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भारत को 2021 की शुरुआत तक मिल सकती है कोरोना वैक्सीन, जानें कितनी होगी एक डोज की कीमत  

Sat, 29 Aug 2020 04:45 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 29 Aug 2020 04:45 AM IST
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Corona vaccine in india may get by early 2021
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

भारतीय बाजारों में कोरोना की वैक्सीन साल 2021 के पहले तिमाही में उपलब्ध हो सकती है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्न्सटीन ने एक रिपोर्ट में वैक्सीन के ट्रायल के आगे बढ़ने की गति के आधार पर यह संभावना जाहिर की है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर फिलहाल चार वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए पुष्ट दवा के तौर पर मंजूरी पाने के करीब हैं। इनके प्रयोग पूरे होने के बाद मंजूरी मिलने तक की प्रक्रिया 2020 के अंत या 2021 की शुरुआत में पूरी होने के आसार हैं। साझेदारी के जरिये भारत इनमें से एजेड/ऑक्सफोर्ड की वायरल वेक्टर वैक्सीन और नौवावेक्स की प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन तक अपनी पहुंच बना चुका है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिरक्षक प्रतिक्रिया हासिल करने के लिए सुरक्षा और क्षमता, दोनों के स्तर पर वैक्सीन के पहले व दूसरे चरण के डाटा आशाजनक साबित हुए हैं। हमें उम्मीद है कि भारत में 2021 के पहले तिमाही के दौरान एक सफल वैक्सीन बाजारों में आ जाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैक्सीन की एक खुराक के लिए भारतीय मरीजों को 3 से 6 डॉलर  (225 रुपये से 550 रुपये) तक खर्च करना पड़ सकता है।
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18 से 20 महीने लग जाएंगे सारी जनता को वैक्सीन लगाने में
रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर बालिगों के टीकाकरण कार्यक्रम में भारत के कम अनुभव को देखते हुए कहा गया है कि देश में हर्ड इम्युनिटी हासिल करने में 2 साल लग जाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया कि पोलियो उन्मूलन अभियान 2011 में चालू किया गया और हालिया तीव्र गति का मिशन इंद्रधनुष बड़े पैमाने पर अभियानों का उदाहरण है।

लेकिन यह उस स्तर का महज एक तिहाई है, जिसकी कोरोना वैक्सीन हर एक को उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्यक्रम के तहत जरूरत होगी। रिपोर्ट में वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेन स्टोरेज और प्रशिक्षित लोगों की कमी को सबसे बड़ी बाधा बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि सरकारी कार्यक्रमों के वर्तमान आउटपुट को दोगुना कर दिया जाए, तो भी टीकाकरण में 18 से 20 महीने लग जाएंगे।
 
स्वास्थ्य कर्मियों और बुजुर्गों को मिल सकती है प्राथमिकता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैक्सीन के आवंटन में स्वास्थ्य कर्मियों, 65 साल से ज्यादा के बुजुर्गों, आवश्यक सेवाओं को कर्मचारियों और जनसंख्या के कमजोर आार्थिक वर्ग को वैक्सीन के पहले बैच के तहत टीकाकरण करने में प्राथमिकता दी जा सकती है।

 
ऑक्सफोर्ड से नोवावैक्स की वैक्सीन के परिणाम ज्यादा बेहतर
रिपोर्ट में एजेड/ऑक्सफोर्ड की वायरल वेक्टर वैक्सीन और नौवावेक्स की प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन की तुलना भी की गई है। इसके मुताबिक, नोवावैक्स लेने वालों में ज्यादा एंटीबॉडी और वायरल न्यूट्रिलाइजेशन दिखाई दिया। यह करीब 5 से 6 एचसीएस के स्तर पर था, जबकि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन औसत एचसीएस स्तर के करीब ही रही है।

हालांकि दोनों के कॉन्वलेसंट (ठीक होने वाले) ग्रुप अलग-अलग थे। दोनों के तीसरे चरण के परीक्षण चल रहे हैं और फिलहाल दोनों की 21 से 28 दिन में दूसरी खुराक की आवश्यकता पड़ती है। बर्न्सटीन का कहना है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ  इंडिया (एसआईआई) देश में पहली वैक्सीन देने की सबसे अच्छी स्थिति में है, जिसकी दोनों के ही साथ साझेदारी है।

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