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Congress: क्या उदयपुर चिंतन शिविर का मंत्र काम आएगा, अगले महीने तक खरगे बदल देंगे कांग्रेस का पूरा हुलिया?

Wed, 26 Oct 2022 04:39 PM IST
Amit Mandal आशीष तिवारी, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।
आशीष तिवारी, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Wed, 26 Oct 2022 04:39 PM IST
सार

कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पदभार ग्रहण करने के साथ पूरे देश में कांग्रेस के मेकओवर के लिए नया प्लान तैयार कर लिया गया है।

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Congress: will the entire character of Congress change by next month?
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे - फोटो : amar ujala

विस्तार

कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर पदभार ग्रहण कर लिया। इसी के साथ कांग्रेस के मेकओवर की पूरी तैयारियां शुरू कर दी गई। खरगे के निर्देश के बाद पूरे देश में कांग्रेस में 50 साल से कम उम्र के 50 फीसदी नेताओं को जगह देने की कवायद शुरू कर दी गई। इसके अलावा लंबे समय से एक ही पद पर बने नेताओं की छुट्टी की तैयारियां शुरू कर दी गई है। कांग्रेस के उदयपुर में हुए चिंतन शिविर के बाद छह महीने के भीतर कई बड़े फैसले लिए जाने थे जिनकी समय सीमा अगले महीने समाप्त हो रही है। इसलिए जो फैसले लिए जाने हैं उनको सूचीबद्ध करके जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के दिशा निर्देश दे दिए गए हैं। ऐसे में कांग्रेस से लेकर दूसरे राजनीतिक दलों में भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं क्या हकीकत में उदयपुर चिंतन शिविर के 6 महीने बाद और नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के ज्वाइन करते होंकांग्रेस का पूरा हुलिया बदल पाएगा या नहीं।

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पूरे देश में कांग्रेस के मेकओवर के लिए नया प्लान
कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पदभार ग्रहण करने के साथ पूरे देश में कांग्रेस के मेकओवर के लिए नया प्लान तैयार कर लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, उदयपुर चिंतन शिविर में जिन बिंदुओं के आधार पर पार्टी का पूरा हुलिया बदलने की कवायद की गई थी उनमें से बहुत कुछ हो गया है, जबकि बहुत कुछ होना बाकी है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण काम पार्टी में 50 साल से कम उम्र के नेताओं को जिम्मेदारी देने का है क्योंकि उदयपुर चिंतन शिविर में इसको तय किया गया था। इसलिए समय सीमा के भीतर रहते हुए इसको पीओरी तरह से अमल में लाना भी है। 
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हालांकि, पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है यह बड़ी चुनौती है, लेकिन पार्टी के भविष्य को देखते हुए अगले कुछ दिनों के भीतर 50 फीसदी लोगों को यह जिम्मेदारियां दे दी जाएंगी। इसके लिए बाकायदा नए राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे की ओर से भी राज्य इकाईयों को भी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उदयपुर चिंतन शिविर में तय किया गया था कि कांग्रेस कार्यसमिति समेत राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश, जिला, ब्लॉक व मंडल स्तर पर पदाधिकारियों में पचास फीसदी पदाधिकारियों की उम्र 50 साल से कम होनी चाहिए।
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पांच साल से अधिक समय से जमे नेताओं को हटाया जाएगा 
इसके अलावा कांग्रेस पार्टी में जो लोग एक पद पर पांच साल से ज्यादा वक्त से बने हुए हैं, उन सब को भी हटाया जाना है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चूंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ था, इसलिए प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर जिला कार्यकारिणी ब्लॉक और नगर कार्यकारिणी का बड़ा फेरबदल नहीं हो पा रहा था। हालांकि, पार्टी में संवैधानिक रूप से ऐसा कोई संकट नहीं था कि पांच साल से अधिक समय तक एक पद पर बने रहने वालों को हटाया ना जा सके। राजनीतिक सरगर्मियां के चलते इस तरीके के बड़े फैसले व्यापक रूप से नहीं हो पा रहे थे। अब जल्द ही इस पर अमल होना शुरू हो जाएगा और नए लोगों को नई जिम्मेदारियां दी जाने लगेंगी।

पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब बहुत जल्द ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी से लेकर प्रदेश कार्यकारिणी और जिला कार्यकारिणी में निष्क्रिय नेताओं की भी छुट्टी शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, उक्त नेता का कहना है कि बहुत सारे निष्क्रिय नेता पहले ही किनारे हो चुके हैं, लेकिन जो बचे हैं उनको भी हटाया जाएगा। इसके लिए बकायदा उदयपुर चिंतन शिविर में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की अगुवाई वाली कमेटी में राष्ट्रीय स्तर प्रदेश स्तर जिला स्तर के पदाधिकारियों के काम का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी भी तय हुई थी। ताकि मूल्यांकन के आधार पर पदाधिकारियों की छटनी की जा सके। 

खेमेबाजी बंद करना बहुत जरूरी 
हालांकि, पार्टी से जुड़े कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस दिशा में पार्टी को अभी बहुत कुछ काम करना बाकी है। उक्त नेता का कहना है कि जब तक पार्टी के भीतर खेमेबाजी बंद नहीं होगी तब तक इस तरीके का फैसला ले पाना बड़ा मुश्किल होगा। उनका कहना है कि यही खेमेबाजी वाली परिपाटी पार्टी को दीमक की तरह खा रही है और खोखला भी कर रही है।


मई में हुए उदयपुर चिंतन शिविर में 30 दिन से 180 दिनों के भीतर यानी एक महीने से छह महीने के भीतर इन सभी बदलावों को करने के लिए कहां गया था। हालांकि, बहुत सारे फैसले और बहुत सारे बदलाव इस समय में नहीं हो पाए हैं। इसीलिए कांग्रेस पार्टी को अपने 6 महीने के भीतर तय समय सीमा के दौरान यह सब कुछ करना भी है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है समय सीमा का मतलब सिर्फ यही था कि वक्त रहते सब कुछ हो जाए ताकि आने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों में पार्टी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतर सके।

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