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दोबारा आईसीजे में जा सकता है जाधव केस, राजनयिक पहुंच देने पर पाक मौन

Sun, 04 Aug 2019 11:03 AM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Sun, 04 Aug 2019 11:03 AM IST
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Consular access to Kulbhushan Jadhav should be remedial and private said India to Pakistan
कुलभूषण जाधव - फोटो : File Photo

कुलभूषण जाधव मामले में भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि राजनयिक पहुंच पूरी तरह गोपनीय और निजी होनी चाहिए। जबकि पाकिस्तान कैमरे की निगरानी में राजनयिक पहुंच देना चाहता था, जिसके लिए भारत तैयार नहीं है। 

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बता दें कि पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को उनके कथित 'कबूलनामे' के आधार पर दोषी ठहराया था और फांसी की सजा सुनाई है। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि इसी कारण राजनयिक पहुंच पूरी तरह गोपनीय और निजी होनी चाहिए। इस दौरान कोई भी पाक अधिकारी या रिकॉर्डिंग उपकरण वहां नहीं होना चाहिए। 
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इस मामले पर भारत का कहना है कि पाकिस्तान के लिए इस परिस्थिति को देखते हुए ये जरूरी है कि वो धमकी और डर के वातावरण से अलग निजी राजनयिक पहुंच प्रदान करे। अगर ऐसा नहीं होता तो ये इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिट (आईसीजे) के फैसले का पूरी तरह लागू नहीं करना माना जाएगा।  
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ऐसे में अगर पाकिस्तान भारत की बात नहीं मानता तो एक बार फिर दोनों देशों के बीच कानूनी जंग शुरू हो सकती है। भारत अगर इस मामले को लेकर दोबारा आईसीजे में जाता है तो बहस का मुख्य बिंदु यही होगा। जबकि पाकिस्तान दलील दे सकता है कि वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग भारत सहित दुनियाभर के जेल मैन्युअलों के अनुरूप है। वहीं भारत का कहना है कि जेल मैन्युअल सिर्फ सामान्य काउंसलर मामलों में मान्य हैं।

भारत की चिंता इस बात को लेकर भी है कि पाकिस्तान आईसीजे के फैसले के बाद भी कई बार जाधव की सुरक्षा का मुद्दा उठाता रहा है। वह इस आधार पर भी राजनायिक पहुंच देने से इनकार कर चुका है। जबकि भारत पाकिस्तान को ये बात कह चुका है कि उसकी ये दलील आईसीजे पहले ही नकार चुका है। 


राजनयिक पहुंच देने के मामले में भारत का कहना है कि इससे आरोपी को उसके बचाव का अधिकार मिलता है। आईसीजे ने पाकिस्तान को वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36 का दोषी पाया है। पाकिस्तान द्वारा जाधव को निजी राजनयिक पहुंच देने में आनाकानी करने से अब उन सबूतों पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिनके तहत जाधव को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई थी।

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