कोरोना: ये पांच बातें दे सकती हैं तीसरी और चौथी लहर को मात, सबसे पहले बदलना होगा जांच का तरीका
भारत सरकार के वैज्ञानिक और डॉक्टर, कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आने की चेतावनी दे चुके हैं। केंद्र और राज्य सरकारें, कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के प्रयासों में जुटी हैं। सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और मेडिकल क्षेत्र के टॉप विशेषज्ञ यह बात कह चुके हैं कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए विशेष उपाय करने होंगे। ऐसे में देश के नामचीन डॉक्टर डॉ. एम वली ने वो पांच बातें बताई हैं, जिनसे हम तीसरी और चौथी लहर को मात दे सकते हैं और शवों की कतारों जैसी दुखद स्थिति से बच सकते हैं।
पिछली भूलों से सीखें : डॉ. वली
पूर्व राष्ट्रपति रामस्वामी वेंकटरमण, शंकरदयाल शर्मा और प्रणब मुखर्जी के चिकित्सक रहे हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एम वली, जो मौजूदा समय में गंगाराम अस्पताल में कंसल्टेंट हैं, का कहना है, हमें पिछली भूलों से सीखना होगा। टेस्ट प्रक्रिया, स्वास्थ्य सुविधाएं, टीकाकरण, मेडिकल स्टाफ और जानबूझकर जोखिम लेना, अगर इन पांच बातों का ध्यान रखेंगे तो कोरोना की तीसरी ही नहीं, बल्कि चौथी लहर का भी सामना कर सकेंगे। सरकारों के अलावा लोगों की इच्छाशकित यह तय करेगी कि वे दोबारा से शमशान घाट के बाहर शवों की लंबी कतार देखना चाहते हैं या नहीं। उन्होंने ये पांच बातें सुझाई हैं-
1. टेस्ट प्रक्रिया में बदलाव लाना होगा
गत वर्ष पहली बार कोरोना संक्रमण हुआ तो कई तरह के स्वास्थ्य केंद्र खोले गए थे। बाद में जब केस कम हुए तो उन केंद्रों पर मौजूदा टेस्ट प्रक्रिया भी सुस्त होती चली गई। अब भगदड़ मची है। टेस्ट को लेकर एक जैसा प्रोटोकॉल नहीं अपनाया जा रहा। सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा तेजी से शुरू करनी होगी। शहर और गांव के हर जन स्वास्थ्य केंद्र पर लैब स्थापित हो, ताकि कोरोना के प्रारंभिक लक्षणों का पता चलते ही व्यक्ति अपना टेस्ट करा सके। नए-नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं। कुछ वैरिएंट्स ऐसे भी हैं, जिनकी पहचान आसान नहीं है। इसके लिए अपडेट लैब और प्रशिक्षित स्टाफ की जरुरत होगी।
2. स्वास्थ्य सुविधाओं को अपडेट करना जरूरी
चूंकि कोरोना की दूसरी लहर गांवों में भी कहर बरपाने लगी है, इसलिए स्वास्थ्य सुविधाओं को वहां तक पहुंचाना होगा। कम से कम पांच दस किलोमीटर के एरिया में कोई एक ऐसा अस्पताल या प्राइवेट सेंटर हो, जहां ऑक्सीजन का उत्पादन होता हो। इन जगहों पर आईसीयू बेड उपलब्ध कराए जाएं। शहरों में जो अस्पताल हैं, वहां पर आईसीयू या ऑक्सीजन बेड की संख्या को बढ़ाना होगा। संभावित है कि तीसरी लहर में बच्चे और बड़े, कोरोना संक्रमण से प्रभावित हो जाएं, इसलिए हर अस्पताल में बच्चों के डॉक्टरों की प्रशिक्षित टीम मौजूद रहे। गांव के लोग खुद कोरोना की रिपोर्ट करें, उन्हें इस तर्ज पर समझाना पड़ेगा। अगर मास्क लगाया, दो गज की दूरी रखी और हाथ साफ रखे तो तीसरी लहर से बच सकते हैं।
