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Politics: लद्दाख-अरुणाचल पर चुनावी पंच लाइन तैयार कर रही कांग्रेस? चीन के बहाने BJP के राष्ट्रवाद को चुनौती
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मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के 'राष्ट्रवाद' को चुनौती देने के लिए 'लद्दाख' और 'अरुणाचल प्रदेश' का मुद्दा उठा दिया है। पार्टी नेताओं की मानें तो इसे मुद्दे को चुनावी 'पंच लाइन' में शामिल किया जा रहा है। इससे पहले भी कई बार कांग्रेस पार्टी ने 'लद्दाख' और 'अरुणाचल प्रदेश' में चीन की कथित घुसपैठ का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी बॉर्डर से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर मुखर रहे हैं। सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि लद्दाख में पेट्रोलिंग प्वाइंट पर चीन ने कब्जा किया है। चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। अब फिर से अरुणाचल प्रदेश की 30 और जगहों को नए नाम दिए हैं।
कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, लद्दाख के साथ ही अरुणाचल प्रदेश में चीन लगातार भारतीय जमीन पर कब्जा कर रहा है। जगहों के नाम बदल रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी खामोश हैं। वे (मोदी) अपने ही सांसद तापीर गाव की बात नहीं सुनते, जिन्होंने कहा कि अगर कहीं दूसरा डोकलाम होगा तो अरुणाचल प्रदेश में होगा। चीन ने भारतीय सीमा में 50 से 60 किलोमीटर तक कब्जा कर रखा है। चीन अरुणाचल प्रदेश में कब्जा करता है, मीडिया में कोई खबर नहीं आती है।
बता दें कि इससे पहले सितंबर 2023 में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। सोनिया ने अपने पत्र में जिन 'नौ' मुद्दों का जिक्र किया था, उनमें चीन द्वारा लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में की जा रही घुसपैठ भी शामिल थी। राहुल गांधी भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल 'एलएसी' को लेकर कई बार केंद्र सरकार को घेर चुके हैं। केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर 2023 तक पांच दिवसीय विशेष संसद सत्र बुलाया था। सोनिया गांधी ने संसद के विशेष सत्र में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ पर चर्चा कराने का आग्रह किया था।
चीन मामले पर पहले भी हमलावर रही है कांग्रेस
सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के अनेक नेताओं ने चीन की घुसपैठ का मुद्दा उठाया है। गत वर्ष जब अरुणाचल प्रदेश में चीनी नामों की सूची जारी हुई तो कांग्रेस नेताओं ने मोदी सरकार को जमकर घेरा था। उस वक्त भी कांग्रेस पार्टी, 'ड्रैगन को क्लीन चिट' पंच लाइन से लोगों के बीच ले गई थी। राहुल गांधी ने 'एक्स' पर लिखा था, 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन, चीन ने छीन ली है। अब जगहों के नाम भी बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री चुप हैं, कोई जवाब नहीं। तभी कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी था, हमारे 50-60 हजार सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के ऊपर तैनात हैं। ये बुनियादी सवाल इसलिए उत्पन्न होता है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2013 से लेकर अब तक 19 बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिल चुके हैं। पांच बार प्रधानमंत्री मोदी चीन गए हैं। भारत का कोई भी प्रधानमंत्री 1947 से लेकर 2023 तक इतनी बार चीन नहीं गया होगा।
दूसरे दलों को साथ लेकर सरकार को घेरेगी कांग्रेस
