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Kerala: बर्खास्तगी का आदेश रद्द, अदालत ने कहा- नोटिस दिए बिना संविदा कर्मियों को नौकरी से नहीं हटाया जा सकता
Tue, 10 Jan 2023 09:56 PM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: गुलाम अहमद
Updated Tue, 10 Jan 2023 09:56 PM IST
सार
केरल हाईकोर्ट ने वायनाड जिले के मनंथवाडी में आयुष एनएचएम होमियो डिस्पेंसरी में अटेंडर और पार्ट-टाइम स्वीपर के रूप में काम करने वाले दो कर्मियों की सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया।
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kerala high court
- फोटो : ANI
विस्तार
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि 'असंतोषजनक प्रदर्शन' के कारण संविदा कर्मचारियों को पहले से नोटिस दिए बिना नौकरी से हटाया नहीं जा सकता है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कर्मचारी को नौकरी से निकालने से पहले इस बारे में नोटिस दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने वायनाड जिले के मनंथवाडी में आयुष एनएचएम होमियो डिस्पेंसरी में अटेंडर और पार्ट-टाइम स्वीपर के रूप में काम करने वाले दो कर्मियों की सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया।
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विभाग ने यह कहते हुए दोनों संविदा कर्मियों के अनुबंधों को खत्म कर दिया था कि उनका काम संतोषजनक नहीं था। इसके बाद दोनों संविदा कर्मियों ने हाईकोर्ट में उनके निष्कासन को चुनौती दी थी। याचिकार्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता संविदा कर्मचारी थे, नौकरी से हटाने के पहले वे इसके संबंध में नोटिस के हकदार थे। अदालत ने कहा कि कर्मचारी की सेवा तभी समाप्त की जा सकती है, जब उन्हें पता चले कि उनका काम स्तर के अनुरूप नहीं है।
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अदालत ने अपने दो दिसंबर, 2022 के आदेश में कहा है कि भले ही याचिकाकर्ताओं को एक उचित चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं किया गया था, लेकिन यह स्पष्ट है कि वे क्रमशः 2010 और 2016 से डिस्पेंसरी में काम कर रहे थे। इसलिए, राज्य सरकार का यह तर्क कि कर्मचारियों को असंतोषजनक प्रदर्शन के विशिष्ट आधार पर बिना किसी नोटिस के सेवा से हटाया जा सकता है, गलत था।
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जुलाई 2022 में जारी हुआ था बर्खास्तगी का आदेश
अदालत ने कहा, यहां तक कि अगर प्रतिवादियों का तर्क यह है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी याचिकाकर्ताओं को नियुक्त नहीं किया गया था, फिर भी उन्हें बिना किसी सूचना के असंतोषजनक प्रदर्शन के विशिष्ट आधार पर सेवा से बर्खास्त करना उचित नहीं है। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने केरल सरकार के शहरी मामलों के विभाग के जुलाई 2022 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दोनों याचिकाकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।
साथ ही हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को नगर पालिका में संविदा कर्मचारियों के रूप में सेवा जारी रखने की अनुमति दें। अदालत ने कहा कि हालांकि, यह नगर पालिका के खिलाफ उचित नोटिस जारी करने के बाद कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के रास्ते में नहीं खड़ा होगा।
नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म करने के दोषी को 66 साल कैद की सजा
वहीं, केरल के इडुक्की जिले की एक अदालत ने मंगलवार को एक व्यक्ति को अपनी नाबालिग भतीजी का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में कुल 66 साल कैद की सजा सुनाई। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश टीजी वर्गीज ने भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत अलग-अलग जेल की सजा सुनाई। सरकारी वकील शिजो मोन जोसेफ ने कहा कि दोषी को सिर्फ 20 साल कैद की सजा काटनी होगी, क्योंकि सजाएं एक साथ चलेंगी।
उन्होंने कहा कि अदालत ने दोषी पर 80,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के पुनर्वास के लिए 50,000 रुपये देने का निर्देश दिया। सरकारी वकील ने कहा कि दोषी व्यक्ति ने 2021 में अपनी 17 वर्षीय भतीजी के साथ बलात्कार किया। इससे पहले उनसे पीड़िता को शराब पिलाकर बेहोश कर दिया था।