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India-China dispute: कांग्रेस अब चीन को बनाएगी चुनावी मुद्दा, तैयार हो रही कांग्रेस की यह बड़ी रणनीति

Tue, 20 Dec 2022 06:50 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 20 Dec 2022 06:50 PM IST
सार

India-China dispute: कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर अन्य वरिष्ठ नेताओं से चर्चा हुई है। उसमें सर्वसम्मति से तय हुआ कि सरकार को भारतीय सीमा पर चीन की ओर से होने वाली घुसपैठ और झड़पों के बारे में जनता के बीच में भी रखना चाहिए...

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Congress will make India-China dispute an election issue, preparing big strategy
India-China dispute - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश से लेकर लद्दाख इलाके में चीनी सेनाओं और भारतीय सेना (India-China dispute) के बीच हुई झड़पों पर कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार किया है। बीते कुछ दिनों से जिस तरह कांग्रेस ने चीन के मुद्दे पर सरकार से सवाल किए हैं, उससे पार्टी अब आने वाले दिनों में चीन को बड़ा मुद्दा बनाकर पेश करने वाली है। कांग्रेस के नेताओं की मानें तो आने वाले दिनों में कांग्रेस रणनीति बनाकर देश के अलग-अलग इलाकों में लोगों से चीन के मुद्दे पर न सिर्फ लोगों को जागरूक करेंगे, बल्कि और चीन की नीतियों के बारे में भी चर्चा करेंगे। हालांकि इसका आने वाले चुनावों में कितना असर पड़ेगा, यह तो चुनाव के नतीजे बताएंगे, लेकिन कांग्रेस ने इस मुद्दे को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से लेकर 2024 के लोकसभा चुनावों तक ज्वलंत मुद्दा बनाए रखने की पूरी तैयारी कर ली है।

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बॉर्डर पर बढ़ रहे तनाव को हल्के में नहीं ले रही कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी बीते कुछ समय से केंद्र सरकार से भारत-चीन बॉर्डर पर होने वाली सैन्य गतिविधियों को लेकर सवाल-जवाब कर रही है। पिछले हफ्ते कांग्रेस पार्टी आक्रामक तब हुई जब राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुल कर बोल दिया कि उन्हें पता था कि चीन के मुद्दे पर उनसे सवाल नहीं पूछा जाएगा। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के इस सवाल के बाद मीडिया ने उनसे चीन से संबंधित प्रश्न तो पूछे, लेकिन कांग्रेस ने इस पर आक्रामक रुख अख्तियार किया। कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता और रणनीतिकार बताते हैं कि पार्टी बॉर्डर पर बढ़ रहे तनाव को हल्के में नहीं ले रही है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक तवांग में हुई घटना और लद्दाख के इलाके में हुई घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत और चीन के बीच हुई झड़प को चुनावी मुद्दा बनाकर मैदान में उतरने जा रही है।

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कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर अन्य वरिष्ठ नेताओं से चर्चा हुई है। हाल में हुई बैठक में इस पूरे मुद्दे को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व कई केंद्रीय मंत्रियों के बीच रखा गया। उसमें सर्वसम्मति से तय हुआ कि सरकार को भारतीय सीमा पर चीन की ओर से होने वाली घुसपैठ और झड़पों के बारे में जनता के बीच में भी रखना चाहिए। कांग्रेस के महासचिव और सांसद जयराम रमेश कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे देश के जवान विपरीत परिस्थितियों में भी सीमा पर डट कर अपने देश की रक्षा कर रहे हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम उन्हें न सिर्फ सपोर्ट करें, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ाएं। इसके साथ सरकार की ओर से यह आश्वासन भी मिले कि हमारी सीमाएं क्या उसी तरीके से सुरक्षित हैं या नहीं। इसके अलावा सरकार को यह भी जवाब देना चाहिए कि क्या 2020 से पहले जिन इलाकों में हमारे सैनिक पेट्रोलिंग करते थे, क्या वहां पर वह गश्त कर पा रहे हैं या नहीं।

