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Congress: ड्रोन सौदे पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा- अन्य देशों की तुलना में भारत क्यों चुका रहा अधिक कीमत

Wed, 28 Jun 2023 02:43 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 28 Jun 2023 02:43 PM IST
सार

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे पर प्रीडेटर ड्रोन सौदे पर मुहर लग गई, लेकिन केंद्र पर विपक्ष ने सवाल उठाया है कि सरकार ने महंगे दामों पर यह ड्रोन सौदा किया है।

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Congress raises questions on pricing of predator drone deal with US
Pawan Kheda (File Photo) - फोटो : PTI

विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे पर प्रीडेटर ड्रोन सौदे पर मुहर लग गई, लेकिन केंद्र पर विपक्ष ने सवाल उठाया है कि सरकार ने महंगे दामों पर यह ड्रोन सौदा किया है। हालांकि सरकार ने ऐसे दावों को खारिज कर दिया और कहा कि ड्रोन पर कीमत अभी तय होना बाकी है। इस बीच कांग्रेस ने बुधवार को करोड़ों रुपये के भारत-अमेरिका ड्रोन सौदे में पारदर्शिता की मांग की और आरोप लगाया कि 31 एमक्यू-9बी प्रीडेटर यूएवी ड्रोन अधिक कीमत पर खरीदे जा रहे हैं।

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कांग्रेस ने ड्रोन सौदे को लेकर जमकर बोला हमला
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रीडेटर ड्रोन सौदे पर कई प्रश्न उठाए जा रहे हैं। भारत को महत्वपूर्ण सवालों के जवाब चाहिए। अन्यथा, हम मोदी सरकार के तहत एक और घोटाले में फंस जाएंगे। खेड़ा ने कहा कि भारत के लोगों ने राफेल सौदे में ऐसा ही देखा है, जहां मोदी सरकार ने 126 के बजाय केवल 36 राफेल जेट खरीदे। उन्होंने कहा कि राफेल घोटाला अभी भी फ्रांस में जांच के दायरे में है।
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एक प्रिडेटर ड्रोन 812 करोड़ रुपये का होगा
आगे पीएम पर निशाना साधते हुए खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की बहुप्रचारित यात्रा पर धूल जम गई है। एक और रक्षा सौदा अब कई सवालों के घेरे में है। साथ ही कहा कि जनरल एटॉमिक्स यूएसए के प्रत्येक प्रीडेटर-रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 812 करोड़ रुपये होगी और भारत उनमें से 31 खरीदने का इच्छुक है, जिसका मतलब है कि भारत 25,200 करोड़ रुपये खर्च करेगा, जबकि डीआरडीओ इसे केवल 10-20 प्रतिशत की लागत में विकसित कर सकता है। 
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राफेल सौदे की याद दिला रहा यह ड्रोन सौदा
उन्होंने कहा कि ड्रोन सौदे को मंजूरी देने के लिए सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक क्यों नहीं हुई? क्या यह राफेल सौदे की याद नहीं दिलाता है, जिसमें पीएम मोदी ने एकतरफा फैसला लिया और रक्षा मंत्रालय-विदेश मंत्रालय की जानकारी के बिना 36 राफेल के सौदे पर हस्ताक्षर कर दिए। आगे कहा कि भारत अन्य देशों की तुलना में ड्रोन के लिए अधिक कीमत क्यों चुका रहा है? हम उस ड्रोन के लिए 'उच्चतम कीमत' क्यों चुका रहे हैं।


रक्षा मंत्रालय ने जारी किया था बयान
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 31 एमक्यू-9बी ड्रोन खरीदने के सौदे को मंजूरी दी थी। इस सौदे के तहत 16 हवा में नजर रखने वाले ड्रोन और 15 समुद्र में  नजर रखने वाले ड्रोन्स खरीदे जाने हैं। तीनों सेनाओं के लिए इन ड्रोन की खरीददारी की जाएगी। इस सौदे की अमेरिकी सरकार ने अनुमानित कीमत 3,072 मिलियन यूएस डॉलर बताई है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अमेरिकी सरकार से पॉलिसी को मंजूरी के बाद ड्रोन की कीमतों में मोलभाव किया जाएगा। 

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