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सावधान: कोरोना ने देश में 230 बार बदला स्वरूप, मिला डेल्टा का एक और वैरिएंट

Fri, 16 Jul 2021 05:37 AM IST
Amit Mandal परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 16 Jul 2021 05:37 AM IST
सार

  • वैज्ञानिकों ने सरकार को दी जानकारी, नए म्यूटेशन पर निगरानी हुई शुरू, जल्द मिलेगी जानकारी
  • आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक 43.80 करोड़ से अधिक सैंपल की जांच हो चुकी है

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Corona changed its form 230 times in the country, another variant of Delta detected
कोरोना डेल्टा प्लस वैरिएंट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कोरोना वायरस के जीनोम सीक्वेंसिंग को लेकर अहम जानकारियां सामने आई हैं। वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि अब तक देश में कोरोना वायरस के 230 स्वरूपों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से सभी म्यूटेशन इन्सानों के लिए हानिकारक नहीं है लेकिन कई गंभीर म्यूटेशन नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इन्हीं गंभीर वैरिएंट में से एक डेल्टा देश भर में फैला है। कुछ समय पहले तक डेल्टा के दो वैरिएंट सामने आए थे लेकिन अब एक और वैरिएंट भी मिला है जिसे एवाई 3 नाम दिया है।

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अमेरिका के बाद भारत दूसरा ऐसा देश है जहां डेल्टा के तीन-तीन म्यूटेशन मिल चुके हैं। जीनोम सीक्वेंसिंग की निगरानी रखने वाली  इंसाकोग  ने राज्यों को अलर्ट जारी करते हुए बताया कि एवाई 3 वैरिएंट के मामले अभी बेहद कम हैं लेकिन इस पर अध्ययन चल रहा है। वैज्ञानिकों का समूह इसकी निगरानी रख रहा है। फिलहाल इस वैरिएंट को लेकर बहुत अधिक जानकारी नहीं दी जा सकती है।
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वैज्ञानिकों ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट में तीसरा म्यूटेशन भी हो चुका है। यह म्यूटेशन ओआरएफ1ए: आई3731वी के रुप में हुआ है जिसमें एस:के417 सहायक भूमिका में मिला है। इसलिए इसे एवाई 3 नाम दिया है। फिलहाल इसे भी डेल्टा की तरह गंभीर श्रेणी में माना जा सकता है।
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आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक 43.80 करोड़ से अधिक सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 42869 सैंपल को ही वैज्ञानिक अब तक सीक्वेंस कर पाए हैं क्योंकि ज्यादातर राज्यों में जीनोम सीक्वेंसिंग की लैब तक नहीं है। इन 42869 सैंपल की सीक्वेंसिंग में वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस के 230 स्वरूप मिले हैं जिनमें सबसे ज्यादा डेल्टा वैरिएंट बीते मई, जून और अब जुलाई में मिल रहा है। इन 230 में से 14 वैरिएंट को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। जबकि आठ वैरिएंट को चिंता का विषय माना गया है। डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट को भारत सरकार ने गंभीर श्रेणी में रखा है। 

डेल्टा की तरह नहीं है डेल्टा प्लस
इंसाकोग ने बयान जारी किया है कि डेल्टा वैरिएंट से अब तक डेल्टा प्लस यानी एवाई 1 और एवाई 2 म्यूटेशन सामने आए हैं जिनके करीब 80 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इन दोनों ही म्यूटेशन पर अभी अध्ययन चल रहा है और शुरूआती परिणाम बता रहे हैं कि डेल्टा की तरह एवाई 1 और एवाई 2 तेजी से नहीं फैलता। इन दोनों ही म्यूटेशन का अभी एंटीबॉडी कम करने का संबंध भी पता नहीं चला है।

एवाई 3 हो सकता है अलग वैरिएंट
नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट में भी एक और म्यूटेशन हुआ है। इसकी पहचान फिलहाल गोपनीय रखी गई है क्योंकि बहुत अधिक साक्ष्य हमारे पास नहीं है। एवाई 3 बाकी दो डेल्टा प्लस और एवाई 2 वैरिएंट से अलग हो सकते हैं लेकिन अध्ययन पूरा होने तक इंतजार करना पड़ेगा।

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में नहीं बढ़ा डेल्टा प्लस
समिति ने बयान में कहा है कि डेल्टा एवाई.1 और एवाई.2 पिछले सप्ताह में मामले घट रहे हैं।  अमेरिका और ब्रिटेन में पहले सबसे अधिक यही वैरिएंट मिल रहे थे लेकिन अब वहां नए मामलों में कमी आई है। भारत में अब तक एक फीसदी से भी कम मामले मिले हैं। यह सभी मामले बीते जून माह में सामने आए थे। एवाई.1 और एवाई.2 म्यूटेशन डेल्टा की तुलना में अधिक आक्रामक नहीं मिले हैं। महाराष्ट्र में रत्नागिरी और जलगांव, मध्य प्रदेश में भोपाल और तमिलनाडु में चेन्नई में इनके मामले नहीं बढ़े हैं। 


डेल्टा प्लस अधिक संक्रामक नहीं
नई दिल्ली। कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस वैरिएंट, डेल्टा वैरिएंट से अधिक संक्रामक नहीं है। इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कॉन्सोर्टियम (इंसाकोग) के सरकारी पैनल ले बताया है कि डेल्टा के उपवंश एवाई.1 और एवाई.2 के मामले दुनियाभर में घट रहे हैं। जून के अंत तक तो अमेरिका और ब्रिटेन में इसके मामले शून्य हो गए थे जहां ये सबसे अधिक तेजी से फैल रहा था। भारत में जून में इसके जीनोम सीक्वेंसिंग के मामले एक फीसदी से कम हो गए थे। इस आधार पर ये कहा जा सकता है कि वायरस का ये रूप अधिक संक्रामक नहीं है। 

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