कोरोना : आर्थिक सुस्ती की ओर बढ़ा देश, वैश्विक वृद्धि दर एक से डेढ़ फीसदी रहने का अनुमान
देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत गहराने लगे हैं। कोरोना के असर से कारोबार चौतरफा प्रभावित हो रहा है। आवाजाही कम होने से एयरलाइंस, रेलवे भी प्रभावित हुआ है। कंपनियां कर्मचारियों को बिना वेतन 1 से 2 महीने की छुट्टी पर भेज चुकी हैं या वेतन में कटौती कर रही हें। शेयर बाजार लगभग 30 फीसदी गिर चुका है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के एक सप्ताह तक भारत आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पर्यटन उद्योग लगभग ठप हो चुका है। मॉल खाली पड़े हैं, सिनेमाघर बंद हैं।
पंजाब में सरकारी और निजी बसें चलाने पर रोक लगा दी गई है। निवेश बैंकर मॉर्गन स्टैनले का आकलन है कि 2020 में वैश्विक वृद्धि दर 0.9 फीसदी रहेगी। वहीं गोल्डमैन सैक ने वैश्विक वृद्धि दर 1.25 फीसदी तो रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर ने डेढ़ फीसदी का अनुमान जताया है। करोना से पूरी दुनिया में दिख रही सुस्ती का असर भारत पर भी पड़ सकता है?
2008 से कम असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार की सुस्ती 2008 के मुकाबले थोड़ा कम असर डालेगी, लेकिन 2001 की मंदी से ज्यादा मारक होगी। इसकी मुख्य वजह चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के कोरोना की गिरफ्त में आने से लॉकडाउन होना है।
न जाने उबरने में कितना वक्त लगे
कोरोना पर काबू पाने में समय लग सकता है। इसलिए पता नहीं सुस्ती का दौर कब तक चलेगा। बहुत नौकरियां जाएंगी। अर्थव्यवस्था बहाली में एक साल या ज्यादा समय लग सकता है। -वीके बंसल, अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल
रियल एस्टेट का हाल भी बेहाल
ऑटो सेक्टर में सुस्ती के बीच रियल एस्टेट की हालत खस्ता है। सीमेंट और स्टील जैसी भवन निर्माण की सामग्री, एफएमसीजी, व्हाइट गुड्स आदि सभी सुस्ती की मार पड़ी है।