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'चहेते' बन रहे सलाहकार: बगैर विजिलेंस मंजूरी के केंद्र में जॉब, ऐतराज के बाद अब खुलेंगी फाइलें 

Fri, 04 Jun 2021 10:13 PM IST
सुरेंद्र जोशी जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली  Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 04 Jun 2021 10:13 PM IST
सार

केंद्र के विभिन्न विभागों व मंत्रालयों में 'सलाहकार' के नाम पर जॉब देने की मुहिम जारी है। नई नियुक्तियां करने की बजाए रिटायर्ड लोगों को अनुबंध के आधार पर बतौर सलाहकार तैनात किया जा रहा है। 
 

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Consultants jobs in the center without vigilance approval, now files will open after CVC objection
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विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्रालय, कृषि, वित्त, ट्रांसपोर्ट व कानून मंत्रालय सहित दर्जनों अन्य मंत्रालयों में कोरोनाकाल के दौरान बड़ी संख्या में 'सलाहकार' लगाए गए हैं। कर्मचारी-अधिकारी के रिटायरमेंट के बाद संबंधित विभाग में नई नियुक्ति नहीं की जा रही। रिटायर्ड लोगों को अनुबंध आधार पर वहां लगा दिया जाता है। ये नियुक्तियां सरकारी विभाग में हुई हैं, इसलिए इनकी विजिलेंस क्लीयरेंस लेना बहुत जरूरी है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। 

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केंद्र सरकार ने 'सलाहकारों' की नियुक्ति में विजिलेंस क्लीयरेंस लेना उचित नहीं समझा। कई विभाग तो ऐसे हैं, जहां पहले दिन शाम पांच बजे कोई अधिकारी रिटायर होता है और अगले दिन सुबह नौ बजे वह सलाहकार के पद पर ज्वाइन कर लेता है। केंद्रीय सतर्कता आयोग सीवीसी ने अब ऐसी तमाम नियुक्तियों के लिए विजिलेंस क्लीयरेंस अनिवार्य कर दिया है। साथ ही महत्वपूर्ण पदों पर जिन लोगों की नियुक्तियां हुई हैं, उनकी फाइलें भी खुलेंगी। विभाग की गोपनीयता बनाए रखी जाएगी।
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नियुक्तियों में नहीं है एकरूपता
सीवीसी के मुताबिक, यह देखने में आया है कि अनेक मंत्रालयों में रिटायर हुए लोगों को धड़ल्ले से पुनर्नियुक्ति प्रदान की गई है। उन्हें अनुबंध के जरिए सलाहकार के पद पर नियुक्त किया जा रहा है। नियुक्ति पत्र देने की इतनी जल्दी रहती है कि उससे पहले विभिन्न मंत्रालयों और विभागों ने विजिलेंस क्लीयरेंस लेना ही जरूरी नहीं समझा। कई नियुक्तियां ऐसी भी हुई हैं, जहां बहुत ही संवेदनशील दस्तावेजों का आदान प्रदान होता है। 
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सीवीसी ने यह भी देखा है कि सभी मंत्रालयों और विभागों में सलाहकार की नियुक्तियों के लिए जो मापदंड तय किए गए हैं, उनमें एकरूपता या समानता नहीं है। किसी विभाग में विज्ञापन जारी नहीं हुआ तो कहीं पर 10 दिन के भीतर आवेदन मांग लिए गए। किसी मंत्रालय ने आवेदन के लिए 21 दिन का समय दे दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पीएस के पद से रिटायर हुई एक महिला को रिटायरमेंट से अगले ही दिन सलाहकार के पद पर ज्वाइन करा दिया गया। 

पूर्व सेवा के दौरान किसी मामले में आरोपी रहे हों

कुछ मंत्रालयों में ऐसी आशंका जताई गई है कि जिन लोगों को सलाहकार लगाया गया है, वे अपनी पूर्व सेवा के दौरान किसी मामले में आरोपी रहे हो सकते हैं। किसी के खिलाफ विजिलेंस जांच पेंडिंग हो सकती है। सलाहकार की नियुक्ति में उन्हें पूर्व में दंडित किए जाने की बात छिपा ली गई हो। ऐसी तमाम आशंकाएं जताई गई है। 

