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NCEL: सहकारिता मंत्री अमित शाह बोले, इफको-अमूल की तरह एनसीईएल भी होगा सफल, निर्यात में मिलेगी मदद

Tue, 24 Oct 2023 06:19 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 24 Oct 2023 06:19 AM IST
सार

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कार्यक्रम में कहा, एनसीईएल से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। यह देश के विकास व ग्रामीण परिवर्तन में योगदान देगा। सहकारी क्षेत्र निर्यात क्षमता का दोहन कर सकता है क्योंकि वैश्विक स्तर पर भारत पर जोर बढ़ रहा है।

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Cooperative Minister Amit Shah says NCEL will get success like IFFCO Amul
गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : पीआरओ

विस्तार

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पूसा परिसर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कहा कि नवगठित राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लि. (एनसीईएल) सहकारी समितियों को उन फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहित करेगा जिनकी वैश्विक बाजार में ज्यादा मांग है। इससे जैविक उत्पादों के निर्यात में भी मदद मिलेगी। शाह ने कहा, मुझे विश्वास है कि इफको और अमूल की तरह एनसीईएल भी एक सफल उद्यम के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि सहकारी निर्यात निकाय में पहले से ही 1,500 सदस्य हैं और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तहसील स्तर पर कम से कम एक सहकारी निकाय इससे जुड़ा हो।

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केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कार्यक्रम में कहा, एनसीईएल से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। यह देश के विकास व ग्रामीण परिवर्तन में योगदान देगा। सहकारी क्षेत्र निर्यात क्षमता का दोहन कर सकता है क्योंकि वैश्विक स्तर पर भारत पर जोर बढ़ रहा है। मंत्री ने कहा कि सहकारी समितियों को निर्यात बाजार के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस मौके पर सहकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा, सहकारिता सचिव ज्ञानेश कुमार और एनसीईएल प्रमुख पंकज कुमार बंसल भी मौजूद थे।

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2,000 करोड़ की शेयर पूंजी
इस साल 25 जनवरी को बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम के तहत एनसीईएल का गठन किया गया था। इसकी अधिकृत शेयर पूंजी 2,000 करोड़ रुपये है। निर्यात में रुचि रखने वाली सहकारी समितियां इसकी सदस्य बनने की पात्र हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाकर भारतीय सहकारी क्षेत्र में घरेलू उपभोग के बाद बचे उत्पादों के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करना है। देश में लगभग 8 लाख सहकारी समितियां हैं जिनमें 29 करोड़ से अधिक सदस्य हैं।

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