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चिंताजनक: दूषित खाद्य पदार्थों से मां के दूध में मिला मानक से अधिक सीसा, बच्चों के मानसिक विकास के लिए खतरा

Fri, 13 Dec 2024 07:14 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 13 Dec 2024 07:14 AM IST
सार

हेल्थ रिस्क एसेसमेंट ऑफ द फीडिंग चिल्ड्रंस’ केमोस्फीयर पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, दरभंगा, मुंगेर और नालंदा जिलों की 17 से 40 वर्ष की आयु की 327 महिलाओं के जैविक नमूने एकत्र किए थे।

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Contaminated food items lead in mother's milk more than the standard, risk to mothers as well as children
कैंसर संस्थान को केंद्र की सैद्धांतिक मंजूरी - फोटो : संवाद

विस्तार

बिहार के 6 जिलों में महिलाओं के दूध में सीसे की उच्च मात्रा पाई गई है। महिलाओं  के दूध के माध्यम से सीसे की विषाक्तता बच्चों के मानसिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा है और इससे अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं। यह खुलासा पटना के महावीर कैंसर संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के बाद किया गया है।
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संस्थान के 12 वैज्ञानिकों का शोध
हाई लेड कंटेमिनेशन इन मदर्स ब्रेस्टमिल्क इन बिहार : हेल्थ रिस्क एसेसमेंट ऑफ द फीडिंग चिल्ड्रंस’ केमोस्फीयर पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, दरभंगा, मुंगेर और नालंदा जिलों की 17 से 40 वर्ष की आयु की 327 महिलाओं के जैविक नमूने एकत्र किए थे।
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इसके साथ सीसे के स्तर का आकलन करने के लिए हैंडपंप का पानी, गेहूं, चावल और आलू सहित खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए थे। जांच के दौरान इनमें से 87% माताओं के रक्त में सीसा मिला, जिसका अधिकतम मान 677.2 माइक्रोग्राम प्रति लीटर था। विश्व स्वास्थ्य संगठन  के अनुसार 3.5 माइक्रोग्राम प्रति लीटर जितनी सांद्रता भी बच्चों की बुद्धि, व्यवहार और सीखने की क्षमताओं को प्रभावित कर सकती है।
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माताओं के साथ बच्चों को भी कैंसर का खतरा
अध्ययन से पता चलता है कि 92 फीसदी नमूनों में स्तन के दूध में सीसे का उच्च स्तर पाया गया। इसका उच्चतम मान 1,309 माइक्रोग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया है। यह माताओं के साथ बच्चों में भी कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।

भोजन-सब्जियों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है सीसा
अध्ययन के अनुसार मिट्टी में सीसा संदूषण भोजन के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है। इसमें सब्जियां और अनाज इसके प्राथमिक वाहक होते हैं जो अंततः  माता के दूध में इसकी उपस्थिति का कारण बनते हैं। संदूषण का मतलब है किसी चीज को जहरीला बनाना या उसमें अवांछित या खतरनाक पदार्थों का मिलना। यह खाद्य संदूषण भौतिक, जैविक और रासायनिक स्तर का है।  

भारत में करीब 27 करोड़ 55 लाख बच्चे सीसे से प्रभावित...संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और अमेरिका स्थित पर्यावरण स्वास्थ्य संस्था प्योर अर्थ की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 27 करोड़ 55 लाख बच्चों के रक्त में सीसे का स्तर मानक से अधिक है। सीसा विषाक्तता ने मानव आबादी में गंभीर स्वास्थ्य खतरे पैदा कर दिए हैं।

यह अनुमान लगाया गया है कि दुनियाभर में लगभग 815 मिलियन लोग सीसा विषाक्तता के संपर्क में हैं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय बच्चों के रक्त में सीसे के स्तर के मेटा विश्लेषण से पता चला है कि सीसे के संपर्क में आने से उनमें से प्रत्येक  चार में से एक में आईक्यू(बुद्धि लब्धि) की कमी आ सकती है


सीसे के संपर्क में आने वाले बड़े बच्चों में किडनी की क्षति और हृदय संबंधी बीमारियां भी आम हैं। यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर का कहना है कि शुरुआती लक्षणों के अभाव में सीसा चुपचाप बच्चों के स्वास्थ्य और विकास पर कहर बरपाता है जिसके परिणाम घातक होते हैं। मध्यम और निम्न आय वाले देश सीसे के संपर्क की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
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