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अब हिंदुस्तान में खड़ी हुई रोजगार की दिक्कत, कोरोना वायरस से एक चौथाई दुनिया घरों में कैद

Wed, 25 Mar 2020 10:15 PM IST
Anshul Talmale अंशुल तलमले
Updated Wed, 25 Mar 2020 10:15 PM IST
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सार
  • वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉकडाउन
  • देश में सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में, दुनिया में सबसे ज्यादा मौत इटली में
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Corona effect: How Many people are lockdown in world, Now Indian labourers are facing employment problem
लॉकडाउन के बाद हालात - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बाद दुनिया के कई देश लॉकडाउन हो चुके हैं। करोड़ों लोग अपने ही घरों में कैद हैं। 24 मार्च रात आठ बजे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समूचे हिंदुस्तान में लॉकडाउन की घोषणा कर दी। कई राज्यों की सीमाएं पहले ही सील की जा चुकी थी। युद्ध के दौरान भी बंद न की गई भारतीय रेल को रोक दिया गया है। इंटरनेशनल समेत सारी घरेलू उड़ानें थम गईं हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि दुनियाभर में कितने लोग अपने ही घरों में बंद हैं। क्षेत्रफल और जनसंख्या के लिहाज से बेहद बड़े देश भारत में तो कई लोग दूसरे राज्यों में फंस चुके हैं। वैसे तो सरकार ने रोजमर्रा की चीजों की उपलब्धता बरकरार रखी है। बावजूद इसके गरीब-मजदूर और रोज कमाने-खाने वालों के सामने रोजगार की दिक्कत आ गई है।



दुनियाभर में कितने लोग अपने ही घरों में कैद

AP की एक रिपोर्ट की माने तो दुनिया के 250 करोड़ से ज्यादा लोग लॉकडाउन हो चुके हैं। कोरोना वायरस भले ही चीन से फैला, लेकिन covid-19 से अब तक सबसे ज्यादा मौत इटली में ही हुई है। पूरा इटली 10 मार्च को ही लॉकडाउन हो गया था। मौत के मामले में चीन को पछाड़ चुके स्पेन में भी लोगों के घरों से निकलने में पाबंदी है। आयरलैंड, नॉर्वे, फ्रांस, न्यूजीलैंड, जॉर्डन बेल्जियम, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के लोग भी लॉकडाउन हैं। समूचा यूएस इस वक्त अपने घर पर है।

दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजगार की दिक्कत

कोरोना का प्रकोप और दिहाड़ी मजदूर
कोरोना का प्रकोप और दिहाड़ी मजदूर - फोटो : पीटीआई

21 दिन की संपूर्ण देशबंदी के बाद सबसे बड़ी समस्या दिहाड़ी मजदूरी के सामने आ खड़ी हुई है। कोरोना से लड़ने के साथ-साथ उन्हें अपनी खाली जेब से भी निपटना होगा। रोजी पर काम करने वालों को समझ नहीं आ रहा है कि घर कैसे चलेगा। अगले तीन हफ्ते दिहाड़ी मजदूरों को कोई काम नहीं मिलेगा। यानी उनके पास पैसे भी नहीं आएंगे। वहीं कुछ लोगों के पास आने वाले दिनों में खाना खत्म हो जाएगा। हालांकि सरकार ने अपनी ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन भी दिया है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, भारत का कम से कम 90 प्रतिशत कार्यबल अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है, जिसमें सिक्योरिटी गार्ड, क्लीनर्स, रिक्शा चालक, सड़क पर सामान बेचने वाले, कूड़ा उठाने वाले और घरेलू सहायक शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों की पेंशन, बीमार होने पर मिलने वाली छुट्टी, भुगतान वाला अवकाश और किसी तरह का बीमा नहीं मिलता है। बहुत से लोगों के पास बैंक खाते नहीं हैं। वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नकदी पर निर्भर हैं। बहुत से प्रवासी मजदूर हैं। वह विभिन्न राज्यों से काम की तलाश में किसी राज्य में जाते हैं।

भारत में संक्रमित मरीजों की संख्या हजार के करीब पहुंचने वाली है, वहीं मरने वालों की संख्या भी दहाई के आंकड़े तक पहुंच गई है। बहुत सी राज्य सरकारों जिसमें उत्तर प्रदेश, केरल और दिल्ली ने दिहाड़ी मजदूरों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करने का वादा किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी लॉकडाउन से प्रभावित होने वाले मजदूरों की मदद का वादा किया है।

थोड़ा लॉकडाउन भी समझ लेते हैं

घरों में बंद लोग
घरों में बंद लोग - फोटो : पीटीआई

लॉकडाउन एक आपातकाल व्यवस्था होती लोगों को अलग-थलग करने के लिए इसे लगाया जाता है। लॉकडाउन के समय लोगों को किसी इलाके या इमारत में रहने के निर्देश दिए जाते हैं और वहां से निकलने के लिए मना किया जाता है। आवश्यक चीजों के लिए ही बाहर निकलने की अनुमति होती है।

लॉकडाउन के दौरान आवश्यक सुविधाएं जारी रहती हैं, लेकिन यह भी प्रशासन पर निर्भर करता है कि वो किन सेवाएं को जारी रखना चाहता है। देखा जाए तो बैंक, बाजार, सब्जी की दुकानें, डेयरी वगैरह को खुला रखा जाता है। अगर किसी को दवा या खाने-पीने की चीजों की जरूरत है तो बाहर निकल सकता है। कर्फ्यू के दौरान इन सब पर पाबंदी होती है।

  • लॉकडाउन शब्द का इस्तेमाल पश्चिमी देश कई बार आपात स्थिति में ऐसा कर चुके हैं। 
  • भारत में लोगों को घरों में रखने के लिए कर्फ्यू या धारा 144 जैसे कानून का सहारा लेते रहे हैं। 
  • लॉकडाउन का इस्तेमाल भारत में पहली बार हो रहा है। इसका सीधा सा मतलब है कि जरूरी सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद। 
  • इस दौरान सिर्फ जरूरी या आपात स्थिति होने पर ही आपको घर से निकलने की अनुमति रहेगी।
  • इस दौरान सभी बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकानें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सब बंद रहेंगे। हालांकि, जरूरी सेवाएं बहाल रहेंगी।
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