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Corona: घबराएं नहीं, कोरोना अधिकांश मामलों में सामान्य फ्लू जैसा दिखा रहा असर; संक्रमण में उछाल पर विशेषज्ञ
Tue, 27 May 2025 05:24 AM IST
शिव शुक्ला
परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय
Published by: शिव शुक्ला
Updated Tue, 27 May 2025 05:24 AM IST
सार
हर साल जब भी मौसम में बदलाव होता है तो फ्लू और अन्य तरह के संक्रमण में उछाल आता है। लोग इसे वायरल ही समझने लगते हैं और कोरोना की जांच नहीं कराते। यही कारण है कि सरकारी आंकड़े भी हमें बढ़ते दिखाई नहीं देते। अब हांगकांग और सिंगापुर में उछाल आने की खबरों के बाद जब देश में राज्यों ने फिर अलर्ट जारी किया है तो जांच के परिणाम संख्या के रूप में हमारे सामने आ रहे हैं।
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कोविड टेस्ट
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
कोरोना संक्रमण के मामलों में उछाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस कभी गायब नहीं हुआ था। यह पहले की तरह हमारे आसपास मौजूद है। लगभग 80 फीसदी से ज्यादा आबादी का टीकाकरण होने के बाद आम जीवन वापस पटरी पर लौटा और हमने इसे भूलना शुरू कर दिया।
नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. निवेदिता गुप्ता बताती हैं कि कोरोना पहले की तरह अभी भी हमारे आसपास मौजूद है। टीकाकरण के बाद यह पहले जितना ताकतवर नहीं रहा। अधिकांश लोगों में सामान्य फ्लू जैसा असर दिखा रहा है। अगर आम भाषा में कहें तो यह सर्दी जुकाम जैसा बन कर रहा गया है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली (एम्स) के वरिष्ठ डॉ. अरविंद कुमार बताते हैं कि हर साल जब भी मौसम में बदलाव होता है तो फ्लू और अन्य तरह के संक्रमण में उछाल आता है। लोग इसे वायरल ही समझने लगते हैं और कोरोना की जांच नहीं कराते। यही कारण है कि सरकारी आंकड़े भी हमें बढ़ते दिखाई नहीं देते। अब हांगकांग और सिंगापुर में उछाल आने की खबरों के बाद जब देश में राज्यों ने फिर अलर्ट जारी किया है तो जांच के परिणाम संख्या के रूप में हमारे सामने आ रहे हैं। डॉ. निवेदिता ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। इसका बचाव और उपचार अभी भी पांच साल पुराना ही है। चेहरे पर मास्क लगाना, हाथों की सफाई रखना और भीड़ से दूरी कामयाब विकल्प रहे हैं। हालांकि गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोगों के लिए यह संक्रमण अभी भी जोखिम भरा है।
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पहले जैसी गलती अब न करें लोग
आईसीएमआर के पूर्व संक्रामक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने कहा है कि हमें अपनी गलतियों से सीख लेना चाहिए, न कि उन्हें फिर से दोहराया जाए। अभी जो खबरें आ रही हैं उन्हें देखकर लोग इसलिए घबरा रहे हैं क्योंकि उन्हें 2020 और 2021 का समय याद आ रहा है जबकि तब और अब के हालात में काफी बड़ा अंतर है। इसलिए पैनिक होकर दवाएं खरीदना, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लेना और खौफनाक हालात पैदा करने से बचना चाहिए। संक्रमण हमेशा से हमारे बीच है। हमें इसके साथ जीने की आदत डालनी है। समय समय पर संक्रमण के ऐसे उछाल आते रहेंगे।
50 लाख की आबादी पर एक मरीज
महामारी विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने कहा है कि कोरोना अब एक नया वायरस नहीं है। भारत की अधिकांश आबादी और लगभग हर आयु वर्ग इसके संपर्क में आ चुका है। आबादी के एक बड़े हिस्से ने टीकाकरण भी कराया है। अभी कोरोना के जिस जेएन.1 स्वरूप की बात हो रही है, वह भी नया नहीं है। हो सकता है कि अगले कुछ दिन में संक्रमण के मामले बढ़ें, लेकिन इससे लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। भारत में हर 50 लाख की आबादी पर एक कोरोना का मामला मिल रहा है। हालांकि, हमें हर समय सतर्क और सावधान रहना चाहिए।
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नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. निवेदिता गुप्ता बताती हैं कि कोरोना पहले की तरह अभी भी हमारे आसपास मौजूद है। टीकाकरण के बाद यह पहले जितना ताकतवर नहीं रहा। अधिकांश लोगों में सामान्य फ्लू जैसा असर दिखा रहा है। अगर आम भाषा में कहें तो यह सर्दी जुकाम जैसा बन कर रहा गया है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली (एम्स) के वरिष्ठ डॉ. अरविंद कुमार बताते हैं कि हर साल जब भी मौसम में बदलाव होता है तो फ्लू और अन्य तरह के संक्रमण में उछाल आता है। लोग इसे वायरल ही समझने लगते हैं और कोरोना की जांच नहीं कराते। यही कारण है कि सरकारी आंकड़े भी हमें बढ़ते दिखाई नहीं देते। अब हांगकांग और सिंगापुर में उछाल आने की खबरों के बाद जब देश में राज्यों ने फिर अलर्ट जारी किया है तो जांच के परिणाम संख्या के रूप में हमारे सामने आ रहे हैं। डॉ. निवेदिता ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। इसका बचाव और उपचार अभी भी पांच साल पुराना ही है। चेहरे पर मास्क लगाना, हाथों की सफाई रखना और भीड़ से दूरी कामयाब विकल्प रहे हैं। हालांकि गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोगों के लिए यह संक्रमण अभी भी जोखिम भरा है।
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पहले जैसी गलती अब न करें लोग
आईसीएमआर के पूर्व संक्रामक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने कहा है कि हमें अपनी गलतियों से सीख लेना चाहिए, न कि उन्हें फिर से दोहराया जाए। अभी जो खबरें आ रही हैं उन्हें देखकर लोग इसलिए घबरा रहे हैं क्योंकि उन्हें 2020 और 2021 का समय याद आ रहा है जबकि तब और अब के हालात में काफी बड़ा अंतर है। इसलिए पैनिक होकर दवाएं खरीदना, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लेना और खौफनाक हालात पैदा करने से बचना चाहिए। संक्रमण हमेशा से हमारे बीच है। हमें इसके साथ जीने की आदत डालनी है। समय समय पर संक्रमण के ऐसे उछाल आते रहेंगे।
50 लाख की आबादी पर एक मरीज
महामारी विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने कहा है कि कोरोना अब एक नया वायरस नहीं है। भारत की अधिकांश आबादी और लगभग हर आयु वर्ग इसके संपर्क में आ चुका है। आबादी के एक बड़े हिस्से ने टीकाकरण भी कराया है। अभी कोरोना के जिस जेएन.1 स्वरूप की बात हो रही है, वह भी नया नहीं है। हो सकता है कि अगले कुछ दिन में संक्रमण के मामले बढ़ें, लेकिन इससे लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। भारत में हर 50 लाख की आबादी पर एक कोरोना का मामला मिल रहा है। हालांकि, हमें हर समय सतर्क और सावधान रहना चाहिए।