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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट: अनियोजित टीकाकरण से वायरस म्यूटेंट बढ़ने का खतरा
Sat, 12 Jun 2021 08:06 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 12 Jun 2021 08:06 AM IST
सार
समूह ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि बड़े पैमाने पर लोगों के टीकाकरण की जगह केवल उन लोगों का टीकाकरण किया जाना चाहिए जो संवेदनशील और जोखिम श्रेणी में शामिल हैं।
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भारत में कोरोना टीकाकरण
- फोटो : PTI
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विस्तार
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक समूह ने कहा है कि बड़े पैमाने पर अंधाधुंध और अपूर्ण टीकाकरण कोरोना वायरस के उत्परिवर्तित (म्यूटेंट) स्वरूपों के उभार की वजह बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि जो लोग कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, उनके टीकाकरण की कोई आवश्यकता नहीं है।
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इस समूह में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टर कोविड-19 संबंधी राष्ट्रीय कार्यबल के सदस्य भी शामिल हैं।
देश में महामारी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए लॉजिस्टिक और एपिडेमियोलॉजिकल डाटा के अनुसार, इस स्तर पर सभी आयु समूहों के लोगों के वैक्सीनेशन के बजाय उन लोगों को प्राथमिकता से वैक्सीन देने के निर्देश दिए जाने चाहिए जिन्हें कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा ज्यादा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, युवा वयस्कों और बच्चों का टीकाकरण उतना प्रभावी नहीं है। इसलिए अनियोजित वैक्सीनेशन म्यूटेंट स्ट्रेन को बढ़ावा दे सकता है।
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इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, इंडियन एसोसिएशन ऑफ एपिडमोलॉजिस्ट्स और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रीवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन के विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश में महामारी की मौजूदा स्थिति मांग करती है कि इस चरण में सभी आयु समूहों के लिए टीकाकरण को खोलने की जगह हमें महामारी संबंधी आंकड़ों से खुद को निर्देशित करना चाहिए।
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रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी गई है। इसमें यह बताया गया है कि कम उम्र के वयस्कों और बच्चों का टीकाकरण साक्ष्य समर्थित नहीं है और यह किफायती नहीं होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनियोजित टीकाकरण से वायरस के उत्परिवर्तित स्वरूपों को बढ़ावा मिल सकता है।
इसमें कहा गया है कि जो लोग कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, उनके टीकाकरण की अभी कोई आवश्यकता नहीं है।