एनएसए को लेकर कांग्रेस ने स्पष्ट किया अपना रुख, सत्ता मिली तो नहीं रहेगा 'सुपर बॉस'
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एनडीए-भाजपा सरकार में सबसे बड़े नौकरशाह, फैंटम और सुपर बॉस जैसे शब्दों से सुशोभित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और उसकी भूमिका को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को जारी अपने घोषणा पत्र में कह दिया है कि उनकी सरकार में एनएसए सुपर बॉस नहीं होगा। एनएसए के पर कतरे जाएंगे। मोदी सरकार के एनएसए अजीत डोभाल, जिनके बारे में तमाम विपक्षी दल यह कहते रहे हैं कि उन्हें असीमित शक्तियां दी गई हैं, कांग्रेस पार्टी ऐसा नहीं करेगी।
बता दें कि पिछले साल एनएसए अजीत डोभाल काफी चर्चित रहे हैं। यहां तक कि कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील में डोभाल पर यह आरोप लगाया था कि वे यह डील फाइनल करने के लिए फ्रांस चले गए थे। सीबीआई प्रकरण में भी कथित तौर पर उनका नाम सामने आया था। फोन टेपिंग कांड में यह कहा गया कि सीबीआई अफसरों की लड़ाई में डोभाल का नाम लिया गया था। हालांकि बाद में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि डोभाल का इससे कोई लेना-देना नहीं था। उनका कहीं नाम नहीं आया और न ही उनका फोट टेप किया गया।
कांग्रेस पार्टी कई दूसरे मुद्दों को लेकर भी डोभाल पर एनडीए भाजपा सरकार में बड़े स्तर पर हस्तक्षेप का आरोप लगाती रही है। पिछले दिनों डीएस हुडा, जिन्होंने 2016 की उरी सर्जीकल स्ट्राइक का नेतृत्व किया था, कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले थे। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर राहुल गांधी को सौंपा था।
इसके बाद यह चर्चा आम हो गई थी कि 2019 में कांग्रेस पार्टी सत्ता में आती है तो हुड्डा एनएसए की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और एनएसए के कार्यालय को वैधानिक आधार प्रदान करेगी। इनकी शक्ति व कार्यों को परिभाषित किया जाएगा। साथ ही इनके अधीन कार्यरत एजेंसियां संसद के प्रति जवाबदेह होंगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कांग्रेस पार्टी ने बताया अपना विजन
देश की अखंडता एवं लोगों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। सीमाओं की सुरक्षा, डाटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सुरक्षा और संचार सुरक्षा व व्यापार मार्गों को सुरक्षित करने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। रक्षा से संबंधित मामलों पर सरकार के प्रमुख सलाहकार के रुप में रक्षा स्टाफ प्रमुख (सीडीएस) के कार्यालय की स्थापना की जाएगी।
भाजपा सरकार ने सुरक्षा सलाहकार बोर्ड को जनवरी 2015 से अक्तूबर 2016 के बीच अनिश्चिय की स्थिति में रखा और बाद में इसे समाप्त कर दिया। कांग्रेस एनएसएवी को दोबारा स्थापित कर उसे वैधानिक आधार प्रदान करेगी। इस प्रक्रिया में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और पेशेवरों को शामिल किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एनएसएवी, सरकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को सलाह देने के लिए एक नियमित पेशेवर सलाहकार समूह के तौर पर काम करे।
रक्षा और सुरक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए घरेलू क्षमता विकसित की जाएगी
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि रक्षा और सुरक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए घरेलू क्षमता विकसित की जाएगी। सार्वजनिक क्षेत्र के अलावा निजी क्षेत्र की उन कंपनियों की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा, जिनके पास पूर्व योग्यता है। ऐसी कंपनियां सुरक्षा एजेंसी द्वारा सुरक्षित और विश्वसनीय घोषित होनी चाहिए। रक्षा और सुरक्षा उपकरणों की घरेलू क्षमता का तेजी से विस्तार होगा।