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राहत: बिना लक्षण वालों को दवा की जरूरत नहीं, संतुलित आहार ही पर्याप्त 

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 08 Jun 2021 07:07 AM IST

सार

  • कोरोना मरीजों के उपचार को लेकर फिर से जारी हुए दिशा-निर्देश
  • एचसीक्यू, आइवरमेक्टिन, विटामिन, फेविपिराविर, प्लाज्मा तक को हटाया
  • बिना लक्षण वाले मरीजों को किसी भी दवा की जरूरत नहीं
  • हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए केवल पैरासिटामाल और बुडेसोनाइड कफ सीरप ही काफी
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कोरोना वायरस इलाज
कोरोना वायरस इलाज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोरोना मरीजों के चिकित्सकीय प्रोटोकॉल में एक बार फिर बदलाव हुआ है। इस बार एचसीक्यू, आइवरमेक्टिन, विटामिन, फेविपिराविर, प्लाज्मा सहित उन सभी दवाओं को हटाया है जिन्हें पिछले एक साल से मरीजों को दिया जा रहा था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार बिना लक्षण वाले मरीज को अब किसी भी दवा की जरूरत नहीं है। ऐसे मरीज संतुलित आहार और परिजनों से बातचीत करते हुए ठीक हो सकते हैं। 
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इन दिशा-निर्देशों में हल्के लक्षण से ग्रस्त रोगियों के लिए एचसीक्यू, फेविपिराविर, आइवरमेक्टिन, एजिथोमाइसिन, डॉक्सीसाइक्लिन, जिंक और विटामिन इत्यादि दवाओं की जरूरत को हटाया है। जबकि पिछले एक वर्ष से देश भर में कोरोना रोगियों को इन दवाओं का सेवन कराया जा रहा था जिसके चलते बाजार में मांग बढ़ने पर इन दवाओं की कालाबाजारी भी खूब हुई। हालांकि महानिदेशालय के यह नए दिशा-निर्देश भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दिशा निर्देशों का खंडन भी कर रहे हैं।


रेमडेसिविर देने से पहले सोचना जरूरी
रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब को लेकर अब कहा गया है कि ये दोनों दवाएं केवल प्रयोगात्मक रुप से इस्तेमाल की जा रही हैं। इन दवाओं के गंभीर दुष्प्रभाव भी हैं। इसलिए डॉक्टरों से कहा गया है कि इन दवाओं को देने से पहले एक बार सोचना जरूर है। इनके इस्तेमाल पर उच्च सावधानी रखने की सलाह है।  

फंगस, स्टेरॉयड, एचआर-सीटी पर स्पष्ट हिदायत
फंगस के मरीजों को कब और किस स्थिति में एम्फोटेरिसिन बी का इंजेक्शन देना है, इसके बारे में भी अलग एक पूरा पेज दिया है। इसी तरह स्टेरायॅड और एंटी कोगुलेंट के इस्तेमाल को लेकर भी साधारण भाषा में एक-एक बिंदु स्पष्ट किया है। इसके अनुसार 10 दिन तक दिन में एक बार छह एमजी डेक्सामेथोसॉन दी जा सकती है। डॉक्टरों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि एचआर सीटी और स्टेरॉयड युक्त दवाओं का इस्तेमाल बहुत अधिक सावधानी के साथ करना है।

बिना लक्षण वाले मरीज
पहचान: न बुखार, न खांसी, न सांस लेने में तकलीफ, केवल रिपोर्ट पॉजिटिव।
उपचार: होम आइसोलेशन और टेलीमेडिसिन ही काफी। किसी दवा की आवश्यकता नहीं है। न ही कोई खून या अन्य चिकित्सीय जांच कराने की जरूरत है। पहले से कोई और बीमारी है तो उसकी दवा जारी रख सकते हैं। स्वस्थ संतुलित आहार का सेवन करते रहें। सकारात्मक बातचीत करें, फोन-वीडियो कॉल पर घर वालों को समय दें।

हल्के लक्षण वाले मरीज
पहचान: सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं, ऑक्सीजन 94 फीसदी से अधिक।
उपचार: होम आइसोलेशन के साथ टेली मेडिसिन पर सलाह ले सकते हैं। घर में जगह नहीं है तो कोविड निगरानी सेंटर जा सकते हैं। स्वस्थ संतुलित आहार का सेवन करें और घर वालों से फोन पर बात करें, उन्हें समय दें। बुखार, सांस लेने में दिक्कत या ऑक्सीजन की कमी के बारे में मरीज खुद ही दिनचर्या को लिखेंगे और डॉक्टर से बात करेंगे। ऐसे मरीजों को बुखार आने पर पैरासिटामॉल और खांसी के लिए बुडेसोनाइड दे सकते हैं। इनके अलावा कोई और दवा या फिर जांच की जरूरत नहीं है।

मध्यम लक्षण वाले
पहचान: सांस की तकलीफ या फिर सांस लेने में कठिनाई, श्वसन दर 24 से अधिक लेकिन 30 से कम, एसपीओ2 कमरे की हवा पर 90-93 फीसदी इत्यादि।
उपचार: ऐसे मरीजों को कोविड अस्पताल या जिला केंद्र में भर्ती किया जा सकता है। इन मरीजों को ऑक्सीजन, पहले से मौजूद बीमारी, स्टेरॉयड और एंटी कोगुलेंट दवाएं दी जा सकती हैं। 2डीजी या फिर कोरोनिल का कोई जिक्र नहीं है।  अगर मरीज सीओपीडी (काला दमा) से ग्रस्त है तो उसे ऑक्सीजन थेरैपी नहीं दे सकते। इन मरीजों में पहले से अन्य रोग जैसे मधुमेह इत्यादि का पर ध्यान ज्यादा देना है। ऑक्सीजन 92 से कम होता है तो ही स्टेरॉयड देना होगा। प्रोनिंग के लिए सलाह दें।

गंभीर मरीजों के लिए
पहचान: सांस की तकलीफ, श्वसन दर 30/मिनट से अधिक, एसपओ2 : सीओपीडी को छोड़कर कमरे की हवा पर 90 फीसदी से कम इत्यादि।
उपचार: इन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती करने के साथ ऑक्सीजन थेरेपी में देरी नहीं करनी है। रोगी में सुधार न होने पर एचएफएनसी के उपयोग पर विचार करें। फिर भी सुधार नहीं होता है तो वेंटिलेटर पर विचार कर सकते हैं। स्टेरॉयड थेरैपी शुरू करें।

मध्यम और गंभीर मरीजों के ही जांच
सीबीसी, रक्त ग्लूकोज, मूत्र दिनचर्या, एलएफटी, केएफटी, सीआरपी, एस फेरिटिन, डी-डीआईएमईआर, एलडीएच, सीपीके। इन्हें दोहराया भी जा सकता है। दोबारा जांच करनी है तो सीआरपी और डी-डीआईएमईआर 48 से 72 घंटे, सीबीसी, केएफटी, एलएफटी 24 से 48 घंटे इत्यादि। एचआर सीटी चेस्ट केवल तभी किया जाना चाहिए जब लक्षण बिगड़ते जाएं।
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