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कांग्रेस: सोनिया गांधी ने विरोधियों को दिखाया आईना, नसीहत देने वालों के सामने भी रखा 'टास्क'

Sun, 17 Oct 2021 07:03 AM IST
देव कश्यप शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 17 Oct 2021 07:03 AM IST
सार

पार्टी का कायाकल्प करने की तैयारी को लेकर हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में 2023 तक का एजेंडा तय किया गया है जबकि 2024 में लोकसभा चुनाव होना है। सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बहाने अवसर ढूंढ रहे राजनीतिक दलों को भी टका सा जवाब दिया और नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए चुपचाप 2022 तक का समय ले लिया। पार्टी को नसीहत देने वाले नेताओं के लिए नया टास्क तैयार है और कांग्रेस का कल्चर बदलने की तैयारी है।

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Congress President Sonia Gandhi gave a strict reply to political opponents through Congress Working Committee meeting Preparing to change culture of Party
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी और राहुल - फोटो : PTI

विस्तार

सियासी विश्लेषक कुछ भी अनुमान लगाते रहें, लेकिन ऐसा साफ लग रहा है कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बहाने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजनीतिक विरोधियों को आईना दिखा दिया है। बैठक में उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया को कांग्रेस विरोध का मंच बनाने वालों को जहां खरी-खरी सुनाई, वहीं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को पार्टी का सुरक्षा कवच दे दिया।

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कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बहाने अवसर ढूंढ रहे राजनीतिक दलों को भी टका सा जवाब दिया और नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए चुपचाप 2022 तक का समय ले लिया। पार्टी को नसीहत देने वाले नेताओं के लिए नया टास्क तैयार है और कांग्रेस का कल्चर बदलने की तैयारी है।
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पहला सवाल कब होगा अध्यक्ष का चुनाव और क्यों?
कांग्रेस अपने नए अध्यक्ष का चुनाव 2023 में कर सकती है। 2022 तक का पूरा समय अध्यक्ष पद के लिए जरूरी संगठनात्मक चुनाव तथा प्रक्रिया में ही लग जाने का अनुमान है। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी के चुनाव के बाबत एक टाइम टेबल सामने रखा है। इसमें एक नवंबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक पार्टी पूरे देश में सदस्यस्ता अभियान चलाएगी। 15 अप्रैल 2022 तक सदस्यों की सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद संगठन के निचले स्तर से चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें ब्लॉक और जिला स्तर के संगठन का चुनाव होने के बाद प्रदेश स्तर तक के पदाधिकारियों का चुनाव होगा। 21 जुलाई 2022 तक इस प्रक्रिया के पूरा होने का अनुमान है। इसके बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी, इसके पदाधिकारियों तथा अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसके सितंबर 2022 तक पूरा होने की संभावना जताई गई है। केसी वेणुगोपाल की ओर से दी गई टाइम लाइन में नए अध्यक्ष का चुनाव होने में अक्तूबर का समय लग सकता है। लेकिन पार्टी को जानने समझने वालों का मानना है कि नए अध्यक्ष का चुनाव 2023 से पहले शायद ही हो पाए। ताकि पार्टी 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान मजबूती के साथ उतर सके।
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क्या ग्रुप 23 के कांग्रेसी नेता अब शांत हो जाएंगे?
पार्टी की रीति, नीति और कांग्रेस के नेताओं तथा राजनीति की भाषा को समझने वाले एक धुरंधर पूर्व महासचिव का कहना है कि कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है। यहां कुछ भी शांत नहीं होता। चीजें चलती रहती हैं और साथ-साथ बदलाव भी चलता रहता है। वह कहते हैं कि 2024 तक कांग्रेस के नेता अपनी बात इसी तरह से रखते रहेंगे। आरोप-प्रत्यारोप और सवाल-जवाब भी चलता रहेगा। वह कहते हैं कि आपको कांग्रेस के भीतर ढेर सारे बदलाव  साल 2023 में दिखाई देंगे और उसी आधार पर 2024 के लोकसभा चुनाव की रूपरेखा बनेगी।

पार्टी के एक अन्य पूर्व महासचिव इस समय दक्षिण भारत की राजनीति में व्यस्त हैं। वह कहते हैं कि पूरी कांग्रेस खंगालिए। जमीन पर चाहे अच्छा या बुरा जो भी कर रहे हैं वह तो प्रियंका गांधी कर रही हैं और राहुल गांधी कर रहे हैं। पूरे देश की जनता और कार्यकर्ता तो केवल दो को ही समझते हैं। लखीमपुर खीरी से हर ज्वलंत मामले में भी यही दो दिखाई दे रहे हैं। जबकि कांग्रेस के दूसरे नेता तो टेबल पालिटिक्स कर रहे हैं। इसलिए गुट-23 के बोलते रहने से कांग्रेस कमजोर नहीं होती। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने कार्यसमिति की बैठक में सभी के सवालों का जवाब दे दिया है। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।