3. टीकाकरण को गति देनी होगी
दूसरी लहर खतरनाक दौर में पहुंच चुकी है। देश में तीन वैक्सीन आ गई हैं। तीसरी लहर या चौथी लहर, इससे बचने के लिए जरूरी है कि जितना जल्द हो सके, देश के सभी लोगों को वैक्सीन दे दी जाए। 18 साल से कम आयु के बच्चों के लिए भी जल्द से जल्द वैक्सीन तैयार की जाए। सरकार को टीकाकरण नीति बनानी पड़ेगी। देश में कोरोना संक्रमण की जो स्थिति है, उससे बचाव के लिए टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है। जितनी तेजी से हम लोगों को वैक्सीन देंगे, उतने ही प्रभावी तरीके से तीसरी और चौथी लहर की आशंकाओं को कमजोर किया जा सकेगा। जिन देशों ने अपनी जनसंख्या से दोगुना ज्यादा वैक्सीन स्टोर करके रख ली है, उन्हें आगे आकर भारत को वैक्सीन मुहैया करानी चाहिए।
4. मेडिकल स्टाफ थक न जाए
देश का मेडिकल स्टाफ डेढ़ साल से कोरोना से जंग लड़ रहा है। पहली और दूसरी लहर में अनेक डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी मारे गए हैं। डॉक्टरों के परिजन कोरोना संक्रमित हो गए, लेकिन वे अपनी ड्यूटी से नहीं हटे। सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि मेडिकल स्टाफ कहीं थक न जाए। मेडिकल विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक यह बात अच्छे से जानते हैं कि डॉक्टर, नर्स एवं दूसरा स्टाफ अपनी क्षमता से परे जाकर काम कर रहा है। अगर उन्हें कुछ आराम नहीं दिया गया तो वह ढांचा किसी भी वक्त टूट सकता है। केंद्र ने अब डिफेंस से डॉक्टर एवं मेडिकल कर्मियों को कोरोना की लड़ाई में उतारा है। जूनियर डॉक्टरों के अलावा मेडिकल के अंतिम वर्ष के छात्र और पेरामेडिकल स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जा रही है। चूंकि कोरोना का इलाज एक प्रोटोकाल के तहत होता है, इसलिए इन्हें बहुत जल्द प्रशिक्षित किया जा सकता है। डॉ. वली के अनुसार, कुछ अस्पतालों में इमरजेंसी बेड पर आईसीयू के विकल्प के तौर पर हाई फ्लो नेजल केनुला का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे 50 फीसदी लोगों का इलाज संभव है। इसके लिए ऐनेथिसिया विभाग के स्टाफ को ट्रेंड किया जा सकता है।
5. जानबूझकर जोखिम न लें
पिछले साल बहुत से लोग ऐसे थे, जो मास्क को एक औपचारिकता के तौर पर ले लेते थे। उनके लिए हैंड सैनिटाइजर और दो गज की दूरी का भी कोई ज्यादा मायना नहीं था। कोरोना की दूसरी लहर में भी ये सब देखने को मिल रहा है। मास्क और दो गज की दूरी को लेकर लगातार लापरवाही बरती जा रही है। देश को कोरोना की तीसरी और चौथी लहर के खतरनाक परिणाम नहीं देखने हैं तो कोविड व्यवहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। ऐसा न हो कि केस कम होते ही लोग दोबारा से पहले की तरह चलना शुरु कर दें। टीकाकरण के बाद भी लोगों को कोविड व्यवहार का पालन करना पड़ेगा। केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर एक नियमावली बनानी होगी। उसके आधार पर ही सार्वजनिक स्थलों पर आने जाने या ट्रांसपोर्ट के लिए नए नियम बनाए जाएं।