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पुरानी गलतियों से सबक लेकर कांग्रेस ने शुरू किया चोला बदलना

Sat, 03 Feb 2018 05:11 AM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 03 Feb 2018 05:11 AM IST
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Congress takes lessons from old mistakes and started changing

कांग्रेस पार्टी ने पुरानी गलतियों से सबक लेकर चोला बदलना शुरू कर दिया है। पार्टी के प्रचार विभाग से लेकर सोशल मीडिया टीम में धार लाने की तैयारी तेज हो गई है। इतना ही नहीं कांग्रेस अपने प्रवक्ताओं और नेताओं को भी अब बाकायदा हिदायत देकर नये बदलाव को ध्यान में रखने का संदेश देना शुरू कर दिया है। यूपीए-1 और यूपीए-2 के समय में अंग्रेजी दां बन चुकी कांग्रेस ने अपनी इस गलती से भी बाकायदा सबक लिया है।

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सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी एक बार फिर हिन्दी को वरीयता देकर अन्य भाषा को दूसरे नंबर की तरजीह देना शुरू कर दिया है। ट्वीट, व्हाट्सअप और सोशल मीडिया के उपयोग में भी इसका खास ख्याल रखा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी की आईटी सेल के प्रमुख सूत्र ने माना कि हिन्दी भाषा के संकुचित इस्तेमाल ने बीते सालों में पार्टी का बड़ा नुकसान किया है। इसलिए इसको लेकर खास सावधानी बरती जा रही है। इसी तरह से पार्टी के मीडिया विभाग ने भी अपने प्रवक्ताओं और नेताओं से हिन्दी के इस्तेमाल की सलाह देना शुरू कर दिया है। कंटेट से लेकर अन्य सामग्री के मामले में भी यह सावधानी बरतने के प्रयास शुरू हो गए हैं। 
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पार्टी को आने लगे हैं सपने

गुजरात चुनाव में सफलता के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी पार्टी को राजस्थान में हुए उपचुनाव के नतीजे ने आगे सपने दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री ने बदल रही जमीन को पहचानने का हवाला देते हुए हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि अब वह जल्द ही कुर्ता पायजामा में नजर आना शुरू कर देंगे। सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के आखिरी बजट ने रही सही कसर पूरी कर दी है। उन्होंने कहा कि देश की जनता मोदी सरकार की असलियत को समझने लगी है और उसका कांग्रेस के नेताओं में फिर भरोसा बढ़ने लगा है। इसका एहसास उन्हें अपने क्षेत्र में जाकर मिलने आ रही भीड़ को देखकर हो रहा है।
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सक्रिय है दिव्या स्पंदना

कन्नड़ फिल्म अभिनेत्री से कांग्रेस पार्टी की गुजरात चुनाव के दौरान सोशल मीडिया की कमान संभालने वाली दिव्या स्पंदना कांग्रेस नेताओं में काफी चर्चित हैं। वह शुक्रवार को कांग्रेस मुख्यालय में सक्रिय दिखाई दी। दिव्या की टीम का लगातार दायरा बढ़ रहा है। सूत्र बताते हैं कि उनके एजेंडे में 2018 में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2019 में प्रस्तावित आम चुनाव और विधानसभा चुनाव भी है। इसे ध्यान में रखकर कांग्रेस पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है। पार्टी के आईटी विभाग से जुड़े सूत्र का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा की सोशल मीडिया टीम भी बड़े पैमाने तैयारी कर रही है। माना यह जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में करीब पौने दो सौ सीटों पर सोशल मीडिया अपना प्रभाव डाल सकता है। इसलिए पारंपरिक प्रचार के साधनों के साथ-साथ सोशल मीडिया विंग को मजबूत बनाने के प्रयास तेज हो गए हैं।

गुजरात का अगला कदम

कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े सूत्रों के अनुसार उन्हें विधानसभा चुनाव में काफी सबक मिला है। सोशल मीडिया परसेप्शन बनाने के बेस्ट टूल के रूप में सामने आया है। अब हम इसका दूसरा बड़ा प्रयोग कर्नाटक में करने जा रहे हैं। वहां जिला स्तर पर व्हाट्सएप समूह को तैयार कर लिया गया है। मुद्दों की बारीकियों पर काम हो रहा है। सिद्धारमैय्या की सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में जो वादा किया था उसे 94 प्रतिशत तक पूरा कर लिया है। इसे हम लोगों तक पहुंचा रहे हैं। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के समय में नाकामियां, भ्रष्टाचार समेत अन्य को जनता को याद दिला रहे हैं। कर्नाटक में हमें सरकार विरोधी लहर से भी लडऩा है, इसलिए याद दिला रहे हैं कि एक तरफ 94 प्रतिशत वादा पूरा करने वाली सरकार और इसके बरअक्स जुमले वाली सरकार। बाकी जनता पर छोड़ रहे हैं। कुल मिलाकर भाजपा के मुद्दों की हवा निकालना और असलिअत जनता तक पहुंचाने का उद्देश्य है।

अन्य राज्यों में भी

कांग्रेस का सोशल मीडिया प्लान राज्य पर आधारित करने की योजना है। जहां भी विधानसभा चुनाव होने हैं वहां चार महीने पहले सक्रियता बढ़ाने की थीम पर पार्टी आगे बढ़ रही है। इसी तर्ज पर म.प्र., छत्तीसगढ़, राजस्थान में काम चल रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम में वालेंटियर्स को मुख्य आधार मानकर रणनीति बनाई जा रही है। इसमें पार्टी के कार्यकर्ता और प्रोफेशनल्स के तालमेल बनाकर लक्ष्य को हासिल करने की योजना को प्रमुखता दी जा रही है।


कौन हैं प्रशांत किशोर?

कांग्रेस के नेता प्रशांत किशोर को भूल चुके हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि उ.प्र. विधानसभा चुनाव के बाद से ही हम उन्हें भूल चुके हैं। अब पार्टी के पास एक नहीं कई सौ प्रशांत किशोर हैं। बताते हैं कांग्रेस ने पारंपरिक प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दिया था। जब प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के निर्देशन में चलने वाली भाजपा तथा अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने काफी पहले सोशल मीडिया को टूल के रूप में अपना लिया था। लेकिन अब कांग्रेस की टीम भी इसमें किसी को मात देने के लिए तैयार है।

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