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Politics: 'जनसंख्या के आधार पर परिसीमन दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय'; खरगे ने लोगों से की एकजुट होने की अपील
Sun, 16 Mar 2025 09:21 PM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,गदग (कर्नाटक)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,गदग (कर्नाटक)
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 16 Mar 2025 09:21 PM IST
सार
खरगे ने कहा कि केंद्र सरकार सहकारी संघवाद की बात करती है। अगर सहकारी संघवाद है तो लोगों को उनके हक का पैसा क्यों नहीं मिल रहा है? कर्नाटक में सहकारी समितियों को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से उचित धन नहीं मिल रहा है। इसमें 58 प्रतिशत की कमी आई है।
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मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
- फोटो : ANI
विस्तार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर होगा तो यह दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा। ऐसा करने से लोकसभा में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। उन्होंने लोगों से इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
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पूर्व मंत्री दिवंगत केएच पाटिल के शताब्दी समारोह में उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन की योजना बनाई जा रही है। इसके जरिये दक्षिण भारत में संसदीय और विधानसभा सीटों की संख्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि उत्तरी राज्यों में प्रतिनिधित्व 30 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। ऐसी खबरें सामने आ रही हैं। हमें इंतजार करना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो यह अन्याय होगा। हमें इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सहकारी संघवाद की बात करती है। अगर सहकारी संघवाद है तो लोगों को उनके हक का पैसा क्यों नहीं मिल रहा है? कर्नाटक में सहकारी समितियों को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से उचित धन नहीं मिल रहा है। इसमें 58 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कर्नाटक के लोगों से एकजुट होने और अन्याय के खिलाफ लड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब मुद्दा कर्नाटक और उसके विकास से जुड़ा हो तो सभी को एक स्वर में बोलना चाहिए। केंद्र सरकार पर विभिन्न संस्थानों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को वह महत्व नहीं मिल रहा है जिसका वह हकदार है। शिक्षा के लिए केंद्रीय वित्त पोषण में कटौती का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जितने रिक्त पद भरे जाने चाहिए, जितने शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए, उनमें से 50 प्रतिशत पद रिक्त रह जाते हैं। यदि केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी, आईआईएम और केंद्रीय विद्यालयों में 50 प्रतिशत पद खाली रहेंगे तो हमारे बच्चे कैसे पढ़ेंगे और आगे बढ़ेंगे?
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