बिजनेस अपडेट्स: आरबीआई में नए कार्यकारी निदेशक बने सुमन राय, जॉर्ज कोवूर पार्ले बिस्किट के सीईओ नियुक्त
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश की बैंकिंग व्यवस्था और जमाकर्ताओं के हितों को सुरक्षित रखने के लिए आज से श्री सुमन राय को नया कार्यकारी निदेशक (ईडी) नियुक्त किया है। एक अनुभवी बैंकर के हाथों में महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंपने का केंद्रीय बैंक का यह निर्णय वित्तीय समावेशन और डिजिटल बैंकिंग के दौर में बेहद अहम है। श्री राय अपनी नई भूमिका में सीधे तौर पर देश के करोड़ों बैंक खातों की सुरक्षा और रिजर्व बैंक की आंतरिक संपत्तियों की निगरानी करेंगे।
पार्ले बिस्किट ने जॉर्ज कोवूर को सीईओ नियुक्त किया
पार्ले-जी, मोनाको, हाइड एंड सीक और मेलोडी बिस्किट बनाने वाली कंपनी पार्ले बिस्कुट ने मंगलवार को जॉर्ज कोवूर को 1 सितंबर, 2026 से अपना मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की घोषणा की।पारले ने एक बयान में कहा कि कोवूर के पास पेप्सिको में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है, उन्होंने उपभोक्ता व्यवसायों और बाजारों में काम किया है।
पारले बिस्किट के प्रबंध निदेशक अजय चौहान ने कहा, "हम कोवूर का स्वागत करते हैं और पारले की मजबूत नींव पर आगे बढ़ने, अपनी क्षमताओं को मजबूत करने और सतत विकास के लिए नए अवसर खोलने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं।" उन्होंने आगे कहा कि कंपनी को विकास के अगले चरण में उनके नेतृत्व और योगदान की उम्मीद है।
कौन हैं सुमन राय और आरबीआई के साथ कैसा रहा है उनका सफर?
सुमन राय एक कुशल केंद्रीय बैंकर हैं, जिन्होंने आरबीआई में तीन दशकों से भी अधिक का समय (30 से ज्यादा वर्ष) सेवा में बिताया है। इस नई पदोन्नति से पहले वे महाराष्ट्र क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक के रूप में कार्यरत थे [4, 5]। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने करेंसी मैनेजमेंट, वित्तीय समावेशन, भुगतान और निपटान प्रणालियों, उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण, तथा मानव संसाधन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं। वह आरबीआई के पश्चिमी क्षेत्र स्थानीय बोर्ड के सचिव के रूप में भी सेवा दे चुके हैं, जो स्थानीय मुद्दों पर केंद्रीय बोर्ड की सहायता करता है।
नए कार्यकारी निदेशक के रूप में वे किन विभागों की कमान संभालेंगे?
कार्यकारी निदेशक (ईडी) के रूप में पदभार संभालने के बाद श्री सुमन राय को मुख्य रूप से दो प्रमुख विभागों की कमान सौंपी गई है। इनमें पहला है 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (डीआईसीजीसी) और दूसरा है 'प्रिमाइसेस डिपार्टमेंट'। प्रिमाइसेस विभाग जहां देश भर में आरबीआई के बुनियादी ढांचे और कार्यालयों का प्रबंधन करता है, वहीं डीआईसीजीसी सीधे तौर पर ग्राहकों के पैसों के बीमा और वित्तीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। इन संवेदनशील विभागों के शीर्ष नेतृत्व के रूप में श्री राय की भूमिका अत्यंत रणनीतिक होने वाली है।
टाटा स्टील ने सर दोराबजी टाटा को 167वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि?
टाटा स्टील ने अपने पहले चेयरमैन सर दोराबजी टाटा की 167वीं जयंती पर जमशेदपुर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। कार्यक्रम के दौरान कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों और टाटा वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर देश के लिए किए गए उनके अतुलनीय कार्यों को याद किया। दोराबजी टाटा ने न केवल अपने पिता जमशेदजी नुसरवानजी टाटा के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हुए 1907 में देश के पहले स्टील प्लांट की स्थापना की, बल्कि भारत के खेल जगत को भी एक मजबूत पहचान दी।
उन्होंने साल 1920 के एंटवर्प ओलंपिक में भारतीय दल की भागीदारी के लिए व्यक्तिगत रूप से फंडिंग की थी और वे भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के शुरुआती सात वर्षों तक अध्यक्ष भी रहे। आज जब भारत साल 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, तो देश उनके द्वारा रोपे गए खेल संस्कृति के इस बीज को बड़े गर्व और सम्मान के साथ याद कर रहा है।
इंडिगो ने धर्मशाला-चंडीगढ़ के लिए फिर से शुरू की सीधी उड़ान सेवा
धर्मशाला और चंडीगढ़ के बीच सीधी हवाई कनेक्टिविटी मंगलवार को फिर से शुरू हो गई। इंडिगो ने कांगड़ा के गग्गल हवाई अड्डे से चंडीगढ़ के लिए एक नॉन-स्टॉप उड़ान का संचालन शुरू किया।आज सेवा पुनः शुरू होने के पहले दिन दोपहर लगभग 2:05 बजे उड़ान (6E 7722) गग्गल से रवाना हुई। पहाड़ी क्षेत्रों में खराब मौसम की स्थिति के कारण उड़ान सेवा पहले बंद कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने निम्मगड्डा प्रसाद को 200 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हैदराबाद स्थित उद्योगपति निम्मागड्डा प्रसाद और चार फर्मों को निर्देश दिया कि वे रस अल खैमाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (आरएकेआईए) के पक्ष में यूएई अदालत के लगभग 950 करोड़ रुपये के फैसले को लागू करने से संबंधित मामले में दो सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री में 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा जमा करें।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने हैदराबाद और रंगा रेड्डी की वाणिज्यिक अदालतों पर यह सवाल छोड़ दिया कि क्या प्रसाद के परिवार द्वारा नियंत्रित संस्थाएं एक एकीकृत संरचना का गठन करती हैं, जिसकी संपत्तियों तक आरएकेआईए के पक्ष में दिए गए फैसले को पूरा करने के लिए पहुंचा जा सकता है।
इसमें कहा गया है कि पक्षकार उन सभी तर्कों को उन मंचों के समक्ष उठाने के लिए स्वतंत्र हैं जो इस न्यायालय के इस निर्णय में व्यक्त किए गए विवादित आदेशों और टिप्पणियों से बाध्य नहीं हैं।
यह विवाद आंध्र प्रदेश में बंदरगाहों, औद्योगिक गलियारे और हवाई अड्डे के विकास के लिए 2008 में शुरू की गई संयुक्त उद्यम परियोजना, वानपिक परियोजना से संबंधित है। आरएकेआईए ने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए प्रसाद को आवंटित धनराशि का दुरुपयोग किया गया।