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सलाह: जांघ-पिंडली में ज्यादा सूजन-दर्द तो हो जाएं सावधान, 48 घंटे में हो सकती है मौत

Tue, 11 May 2021 06:32 PM IST
कुमार संभव अमित शर्मा, डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
अमित शर्मा, डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: कुमार संभव Updated Tue, 11 May 2021 06:32 PM IST
सार

डॉक्टर के मुताबिक, खून के इन थक्कों को जांघ से हृदय तक पहुंचने में एक से दो दिन का समय लग सकता है। हालांकि, मरीज के हिसाब से यह समय अलग हो सकता है।

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corona patients be careful swelling and pain in thigh and calf may die in 48 hours
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर आप इस समय कोरोना संक्रमित हैं या कोरोना से स्वस्थ हुए 15-20 दिन बीत चुके हैं और आपके एक पैर में असामान्य सूजन है। साथ ही, जांघ या पिंडलियों में अचानक ज्यादा दर्द महसूस हो रहा है तो आप सावधान हो जाइए। किसी डॉक्टर से तत्काल संपर्क करें। दरअसल, इस दर्द के पीछे खून में बन रहे थक्के जिम्मेदार हो सकते हैं। इनकी वजह से 24 से 48 घंटे में मरीज की मौत भी हो सकती है। इस तरह के मामलों में मृत्यु दर करीब 50 प्रतिशत है। यानी हर दूसरा मरीज अपनी जान गंवा रहा है, जबकि सही समय पर इलाज मिलने से जिंदगी बचाई जा सकती है।
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फ्लोरिडा में बरेल कॉलेज ऑफ़ मेडिसिन के डीन डॉ. अमित शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि दोनों पैरों में सूजन और हल्का दर्द होना सामान्य बीमारी है। यह शरीर का वजन ज्यादा और शारीरिक क्रियाएं कम होने के कारण हो सकता है। थोड़ा व्यायाम करके, शरीर के इन हिस्सों में मालिश करवाकर और कुछ दवाएं लेकर इसे ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कोरोना से जूझ रहे और ठीक हो चुके लोगों को खून के थक्कों को लेकर काफी सतर्क रहना चाहिए। 
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दरअसल, जांघ या पिंडली में दर्द होने पर खून के थक्के बन जाते हैं। ऐसे में उसके आगे रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है और दर्द का अनुभव होता है। हालांकि, इसके बाद भी थोड़ा रक्त प्रवाह जारी रहता है। अगर रक्त प्रवाह के साथ ये थक्के हृदय से निकलने वाली उन धमनियों तक पहुंच जाते हैं, जो फेफड़ों को रक्त पहुंचाती हैं तो इससे फेफड़ों तक पहुंचने वाले रक्त में बाधा पहुंच सकती है।
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डॉक्टर के मुताबिक, खून के इन थक्कों को जांघ से हृदय तक पहुंचने में एक से दो दिन का समय लग सकता है। हालांकि, मरीज के हिसाब से यह समय अलग हो सकता है। इनके कारण मरीज की अचानक मौत भी हो सकती है, जबकि सही समय पर खतरा पहचाने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। दरअसल, इसे हृदय रोग से जुड़ी एक बीमारी माना जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहते हैं।   


बढ़ रहे अचानक मौत के मामले
डॉ. अमित शर्मा के अनुसार, कोरोना काल में अचानक होने वाली मौतें बढ़ी हैं। कई ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें मरीज का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक होने के बावजूद तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों को कुछ भी पता चलने से पहले ही मरीज की जान चली गई। ऐसे मामलों में हार्ट फेल, हार्ट अटैक या डीवीटी क्लॉटिंग की समस्या हो सकती है। ऐसे मरीजों और उनके परिजनों को सुझाव है कि दर्द होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। अगर मरीज के साथ तत्काल अस्पताल जाना संभव न हो तो वीडियो कॉल के जरिए डॉक्टर को सभी लक्षण बताकर सलाह लें। ऐसा करके मरीज की जान बचाई जा सकती है।
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