किस राज्य में किसे लगी है कोरोना की वैक्सीन, दिल्ली तक रहेगा पूरा हिसाब
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देश में नए साल में कोरोना से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण शुरू होने जा रहा है। वैक्सीन कैसे समय से शहरों तक पहुंचे और लोगों को लग सके। इसके लिए बड़े पैमाने केंद्र सरकार की ओर से तैयारी की जा रही है। राज्यों के शहरों में बने बूथों पर एक दिन में केवल 100 लोगों को ही वैक्सीन दी जाएगी। एक दिन में कितनी वैक्सीन उपयोग हुई और कितनी वैक्सीन शेष बची है, कितने लोगों को अब तक दी गई है। इसका पूरा हिसाब-किताब दिल्ली तक रहेगा।
देशभर में चलने वाले इस अभियान के लिए अभी तक देश भर में 50 हजार हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर पर 2,360 लोगों को ट्रेनिंग दी गई है। जबकि जिला स्तर पर सात हजार लोगों को ट्रेनिंग दी गई है। वहीं अभी तक 681 जिलों में करीब 50 हजार प्रोफेशनल्स को वैक्सीन देने की ट्रेनिंग दी गई है।
हर बैच के चुनिंदा सैंपल की होगी जांच
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन से वैक्सीन को अंतिम तौर पर मंजूरी मिलने के बाद देशभर में टीकाकरण अभियान शुरू होगा। वैक्सीन के प्रयोग से पहले सरकार उसके हर बैच के कुछ सैंपल की जांच हिमाचल की सेंट्रल लैब या नोएडा स्थित लैब में करवाएगी। सैंपल पास होने के बाद सरकार इसे सभी राज्यों में भेजेगी।
देश के सुदूर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्र में जहां सड़क से वैक्सीन को पहुंचाने में समय लगेगा, उन स्थानों की पहचान कर वायु मार्ग से वैक्सीन को सेंटर तक पहुंचाया जाएगा। पोर्टेबल कोल्ड चेन टांसपोर्ट के जरिए अन्य शहरों के सेंटर तक पहुंचाने की व्यवस्था होगी।
देश में वर्तमान में जितनी वैक्सीन प्रिजर्व करने की क्षमता है, उसमें एक करोड़ वैक्सीन के डोज को आसानी से रखा जा सकता है। फिलहाल देश में 29 हजार 947 कोल्ड चेन प्वाइंट हैं जिसमें 85 हजार 634 मशीन या इक्यूपमेंट हैं जिसमें वैक्सीन को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है।
वैक्सीन कोल्ड चेन बॉक्स के जरिए लोगों तक पहुंचेगी वैक्सीन
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्रिय वैक्सीन सेंटर से वैक्सीन को जिले के कोल्ड चेन सेंटर तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद जिले से कोल्ड चेन मेंटेन करते हुए वैक्सीन को जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या दूसरे स्वास्थ्य केंद्र जहां सेशन साइट बनाया गया है, वहां तक पहुंचाई जाएगी।
यदि प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही सेशन प्वाइंट बना है और वहीं वैक्सीन रखने की व्यवस्था है तो सीधे सेशन प्वाइंट तक भी लाई जा सकती है। सुदूर ग्रामीण इलाकों में मोबाइल लैब और वैक्सीन कोल्ड चेन बॉक्स के जरिए इसे लोगों तक पहुंचा जाएगा।
वैक्सीन की पूरी विस्तृत जानकारी और संख्या को-विन पोर्टल पर उपलब्ध होगी। किस व्यक्ति को किस वैक्सिनेटर ने किस कंपनी की और कितने बजे डोज दी यह सभी जानकारी नोट की जाएगी। जिन लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई है, उन्हें करीब एक घंटे तक सेशन प्वाइंट पर ही रहना होगा।
पहले इन लोगों का लगेगा टीका
स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, टीकाकरण अभियान में सबसे पहले देशभर में 1 करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों, 3 करोड़ फ्रंट लाइन वर्कर्स और 27 करोड़ पचास वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को ये टीका लगाया जाएगा। इसके बाद कोरोना संक्रमण के फैलाव और वैक्सीन की उपलब्धता के अधार पर टीकाकरण किया जाएगा।
राज्यों के लोकसभा और विधानसभा के चुनावों के आंकड़ों के आधार पर 50 वर्ष से ऊपर के लोगों की पहचान की जाएगी। इसके लिए सरकार ने एक डिजिटल प्लेटफार्म कोविड वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क भी तैयार किया है।
इसके जरिए इन लोगों को ट्रेक किया जाएगा। इस प्लेटफार्म पर हर समय अपडेट होगा कि किस व्यक्ति को टीका लगा है या कौन रह गया है। प्राथमिकता के आधार पर ही टीका लगेगा। मौके पर किसी भी व्यक्ति का पंजीयन नहीं किया जाएगा।
ये लोग लगाएंगे लोगों को टीका
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, वैक्सीनेशन के सेशन आयोजित होंगे। एक सेशन में 100 लोगों को ही टीका लगाया जा सकेगा। स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को एक तय स्थान पर ही टीका लगाया जाएगा। बाकि लोगों को चिन्हित स्थानों पर या मोबाइल लैब के जरिए टीका लगाया जाएगा। इसका रोज हिसाब-किताब होगा।
हर बूथ, मोबाइल लैब पर एक मेडिकल ऑफिसर, वैक्सीन हैंडलर, वैक्सिनेटर, आशावर्कर, सुपरवाइजर होगा। जिन लोगों को वैक्सीन दी जाएगी उनका नाम नंबर और यूनीक आईडी नंबर की पूरी जानकारी एकत्र की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति को रिएक्शन की शिकायत होती है तो उक्त बैच नंबर से वैक्सीन की पूरी जानकारी निकल सकेगी।
हर स्तर पर बांटी गई जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 का गठन किया है। इसमें नीति आयोग के सदस्य, स्वास्थ्य विभाग के सचिव, आईटी विभाग के सचिव, एम्स के निदेशक सहित कई अहम विभागों के आला अफसर शामिल हैं। ये पूरा ग्रुप वैक्सीन के ट्रायल, ट्रांसपोर्टेशन के अलावा अन्य देशों से समन्वय और मॉनिटरिंग का काम देखेगा।
इसके अलावा राज्य स्तर पर भी समितियां तैयार की गई हैं। इसमें मुख्य सचिव प्रमुख, संयोजक स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अफसर होंगे। इनमें राज्य सरकार के विभाग के प्रमुख के अलावा अन्य संस्थाओं के सदस्य भी होंगे। ये टीम टीकाकरण करने वाले स्टाफ की ट्रेनिंग और मरीजों की पहचान करेगी।
इसके अलावा राज्य में टीकाकरण अभियान की पूरी प्लानिंग और मॉनिटरिंग करेगी। इसके अलावा एक स्टेट टास्क फोर्स भी होगी, जो जिलों के साथ रोज मॉनिटरिंग और डेटाबेस की जानकारी रखेगी। 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम भी तैयार किया जाएगा।
जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स और निगम आयुक्त की अध्यक्षता में अर्बन टास्क फोन बनाई गई है। एसडीएम और बीडीओ ब्लॉक स्तर के काम देखेंगे। यही टीम टीकाकरण में जुटे स्टाफ की ट्रेनिंग और तैनाती का कार्य देखेगी।