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क्यों रुका माउंटेन स्ट्राइक कोर बनाने का काम

कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि उनकी पार्टी सरकार से जो सवाल कर रही है, वही वह जनता के बीच ले करके भी जा रहे हैं। योजना के मुताबिक कुछ सवालों के साथ कांग्रेस न सिर्फ केंद्र सरकार से सवाल कर रही है, बल्कि उन्हीं सवालों के माध्यम से विधानसभा-लोकसभा के चुनावों में मुद्दों को धार भी दे रही है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस जनता के बीच जो सवाल लेकर जा रही है उनमें जून 2020 में हुई गलवां की बड़ी घटना भी शामिल है। इसके अलावा हाल में हुए अरुणाचल प्रदेश के तवांग में हुई भारतीय और चीनी सेना की झड़प का मामला भी शामिल है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश कहते हैं कि वह सरकार से यह जानना चाहते हैं कि माउंटेन स्ट्राइक कोर बनाने को लेकर 17 जुलाई 2013 को कैबिनेट में मंजूर की गई योजना को आखिरकार क्यों छोड़ दिया गया। वह कहते हैं कि केंद्र सरकार को चीन के साथ अपनी विदेश नीति को स्पष्ट करना होगा। क्योंकि बीते दो सालों में चीन से आयात रिकॉर्ड स्तर पर हुआ है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विदेश मंत्री एक ओर तो यह कहते हैं कि चीन के साथ उनके रिश्ते सामान्य नहीं हैं। तो सवाल यह उठता है कि ऐसे असामान्य रिश्तों के बीच चीन के राजदूत को बुलाकर आपत्ति पत्र क्यों नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार से सवाल पूछा है कि सितंबर 2022 में रूस के साथ वोस्तोक एक्सरसाइज में हमारे सैनिकों ने चीनी सैनिकों के साथ आखिर सैन्य अभ्यास क्यों किया? पार्टी महासचिव जयराम रमेश का आरोप है कि केंद्र सरकार चीन के मामले में कह कुछ रही है और कर कुछ रही है। वह कहते हैं कि सरकार के इस रवैये के खिलाफ कांग्रेस सिर्फ संसद में ही नहीं, बल्कि सड़क पर उतर कर न सिर्फ विरोध करेगी बल्कि देश के एक-एक नागरिक को उनकी असलियत बताएगी।

डेपसांग में 18 किमी अंदर आ कर क्यों बैठा चीन

जयराम रमेश कहते हैं कि विदेश मंत्री एक ओर तो कहते हैं कि हम चीन को एलएसी की स्थिति में एकतरफा बदलाव नहीं करने देंगे, लेकिन यह जवाब नहीं देते हैं कि बीते दो सालों से डेपसांग में 18 किमी अंदर आकर यथास्थिति बदली है या नहीं बदली। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे सैनिक पूर्वी लद्दाख में ऐसे 1000 वर्ग किमी क्षेत्र तक गश्त करने में असमर्थ हैं, जहां वे पहले गश्त करते थे। सरकार को इन सवालों के जवाब देकर स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसे हालात क्यों बने।

कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जिन सवालों के जवाब वह केंद्र सरकार से मांग रहे हैं, अगर उनके संतुष्ट जवाब नहीं मिले, तो वह इन जरूरी सवालों के जवाब जनता के साथ मिलकर मांगेंगे। कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि सरकार से जो सवाल उनकी पार्टी कर रही है, वह देश का सबसे गंभीर मुद्दा है। उक्त वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा यह बिल्कुल तय है कि आने वाले दिनों में भारत और चीन के बॉर्डर पर बने तनावपूर्ण हालातों को न सिर्फ मुद्दा बनाएगी, बल्कि चुनावों के दौरान उसका जोर शोर से जनता के बीच भी ले जाएगी।

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