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पाकिस्तानी एजेंट के जरिए सात लोगों को अमेरिका ले जाने की साजिश का भंडाफोड़
Sun, 23 Feb 2020 10:22 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई
अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sun, 23 Feb 2020 10:22 PM IST
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सीबीआई (फाइल फोटो)
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पाकिस्तानी आतंकवाद का झूठा बहाना गढ़कर सात लोगों की अमेरिका ले जाने की मानव तस्करी के एक रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। केंद्रीय जांच एजेंसियों और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के साझा अभियान में यह रैकेट उजागर हुआ है। इस रैकेट का सरगना पाकिस्तानी मूल का है और वह सातों को अमेरिका ले जाने की कोशिश में लगा हुआ था।
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पुलिस उपायुक्त दत्ता नलवाडे़ ने बताया कि मानखुर्द पुलिस को 20 फरवरी को एक ई-मेल से सूचना मिली कि एक पाकिस्तानी महिला समेत सात लोगों को मुंबई से दुबई होते हुए पाकिस्तान ले जाया जाना है। मेल भेजने वाले ने खुद को रमीश मखान बताया था और कहा था कि सात लोगों का यह समूह पाकिस्तान जाकर आतंक की ट्रेनिंग लेगा और फिर यह भारत लौट आएगा। नलवाडे़ ने बताया कि जब इस बात की जांच की गई तो पता चला कि ये सातों पाकिस्तान नहीं जा रहे थे, बल्कि इन्हें कनाडा के रास्ते अमेरिका भेजा जाना था।
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22 लाख में ले जाने का हुआ था ठेका
नलवाडे़ ने यह जानकारी दी कि पुलिस जांच में ई-मेल भेजने वाले का नाम रमीश मखान नहीं, बल्कि रिजवान सैयद था। पाकिस्तानी मूल का रिजवान अमेरिका में रह रहा है। हमें यह भी पता चला कि इन सातों के परिवार अमेरिका में रह रहे हैं और इन्हें अमेरिका ले जाने के लिए करीब 22 लाख रुपये वसूले गए थे। सातों की उम्र 28-35 साल के बीच है। इन्हें दो बैच में लेकर जाना था और पहला बैच रविवार को रवाना होना था।
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आखिर क्या था ई-मेल भेजने का मकसद
फिलहाल, मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। एजेंसियां आतंकी लिंक की भी जांच कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह पता नहीं चल पाया है कि क्या रिजवान ने मानखुर्द पुलिस थाने को यह ई-मेल जांच एजेंसियों का ध्यान भटकाने के लिए किया था या फिर वह सातों को गिरफ्तारी सुनिश्चित कराना चाहता था, ताकि वह अपने रिश्तेदारों द्वारा दिए गए पैसों की मदद से बचकर वापस जा सके।