बदलेगा कांग्रेस का कल्चर?
कांग्रेस में नेताओं का एक बड़ा तबका है। वह केवल बयानों की राजनीति करता है। 24 अकबर रोड के सूत्र बताते हैं कि अब इससे काम नहीं चलेगा। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक वृहद प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार हो रहा है। केसी वेणुगोपाल ने इन कार्यक्रमों के बारे में बताया है। यह कार्यकर्ता से लेकर नेता तक सभी के लिए होगा। टॉप-टू बॉटम मंथन, प्रशिक्षण, तैयारी पर जोर दिया जाएगा। इसमें कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रोफेशनल्स के माध्यम से उन्हें राजनीतिक अभियान चलाने, जनता के मुद्दे उठाने, लोगों की आवाज बनने के गुण सिखाए जाएंगे। पार्टी जमीनी स्तर पर उतरकर जनता के मुद्दे उठाएगी। सरकार से सवाल पूछेगी और जमीनी राजनीतिक अभियानों के माध्यम से पार्टी की तस्वीर चमकाएगी। पार्टी के एक राज्यसभा सांसद का कहना है कि पार्टी संगठन की एसी कमरों की राजनीति को बाहर लाकर खेत, खलिहान, सड़क तक अभियान चलाएगी।

क्या कांग्रेस के प्रति जनता का लगाव बढ़ रहा है
गुरुद्वारा रकाब गंज में पार्टी के वॉर रूम में काफी सक्रिय रहने वाले नेता की सुनिए। वह कहते हैं कि पिछले दो-तीन महीने में कांग्रेस ने जबरदस्त तरीके से 'गेन' किया है। यूपी के लखीमपुर खीरी प्रकरण ने भी कांग्रेस की जनता में अच्छी छवि बनाने में मदद की है। ऐसा केवल राहुल और प्रियंका के अभियान के कारण हो पाया। वह कहते हैं कि पंजाब में कांग्रेस अगले साल होने वाले चुनाव में फिर सरकार बनाएगी। केवल कुछ समय इंतजार कीजिए सब ठीक हो जाएगा। सूत्र का कहना है कि हरियाणा में कांग्रेस की स्थिति बहुत बेहतर हुई है। गुजरात में अब अच्छे परिणाम आने शुरू हो गए हैं। कर्नाटक में भाजपा ने अपना नकाब उतार लिया है। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में सब ठीक चल रहा है और अगले साल तक वहां बड़ा बदलाव दिखेगा। उत्तराखंड में सत्ताधारी भाजपा का आत्मविश्वास डगमगाने लगा है। हमारे पुराने नेता अब पार्टी में लौटने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मोहभंग हो गया है और यह राज्य में कांग्रेस की स्थिति बेहतर होने का संकेत भी है। राहुल गांधी की टीम के सदस्य का कहना है कि जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य के बारे में अभी उन्हें कुछ नहीं कहना है। वह केवल इतना ही कहेंगे कि जब जनता फैसला सुनाएगी तो लोग चौंक जाएंगे। क्योंकि केन्द्र सरकार की कलई अब खुद ही खुलनी शुरू हो गई है।


सोनिया गांधी ने चला मास्टर स्ट्रोक
कांग्रेस कार्यसमिति बैठक के बाद नाम न छापने की शर्त पर एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस बार कोई हंगामा नहीं हुआ? क्यों? वह कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष सब समझ रही थीं। उन्होंने कुछ नेताओं से बैठक के पहले बात की थी। कुछ शीर्ष नेता भी लगातार सक्रिय थे। सूत्र का कहना है कि आज का दिन सही मायने में कांग्रेस अध्यक्ष का ही था। उन्होंने कई मास्टर स्ट्रोक चले। वरिष्ठ नेताओं ने भी उनमें भरोसा जताया। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक में सीडब्ल्यूसी के सदस्य, स्थायी आमंत्रित, विशेष आमंत्रित सदस्य, मुख्यमंत्री सब मौजूद थे। लेकिन इसमें हमारे पास ऑस्कर फर्नांडीज की कमी खल रही थी। क्योंकि असल माने में ऑस्कर संगठन के नेता थे। सूत्र का कहना है कि राजीव सातव और ऑस्कर को श्रद्धांजलि देने के बहाने कांग्रेस अध्यक्ष ने सबको संगठन को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी सौंप दी है। ताकि राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी अच्छा प्रदर्शन कर सके।

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