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पीएम मौन क्यों हैं, माल्या के विदेश भागने पर देश को दें जवाब- कांग्रेस

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 15 Sep 2018 06:09 AM IST
Randeep Surjewala (File Photo)
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राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर सवाल के बाद कांग्रेस ने पूरा फोकस विजय माल्या के विदेश भागने के प्रकरण पर किया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी साफ-साफ इशारा पीएम नरेन्द्र मोदी की तरफ कर रहे हैं, वहीं पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला का आरोप है कि देश का चौकीदार (प्रधानमंत्री) भागीदार नहीं, अब सीधे गुनहगार हैं। सुरजेवाला ने मांग की है कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली चुप्पी तोड़ें, देश को जवाब दें।
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सुब्रामण्यम स्वामी
भाजपा सांसद सुब्रामण्यम स्वामी विजय माल्या के विदेश भागने के प्रकरण में लगातार आक्रामक भूमिका में हैं। स्वामी ने फिर उस शख्सियत का नाम पूछा है, जिसने सीबीआई द्वारा जारी लुकआऊट नोटिस में विजय माल्या को पकडऩे की बजाय उनके बारे में सूचना देने का बदलाव किया है। इसे कैसे कमजोर किया गया, जिससे उसे देश से भागने की अनुमति मिल गई। स्वामी के अनुसार जरुर माल्या की सहायता किसी शक्तिशाली और अधिकृत स्तर के व्यक्ति ने की, क्योंकि बिना किसी शक्तिशाली व्यक्ति की मदद के माल्या देश से बाहर नहीं जा सकता था। सुब्रामण्यम स्वामी के बारे में कहा जाता है कि उनकी सूचनाएं पुख्ता, आधार वाली होती हैं। वह पूरे होमवर्क के बाद ही कोई इस तरह का मुद्दा उठाते हैं।

मुकुल रोहतगी
जून 2014 से जून 2017 तक देश के अटार्नी जनरल रहे हैं। मुकुल रोहतगी वित्त मंत्री अरुण जेटली के करीबियों में बताए जाते हैं। एक मीडिया हाऊस को दिए साक्षात्कार में मुकुल रोहतगी ने भी आशंका जाहिर की है कि विजय माल्या को किसी ने विदेश भागने में मदद की होगी। रोहतगी ने कहा कि किसी ने विजय माल्या को बता दिया होगा कि  आपके खिलाफ 9000 करोड़ रुपये के बैंक लोन का मामला ऋण वसूली न्यायाधिकरण में जा रहा है। रोहतगी के अनुसार यह जानकर माल्या विदेश भाग गया होगा।

दुष्यंत दवे
उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ और नामी वकील हैं। दुष्यंत दवे के हवाले से कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख सुरजेवाला ने कहा कि उनके(दवे) पास स्टेट बैंक की टॉप मैनेजमेंट 28 फरवरी 2016 को विजय माल्या के लोन प्रकरण को लेकर सलाह लेने गई थी। दुष्यंत दवे ने अपनी सलाह में अगले दिन यानी 29 फरवरी 2016 को बैंक अधिकारियों को उच्चतम न्यायालय में माल्या का पासपोर्ट जब्त करने संबंधी मुकदमा दाखिल कराने की सलाह दी थी। लेकिन इसके बाद ऐसा पांच मार्च तक नहीं किया गया। जबकि दो मार्च को ही विजय माल्या भारत छोडक़र लंदन जा चुके थे।
 
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माल्या मामले में सीबीआई अफसर भी कुछ नहीं बोल रहे

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