नियुक्ति प्रक्रिया ठीक नहीं : सीवीसी
सीवीसी ने तीन मई को जारी अपने आदेशों में कहा है कि नियुक्ति की यह प्रक्रिया तो ठीक नहीं है। इस पर तो सवाल उठेंगे। नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद का आरोप लगेगा। सरकारी कार्यप्रणाली और संगठन के मूल सिद्धांतों में लोगों का विश्वास कम होता जाएगा। इन सबके चलते सीवीसी द्वारा अब केंद्र सरकार में रिटायर हुए लोगों को दोबारा से अनुबंध आधार पर जॉब देने के लिए मापदंड तय कर दिए गए हैं। 

पिछली सेवा का 10 साल का सेवा रिकॉर्ड देखेंगे
सीवीसी ने कहा, अखिल भारतीय सेवा समूह 'ए' व दूसरी नियुक्तियों के दौरान विजिलेंस क्लीयरेंस ली जाएगी। जिस अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद सलाहकार के पद पर नियुक्त किया जा रहा है, उसका पिछली सेवा का 10 साल का सेवा रिकॉर्ड जांचा जाएगा। जिस विभाग से वह अधिकारी रिटायर हुआ है, वहां से लिखित में विजिलेंस क्लीयरेंस लेनी होगी। 

यदि उस अधिकारी ने दस साल के दौरान एक से ज्यादा संगठनों में काम किया है तो सभी का रिकॉर्ड जांचना होगा। बाकायदा सीवीसी को यह बताया जाएगा कि फलां विभाग ने विजिलेंस क्लीयरेंस में यह बात कही है। यानी वह रिपोर्ट सीवीसी के पास भेजनी होगी। नियुक्ति पत्र देने से पहले विजिलेंस क्लीयरेंस मिलना बहुत जरुरी है। अगर कोई विभाग 15 दिन में अपनी रिपोर्ट नहीं देता है तो उसे 21 दिन बाद रिमाइंडर दे दें। उसके बाद भी कोई जवाब नहीं आता तो डीम्ड विजिलेंस क्लीयरेंस दी जा सकती है। 

अगर बाद में यह पता चलता है कि वह अधिकारी तो विजिलेंस जांच में फंसा है, उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं तो उस स्थिति में कार्रवाई के लिए वह विभाग जिम्मेदार होगा, जिसने सलाहकार का नियुक्ति पत्र दिया है। 

सभी को बराबर का मौका मिले, विज्ञापन दें

सीवीसी ने अपने आदेशों में कहा है कि संबंधित केंद्रीय मंत्रालय या विभाग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह सभी को बराबरी का मौका दे। सलाहकार के जिस पद पर नियुक्ति होनी है, उसका नियमानुसार विज्ञापन दिया जाए। ऐसा न हो कि विज्ञापन कुछ ऐसा हो कि वह सभी लोगों तक न पहुंच सके। 

इस मामले में सभी मंत्रालय एक जैसी नीति का पालन करेंगे। इससे चहेतों को नौकरी देने का आरोप भी नहीं लगेगा। एक पद के लिए ज्यादा से ज्यादा योग्य उम्मीदवार सामने आ सकेंगे। कई प्राइवेट संगठन जो सरकारी अधिकारी को रिटायरमेंट के फौरन बाद फुल टाइम या अनुबंध पर जॉब दे देते हैं, उन्हें कूलिंग ऑफ पीरियड का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में मामले में अगर तय नियमों का उल्लंघन होता है तो वह गंभीर कसूर की श्रेणी में आता है। जो विभाग या प्राइवेट संगठन नौकरी दे रहा है, उसे इन बातों पर गौर करना होगा। 

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