{"_id":"667b04c7306551d1200d1ad5","slug":"congress-rahul-gandhi-leader-of-opposition-in-lok-sabha-have-many-targets-and-things-to-win-2024-06-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Congress: राहुल गांधी विपक्ष के नेता बनकर इतने निशाने एक साथ साधेंगे, सबसे बड़ी जीत तो 'यह' होने वाली है","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Congress: राहुल गांधी विपक्ष के नेता बनकर इतने निशाने एक साथ साधेंगे, सबसे बड़ी जीत तो 'यह' होने वाली है
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
राहुल गांधी ने 18वीं लोकसभा में बतौर सांसद शपथ ग्रहण के दौरान संविधान की प्रति भी दिखाई
- फोटो :
एएनआई
विस्तार
आखिरकार तय हो गया कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता होंगे। इस घोषणा से राहुल गांधी अब अपनी नई जिम्मेदारी के साथ एक साथ कई निशाने साधेंगे। सियासी जानकार तो यह तक कहते हैं कि अब राहुल गांधी के नेता विपक्ष होने से सीवीसी चुनाव आयोग और सीबीआई समेत संस्थाओं के प्रमुखों की नियुक्तियों में सकारात्मक भूमिका भी निभा सकेंगे। हालांकि कांग्रेस के सत्ता से बाहर जाने के 10 साल बाद यह पहला मौका आया है जब कांग्रेस के नेता को प्रतिपक्ष का नेता बनने का मौका मिला है।
सियासी तौर पर राहुल गांधी को सीधा फायदा भी मिलेगा
सियासी जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने से न सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि समूचे विपक्ष को एक मजबूत चेहरा मिला है। सियासी गलियारों में कहा यह भी जा रहा है कि राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने से उन सहयोगी दलों के नेताओं को भी एक तरह से संदेश जाएगा जो राहुल गांधी के नेतृत्व में समय-समय पर खामियां निकालते रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने से एक तो उनकी स्वीकार्यता गठबंधन के सभी दलों में होगी। ऐसा होने से उनकी छवि उन राजनीतिक दलों में बदलेगी। इसका सियासी तौर पर राहुल गांधी को सीधा फायदा भी मिलेगा।
गठबंधन के नेताओं से बेहतर सामंजस्य बड़ी उपलब्धि बन सकती है
राजनीतिक जनकार डीपी सिंह कहते हैं कि गठबंधन के कुछ बड़े नेता अंदर खाने राहुल गांधी को वरिष्ठता क्रम में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। सिंह कहते हैं भले ही यह बात खुलकर के वह नेता न कहें लेकिन कई मौकों पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों के नेताओं ने राहुल गांधी पर सवालिया निशान उठाए थे। अब जब विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी का नाम तय हो चुका है तो उन सभी नेताओं में भी राहुल गांधी को लेकर स्वीकार्यता होना लाजमी है। ऐसे मौके पर राहुल गांधी अगर अपनी स्वीकार्यता के साथ सभी राजनीतिक दलों खासतौर से गठबंधन के नेताओं से बेहतर सामंजस्य बनाते हैं तो यह उनके लिए उपलब्धि भी होगी। जिसका उनको भविष्य की सियासत में बड़ा फायदा मिल सकता है।
नेता विपक्ष के तौर पर भाषणों से अलग छवि बना सकेंगे राहुल
सियासी जानकार बताते हैं कि राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने से एक तो विपक्षी नेता के तौर पर वह मुखर आवाज बनकर उभर सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार दीपक बैंस कहते हैं कि बीते कुछ समय में जिस तरीके से राहुल गांधी के भाषणों में तीखापन दिखा है वह नेता विपक्ष के तौर पर संसद में एक अलग छाप छोड़ सकता है। खासतौर से नेता विपक्ष के तौर पर दिए जाने वाले भाषणों से राहुल गांधी की एक अलग छवि निखरकर सामने आएगी। जिससे उनकी छवि में भी और निखार होगा। साथ ही साथ बड़ी जिम्मेदारियां के लिए और परिपक्वता भी दिखनी शुरू हो जाएगी।
राहुल गांधी के पास विपक्ष के नेता की महत्वपूर्ण भूमिका
क्योंकि नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है और तमाम नियुक्तियों में उनकी राय महत्वपूर्ण होती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सीबीआई ईडी समेत तमाम अन्य प्रमुख जांच एजेंसियों में होने वाली नियुक्ततियों में राहुल गांधी महत्वपूर्ण और सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा कई प्रमुख नियुक्तियां समेत महत्वपूर्ण फैसलों में नेता प्रतिपक्ष की बड़ी भूमिका होती है। इस लिहाज से राहुल गांधी अपनी विपक्ष के नेता की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ बड़ा फैसला लेने में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा सकते हैं।