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चमकी अर्थव्यवस्था: अगस्त में ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंचा जीएसटी कलेक्शन, यूपीआई लेनदेन में बना नया रिकॉर्ड

Tue, 01 Sep 2026 01:33 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 01 Sep 2026 01:33 PM IST
सार

अगस्त 2026 में करीब 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा सकल जीएसटी संग्रह और यूपीआई ने 24.51 बिलियन लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड। पढ़ें इससे जुड़ी पूरी रिपोर्ट।

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Festival Season Spark: Gross GST Mop-Up Reaches ₹2 Lakh Crore in August; UPI Volume Hits All-Time High
जीएसटी कलेक्शन और यूपीआई ट्रांजेक्शन - फोटो : amarujala.com

विस्तार

त्योहारों के मौसम की शुरुआत और मजबूत घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था ने अगस्त 2026 में दृढ़ता दिखाई है। देश के आर्थिक स्वास्थ्य को दर्शाने वाले दो सबसे बड़े संकेतकों- जीएसटी संग्रह और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म यूपीआई लेनदेन- में इस महीने मजबूत उछाल दर्ज किया गया। जहां अगस्त में सकल जीएसटी संग्रह बढ़कर करीब दो लाख करोड़ रुपये की ऊंचाई पर पहुंच गया, वहीं यूपीआई के जरिए होने वाले डिजिटल भुगतानों ने वॉल्यूम (संख्या) के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। ये आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में घरेलू खपत और व्यापारिक गतिविधियां चरम पर हैं।

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जीएसटी कलेक्शन में अगस्त के महीने में क्या नया रिकॉर्ड बना है?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़कर लगभग दो लाख करोड़ रुपये (1,99,853 करोड़ रुपये) रहा। इस दौरान घरेलू लेनदेन से होने वाला जीएसटी राजस्व 9.3 प्रतिशत बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि आयात से होने वाला राजस्व 29 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 62,604 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस संग्रह में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) 38,413 करोड़ रुपये और राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 46,316 करोड़ रुपये रहा। रिफंड के तौर पर 31,795 करोड़ रुपये जारी किए गए, जो पिछले साल से 68 प्रतिशत अधिक है। रिफंड घटाने के बाद नेट जीएसटी संग्रह 8.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ 1.68 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। सर्वाधिक जीएसटी कलेक्शन का रिकॉर्ड अप्रैल 2026 का है। उस महीने इस मद में करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये का संग्रह किया गया था।

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यूपीआई लेनदेन ने अगस्त में कैसे रचा नया इतिहास?

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में यूपीआई लेनदेन संख्या (वॉल्यूम) के लिहाज से 24.51 बिलियन (2451 करोड़) के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। मूल्य (वैल्यू) के मामले में, अगस्त में कुल 29.82 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जो इसके मई और जुलाई 2026 के 29.9 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड के बेहद करीब है। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में, अगस्त में यूपीआई लेनदेन का मूल्य 20 प्रतिशत (24.85 लाख करोड़ रुपये से) और वॉल्यूम 22 प्रतिशत (19.63 अरब से) बढ़ा है।

रक्षाबंधन और त्योहारी सीजन का डिजिटल लेनदेन पर क्या असर दिखा?

अगस्त के महीने में डिजिटल लेनदेन में आई इस तेजी का मुख्य कारण रक्षाबंधन जैसे त्योहार रहे। त्योहारों के चलते रोजमर्रा के लेनदेन (पीटूपी) और छोटे उपहारों के लिए यूपीआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। पिछले एक दशक में यूपीआई ने देश का डिजिटल परिदृश्य बदल दिया है; वित्त वर्ष 2017 में इसका लेनदेन मूल्य मात्र 0.07 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में 4,000 गुना से अधिक बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

वैश्विक मंच पर यूपीआई की पहुंच कहां तक पहुंच चुकी है?

भारतीयों की पसंदीदा भुगतान प्रणाली यूपीआई अब दुनिया भर के 11 देशों में स्वीकार की जा रही है। उज्बेकिस्तान इस सूची में शामिल होने वाला नवीनतम देश बन गया है। उज्बेकिस्तान के अलावा सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस जैसे देशों में यूपीआई के जरिए वास्तविक समय में भुगतान किया जा सकता है।

अगस्त के ये शानदार आर्थिक आंकड़े इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि भारतीय बाजार में मांग बेहद मजबूत बनी हुई है। दो लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह और करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये का मासिक यूपीआई लेनदेन न केवल कर अनुपालन में सुधार को प्रदर्शित करता है बल्कि देश के हर वर्ग में डिजिटल क्रांति के गहरे प्रभाव को भी उजागर करता है। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए यह उम्मीद की जा सकती है कि अर्थव्यवस्था की यह तेज रफ्तार आने वाले महीनों में भी इसी तरह बनी रहेगी।

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