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Space: राकेश शर्मा बोले- भावी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों के लिए प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सहयोग जरूरी
Fri, 26 May 2023 06:11 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 26 May 2023 06:11 AM IST
सार
भारत के पास अपने राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान दृष्टिकोण को वैश्विक अनुपात में बढ़ाने के लिए जरूरी अनुभव है, क्योंकि इसने अपने लोगों के सामाजिक-आर्थिक लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग करने का अनूठा कार्यक्रम चलाया है।
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अंतरिक्ष
- फोटो : Twitter @wonderofscience
विस्तार
भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) राकेश शर्मा ने कहा कि भावी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों में परस्पर प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सहयोग की जरूरत है, क्योंकि किसी देश के पास अकेले इतनी क्षमता, साधन और शक्ति नहीं कि चांद या मंगल पर बस्तियां बसा सके। यह तभी संभव होगा, जब राष्ट्रों के बजाय मानवता के विस्तार का विचार आगे रखा जाएगा।
शर्मा ने कहा, भारत के पास अपने राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान दृष्टिकोण को वैश्विक अनुपात में बढ़ाने के लिए जरूरी अनुभव है, क्योंकि इसने अपने लोगों के सामाजिक-आर्थिक लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग करने का अनूठा कार्यक्रम चलाया है। उन्होंने कहा, अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए लगभग हर देश की महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं। भारत कोई अपवाद नहीं, लेकिन जल्द ही सभी राष्ट्रों को यह एहसास हो जाएगा कि अपने निकटतम अंतरिक्ष पड़ोसी चंद्रमा पर मानवों की बस्ती बसाना और उसका दोहन किसी एक राष्ट्र के बूते की बात नहीं।
धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धा में और कमी आएगी
भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में फ्यूचर स्पेस एक्सप्लोरेशन विषय पर व्याख्यान देते हुए राकेश शर्मा ने कहा, लंबे समय से हम सहयोगी प्रयासों में वृद्धि देख रहे हैं और धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धा में और कमी आएगी। शर्मा ने कहा कि भारत के चंद्रयान और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अन्य यानों पर ले जाए जा रहे विदेशी पेलोड और अन्य देशों के साथ आंकड़ा साझा किए जाने से यह सहयोगात्मक प्रयास पहले ही स्पष्ट हो चुका है।
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शर्मा ने कहा, भारत के पास अपने राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान दृष्टिकोण को वैश्विक अनुपात में बढ़ाने के लिए जरूरी अनुभव है, क्योंकि इसने अपने लोगों के सामाजिक-आर्थिक लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग करने का अनूठा कार्यक्रम चलाया है। उन्होंने कहा, अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए लगभग हर देश की महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं। भारत कोई अपवाद नहीं, लेकिन जल्द ही सभी राष्ट्रों को यह एहसास हो जाएगा कि अपने निकटतम अंतरिक्ष पड़ोसी चंद्रमा पर मानवों की बस्ती बसाना और उसका दोहन किसी एक राष्ट्र के बूते की बात नहीं।
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धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धा में और कमी आएगी
भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में फ्यूचर स्पेस एक्सप्लोरेशन विषय पर व्याख्यान देते हुए राकेश शर्मा ने कहा, लंबे समय से हम सहयोगी प्रयासों में वृद्धि देख रहे हैं और धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धा में और कमी आएगी। शर्मा ने कहा कि भारत के चंद्रयान और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अन्य यानों पर ले जाए जा रहे विदेशी पेलोड और अन्य देशों के साथ आंकड़ा साझा किए जाने से यह सहयोगात्मक प्रयास पहले ही स्पष्ट हो चुका है।
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