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एमपीलैड निलंबित करने पर भड़की कांग्रेस, टीएमसी ने फंड के निलंबन को बताया मनमाना
Mon, 06 Apr 2020 10:46 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Mon, 06 Apr 2020 10:46 PM IST
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Adhir Ranjan Chowdhury
- फोटो : ANI
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कांग्रेस ने कोरोना संकट के मद्देनजर सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती के निर्णय का सोमवार को स्वागत किया। हालांकि सांसद निधि को दो साल के लिए निलंबित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे संसदीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को नुकसान होगा और ऐसे में इसे बहाल किया जाना चाहिए।
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लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि सरकार का यह फैसला देश के आपातकाल की तरफ बढ़ने का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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चौधरी ने ट्वीट किया कि सांसद निधि को निलंबित करना जनप्रतिनिधियों और मतदाताओं के प्रति घोर अन्याय है क्योंकि आम मतदाता की मांग पर सांसदों को अपनी निधि विकास कार्य में खर्च करने की स्वायत्तता होती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के निर्णय से साबित होता है कि देश वित्तीय आपातकाल की तरफ बढ़ रहा है।
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पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री जी, कांग्रेस सांसदों के वेतन में कटौती का समर्थन करती है। 30 नहीं 40 या 50 फीसदी कटौती कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सांसद निधि संसदीय क्षेत्रो में विकास कार्यों के लिए बनी है। सांसद निधि को निलंबित करना संसदीय क्षेत्रों के लिए बड़ी हानि है और इससे सांसद की भूमिका एवं कामकाज प्रभावित होगा। सुरजेवाला ने कहा कि सांसद निधि को बहाल करना चाहिए और भारत सरकार के खर्च में कटौती करनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि सांसद निधि को बहाल किए जाना चाहिए क्योंकि यह राशि क्षेत्र के विकास कार्यों पर खर्च होती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं जयराम रमेश और राजीव गौड़ा ने पार्टी से अलग रुख जाहिर करते हुए सांसद निधि को दो साल के लिए निलंबित किए जाने के फैसले का स्वागत किया है।
तृणमूल कांग्रेस ने फैसले को बताया मनमाना
वही, तृणमूल कांग्रेस ने एमपीलैड को निलंबित करने के केंद्र के फैसले को मनमाना बताया है और कहा है कि उसके पास कोविड-19 से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।
बता दें कि हर संसद सदस्य को सांसद निधि के रूप में हर साल पांच करोड़ रुपये की राशि मिलती है जो वह अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में खर्च कर सकता है।