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ओला-उबर जैसे मोबाइल ऐप टैक्सी एग्रीगेटरों पर लगेगी लगाम
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 06 May 2016 03:28 AM IST
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मोबाइल ऐप टैक्सी एग्रीगेटरों पर लगेगी लगाम
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मोबाइल ऐप के जरिये कामकाज करने वाली टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय स्तर पर प्रयास शुरू हो गया है। केंद्र सरकार इस समय देख रही है कि इन्हें किस तरह से मोटर वाहन कानून के दायरे में लाया जाए। इस पर शीघ्र ही फैसला हो जाने की संभावना है। ऐसा होने पर ओला-उबर जैसी टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियां इसके दायरे में आ जाएंगी।
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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ आधिकारिक सूत्र ने बताया कि मोबाइल ऐप के जरिये कारोबार करने वाली कंपनियां इस समय मोटर वाहन कानून के दायरे में नहीं हैं। दरअसल मोटर वाहन कानून जब बनाया गया, तब इस तरह की कोई सेवा उपलब्ध नहीं थी। इसलिए इनके लिए कोई प्रावधान किया ही नहीं गया है। अब जबकि इनका परिचालन देश में शुरू हो गया है तो धीरे-धीरे चीजें सामने आ रही हैं।
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उल्लेखनीय है कि पिछले महीने दिल्ली में ऑड इवन 2 के समय मोबाइल ऐप आधारित टैक्सियों द्वारा ज्यादा कीमत (सर्ज प्राइसिंग) वसूलने का मुद्दा उठा था और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इन कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि सर्ज प्राइसिंग के नाम पर मोबाइल ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
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अधिकारियों का कहना है कि मोटर वाहन कानून में परंपरागत टैक्सी स्टैंड या ट्रांसपोर्ट कंपनियों के अधीन चलने वाली टैक्सियों के नियमन के लिए तो पर्याप्त नियम-कानून हैं, लेकिन मोबाइल ऐप आधारित टैक्सी के लिए नहीं। इसलिए दिल्ली सरकार की तरफ से भी बार-बार ऐसा बयान आया कि ओला और उबर जैसी मोबाइल ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों के पास टैक्सी चलाने का कोई लाइसेंस नहीं है।
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि अभी तक दिल्ली सरकार ने भी इनके लिए कोई नीति नहीं बनाई है। वह भी केंद्र की तरफ देख रही है कि वहां से ही पहल हो। इस तरह की कंपनियां जब किसी राज्य सरकार के पास रजिस्टर्ड ही नहीं हैं तो सरकार इनके ऊपर कोई कार्रवाई कैसे कर सकती है। इसलिए अब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय में तैयारी शुरू हो गई है।
पिछले दिनों दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने भी कहा था कि ओला-उबर जैसी कंपनियों के पास टैक्सी एग्रीगेटर का लाइसेंस नहीं है। दिल्ली सरकार इसको ध्यान में रखकर नीति बना रही है, जिसकी जल्द घोषणा होगी। लेकिन तब भी उन्होंने कहा था कि किसी कंपनी ने निर्धारित किराए से ज्यादा किराया वसूलने की कोशिश की तो उस पर कार्रवाई होगी।