'वोटों के लिए हिंदू धर्म का मजाक..': NCP नेता ने भगवान राम को बताया मांसाहारी तो भड़की BJP, पुलिस को दी शिकायत
आव्हाड के बयान पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि आव्हाड जो बोल रहे हैं वह पूरी तरह से गलत है। हमारे शास्त्रों में कहीं नहीं लिखा है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान मांसाहारी भोजन किया था।
विस्तार
कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र में भगवान राम के नाम पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शरद पवार वाली एनसीपी के नेता डॉ. जितेंद्र आव्हाड द्वारा भगवान राम को मांसाहारी बताए जाने पर गुस्सा भड़क गया है। भाजपा नेता राम कदम ने पुलिस में शिकायत दी है। वहीं, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने भी बयान की निंदा की है।
Mumbai | BJP leader Ram Kadam files a complaint to register FIR against NCP -Sharad Pawar faction leader Jitendra Awhad for his statement about Lord Ram being a "non-vegetarian" pic.twitter.com/Vv78bfVHUI
— ANI (@ANI) January 4, 2024विज्ञापन
घमंडी गठबंधन की मानसिकता साफ
कदम ने कहा, 'घमंडी गठबंधन की मानसिकता साफ है कि राम भक्तों की भावनाओं को आहत पहुंचाई जाए। वे वोट जुटाने के लिए हिंदू धर्म का मजाक नहीं उड़ा सकते। राम मंदिर का निर्माण घमंडी गठबंधन को रास नहीं आ रहा है। बार-बार हिंदू समाज का मजाक बनाओ और एक सांप्रदाय को खुश करो, यही उनकी ओछी राजनीति है।'
क्या जानते हैं आव्हाड?
आहाव्ड के संघ पर दिए गए बयान पर भाजपा नेता ने कहा कि वे जानते क्या हैं आरएसएस के बारे? उन्होंने आगे पूछा कि क्या वे कभी संघ की किसी शाखा में गए हैं? संघ की परिभाषा जानते हैं? संघ के जो स्वयंसेवक हैं, वो मां भारती के लिए जीते हैं। उन्हें क्या पता हैं संघ के बारे में?
कदम ने कहा कि क्या वे केवल अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए कुछ भी बोल देंगे। संघ को समझने के लिए आव्हाड को 100 जन्म लेने होंगे। इसके बाद संघ क्या होता है तब उन्हें समझ आ जाएगा।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
वहीं, जितेंद्र आव्हाड के विवादित बयान के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं में गुस्सा बढ़ गया है। कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध-प्रदर्शन किया।
#WATCH | Pune, Maharashtra: BJP workers stage protest against NCP-Sharad Pawar faction leader Jitendra Awhad's statement pic.twitter.com/pUn9gkZ6U4
— ANI (@ANI) January 4, 2024
वह केवल सुर्खियों में बने...
महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा, 'आज जब सारी दुनिया अयोध्या में भगवान श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर आनंद उत्सव मना रही है। तो ऐसे समय में यह बातें करना गलत है। निषेधार्थ है। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वह केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।'
ऐसे झूठे को हमारे भगवान राम...
आव्हाड के बयान पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है, 'एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड जो बोल रहे हैं वह पूरी तरह से गलत है। हमारे शास्त्रों में कहीं नहीं लिखा है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान मांसाहारी भोजन किया था। इसमें लिखा है कि वह फल खाते थे। ऐसे झूठे को हमारे भगवान राम का अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है। हमारे भगवान हमेशा शाकाहारी थे। वह हमारे भगवान राम का अपमान करने के लिए अपमानजनक शब्द बोल रहे हैं।'
एनसीपी नेता को जान से मार दूंगा: संत परमहंस आचार्य
अयोध्या के संत परमहंस आचार्य ने सख्त कार्रवाई नहीं करने पर जितेंद्र आव्हाड को जान से मारने की धमकी दी है। उन्होंने कहा, 'आव्हाड द्वारा दिया गया बयान अवमाननापूर्ण है और भगवान राम भक्तों की भावनाओं को आहत करता है। मैं महाराष्ट्र और केंद्र सरकार से आग्रह करूंगा कि वे भगवान राम के बारे में गलत बोलने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। अगर आव्हाड के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो मैं एनसीपी नेता को जान से मार दूंगा। मैं एक चेतावनी दे रहा हूं।'
#WATCH | Ayodhya, UP: On NCP Sharad Pawar faction leader Jitendra Awhad's statement, Ayodhya Seer Paramhans Acharya says, "The statement given by Jitendra Awhad is contemptuous and hurts the sentiment of Lord Ram devotees...I would urge Maharashtra and the central government to… pic.twitter.com/nfweYJGbBQ
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) January 4, 2024
यह है मामला
महाराष्ट्र के शिरडी में बुधवार को एक कार्यक्रम में आव्हाड ने कहा था कि भगवान राम शाकाहारी नहीं थे, वह मांसाहारी थे। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 14 साल तक जंगल में रहेगा वो शाकाहारी भोजन खोजने कहां जाएगा? उन्होंने जनता से सवाल करते हुए कहा कि क्या यह सही बात है या नहीं? उन्होंने आगे कहा था, 'कोई कुछ भी कहे, सच्चाई यह है कि हमें आजादी गांधी और नेहरू की वजह से ही मिली। यह तथ्य कि इतने बड़े स्वतंत्रता आंदोलन के नेता गांधी जी ओबीसी थे, उन्हें (आरएसएस को) स्वीकार्य नहीं है। गांधीजी की हत्या के पीछे का असली कारण जातिवाद था।'