यों को उनकी आवश्यकता के बावजूद उनके उचित हिस्से से कम वैक्सीन की मात्रा मिली। अपारदर्शी पीएम-केयर फंड में सैकड़ों करोड़ रुपये जमा होने के बावजूद राज्य सरकारों को पर्याप्त धन मुहैया कराने में असफलता, जो दो मोर्चों पर युद्ध लड़ रहे थे, एक महामारी के खिलाफ और दूसरा आर्थिक मंदी के खिलाफ। 

सहकारी संघवाद के ठीक नहीं केंद्र सरकार की नीतियां: डॉ. मनमोहन सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पहले ही 15 वें वित्त आयोग के विषय एवं शर्तों में बदलाव के तरीके को 'एकपक्षीय' बता चुके हैं। उन्होंने इस मसले पर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। डॉ. सिंह ने कहा था कि एकपक्षीय सोच संघीय नीति एवं सहकारी संघवाद के लिए ठीक नहीं है। साल 2019 में एक राष्ट्रीय परिचर्चा में उन्होंने कहा था सरकार, वित्त आयोग के विचारणीय विषय व शर्तों में फेरबदल करना भी चाहती थी तो अच्छा तरीका यही होता कि उस पर 'राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन' का समर्थन ले लिया जाता। ऐसा नहीं करने से यह संदेश जाएगा कि धन के आवंटन के मामले में केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों को छीनना चाहती है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, मुझे लगता है कि हम अपने देश की जिस संघीय नीति और सहकारी संघवाद की कसमें खाते हैं, यह उसके लिए ठीक नहीं है। 

सोनिया गांधी को सस्ती राजनीति नहीं करनी चाहिए: प्रकाश जावड़ेकर 
सोनिया गांधी को लेकर भाजपा के केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, अब कोरोनो वायरस से लड़ाई का वक्त है। कांग्रेस अध्यक्ष को 'सस्ती राजनीति' नहीं करनी चाहिए। केंद्र सरकार, संविधान के मुताबिक काम करती है। राज्यों को हर फैसले से अवगत कराया जाता है। जहां जरुरी है, वहां उनकी राय भी ली जाती है। जावड़ेकर ने कहा, 'हम सांप्रदायिक विभाजन पैदा नहीं कर रहे हैं। हम एकजुट होकर सीओवीआईडी -19 से लड़ रहे हैं। हम उनसे सस्ती राजनीति नहीं करने का अनुरोध करते हैं। उन्हें छोटी राजनीति में नहीं फंसना चाहिए। 

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