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कोरोना का असरः जीडीपी में 7.7 फीसदी की गिरावट, 1952 के स्तर से नीचे रहने का अनुमान
Thu, 07 Jan 2021 10:43 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 07 Jan 2021 10:43 PM IST
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कोरोना वायरस का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना महामारी ने देश के जनजीवन के साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा आघात पहुंचाया है। चालू वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी दर बढ़ने की बजाए 7.7 फीसदी गिरेगी। यह अनुमान राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ ने अपनी रिपोर्ट में जताया है। इसके उलट पिछले वित्त वर्ष 201-20 में जीडीपी 4.2 फीसदी की दर से बढ़ी थी लेकिन कोरोना के कारण चालू वर्ष में यह फिसल कर 1952 के स्तर से नीचे पहुंच सकती है।
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चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही से ही कोरोना का भयावह असर दिखाई दिया था और जीडीपी घटकर माइनस 23.9 फीसदी रह गई थी। हालांकि दूसरी तिमाही में यह सुधरकर माइनस 7.5 फीसदी पर आ गई थी। लेकिन पूरे साल के एनएसओ के अनुमान को देखें तो इसमें 7.7 फीसदी गिरावट का अनुमान है। इससे पूर्व आरबीआई ने जीडीपी दर माइनस 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
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एनएसओ ने अपनी रिपोर्ट में कोरोना काल में राष्ट्रीय आय का पहला अनुमान जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में जीडीपी 134.50 लाख करोड़ रुपये की रहेगी, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में यह आंकड़ा 145.66 लाख करोड़ रुपये रहा था।
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भाजपा नेता व अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम स्वामी के अनुसार चालू वित्त वर्ष में जीडीपी दर 2 प्रतिशत से भी कम रह सकती है। जबकि 1952 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 2.6 फीसदी रही थी।
कृषि क्षेत्र को छोड़ सभी क्षेत्रों में गिरावट
एनएसओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी और लॉकडाउन के दौरान कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। ऐसे में चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 रहने का अनुमान है। जबकि उद्योग क्षेत्र में 10.3 और सेवा क्षेत्र में 9.8 फीसदी की गिरावट का अनुमान है। माइनिंग सेक्टर में 12.4 की गिरावट आएगी। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.4 और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 12.6 फीसदी की गिरावट आएगी।
विश्व बैंक को 9.6 फीसदी गिरावट का अनुमान
भारत सरकार की एजेंसी एनएसओ के अनुमान से पहले विश्व बैंक ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 में 9.6 फीसदी की गिरावट आएगी। अर्थव्यवस्था में आई गिरावट घरेलू खर्चों और निजी निवेश में भारी कमी को दर्शाती है।
इससे पहले इंडिया रेटिंग्स ने दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के बीच अर्थव्यवस्था में उम्मीद से बेहतर सुधार के कारण चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में गिरावट के अपने अनुमान को घटाकर 7.8 फीसदी कर दिया था। इससे पहले रेटिंग एजेंसी ने 11.8 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया था।
अर्थव्यवस्था में वी-आकार का सुधार आने का संकेत: वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बारे में ताजा अनुमान अर्थव्यवस्था में वी-आकार (बड़ी गिरावट के बाद तेजी से सुधार) के पुनरोद्धार का संकेत है। यह चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से आर्थिक गतिविधियों में लगातार आ रहे सुधार को दर्शाता है।
वित्त मंत्रालय ने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुमान पर यह प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि 2020-21 का अग्रिम अनुमान चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी से सुधार का संकेत देता है। यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में गिरावट अब 7.7 प्रतिशत ही रहने का अनुमान है।
बयान में यह भी कहा गया है कि तिमाही-दर-तिमाही सुधार अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद और लॉकडाउन के बाद वी-आकार के सुधार को दर्शाता है। मंत्रालय ने कहा कि हाल के महीनों में विभिन्न उच्च चक्रीय संकेतक आर्थिक गतिविधियों में व्यापक आधार पर सुधार का संकेत देते हैं। भारत में अन्य विकसित देशों की तुलना में महामारी की स्थिति अधिक नियंत्रण में है। इससे भी आर्थिक पुनरोद्धार को रफ्तार मिली है।