कांग्रेस के एक नेता ने बताया, भाजपा ने 2019 का चुनाव राष्ट्रवाद के नाम पर जीता था। इस बार केवल कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि अधिकांश विपक्षी दल भी उसके साथ चलने को तैयार हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद विपक्षी दल, पहले के मुकाबले कहीं अधिक नजदीक आए हैं। रविवार को विपक्षी दलों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आक्रामकता के साथ 'राफेल' का मुद्दा उठाया था, लेकिन पार्टी उस पर अकेली पड़ गई थी। सर्वोच्च अदालत से भी कांग्रेस को झटका लगा था। तब विपक्षी दलों का साथ, कांग्रेस को नहीं मिल सका था। मौजूदा समय में बॉर्डर पर चीन के दुस्साहस से विपक्ष पूरी तरह अवगत है। यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी, इस मुद्दे पर विपक्ष को साथ लेकर भाजपा को घेरने की रणनीति बना रही है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कह चुके हैं, अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। गलवान के बाद, पीएम मोदी द्वारा चीन को क्लीन चिट देने का नतीजा, देश भुगत रहा है। पिछले साल राहुल गांधी ने लद्दाख की यात्रा के दौरान कहा था, पूरा लद्दाख जानता है कि चीन ने हमारी जमीन कब्जा ली है। चीन द्वारा अपने नए नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों के नाम बदल देता है। तो कभी अक्साई चीन को अपना बताने लगता है।
मनीष तिवारी ने बताई थी समझौतों की स्थिति
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने गत वर्ष संसद के मानसून सत्र में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कहा था, चीन की घुसपैठ को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से पिछले 35 महीनों में कोई जवाब नहीं आया है कि नियंत्रण रेखा पर, वो भी इतने व्यापक स्तर के ऊपर और इतनी जगह घुसपैठ क्यों हुई। 1993 से 2013 तक लगभग 20 साल में कांग्रेस, यूनाइटेड फ्रंट व एनडीए-भाजपा की भी सरकार रही। 7 सितंबर, 1993 को एक 'Agreement of maintenance of peace and tranquility along the line of actual control', पर हस्ताक्षर किए गए। 29 नवंबर, 1996 को 'Agreement of confidence building measures in the military field along the LAC' हुआ। इसके बाद 11 अप्रैल, 2005 को 'Protocol on the modalities of confidence building measures in the military field along the LAC' सामने आया। जनवरी 17, 2012 को 'Agreement on the establishment of a working mechanism for consultation and coordination on the Indo-China border affairs' और 23 अक्टूबर, 2013 को 'Border-defence cooperation agreement' समझौता हुआ था। इन सबके बावजूद हमारे 50-60 हजार सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के ऊपर तैनात हैं। 2014 में चूमर हुआ, 2017 में डोकलाम हुआ, 2020 में गलवान हुआ और दिसंबर 2022 में तवांग में जो यांगत्जी दरिया है, वहां पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई।
26 पेट्रोलिंग प्वाइंट पर अपनी पहुंच खो दी
कांग्रेस नेता, मनीष तिवारी के अनुसार, दिसंबर, 2022 में जब डीजीपी और आईजीपी की कॉन्फ्रेंस हुई तो वहां एसएसपी लद्दाख की तरफ से 'Security issues pertaining to unfenced border' प्रस्तुत किया जाता है। उसमें लिखा था कि भारत ने 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में से 26 प्वाइंट पर अपनी पहुंच खो दी है। इस रिपोर्ट के बाद गत वर्ष कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की थी कि इस विषय पर ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई जाए। विपक्ष को भरोसे में लेकर, सरकार को विस्तारपूर्वक यह बताना चाहिए कि पिछले तीन वर्ष में बॉर्डर पर क्या घटनाक्रम हुआ है। उसका ब्यौरा क्या है, किस तरह की नेगोसिएशन चल रही हैं, इसका एक सार, विपक्ष के समक्ष रखना चाहिए। संसद के मानसून सत्र में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चीन से लगती सीमा पर पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर मोदी सरकार से कई सवाल पूछे थे। इनमें, चीन बॉर्डर पर 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स से भारत का अधिकार छिनना, और 'बफर' जोन भी हमारी जमीन में तैयार होना, शामिल है।
एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं किया है
केंद्र सरकार ने कांग्रेस पार्टी के आरोपों को सिरे से नकार दिया था। लद्दाख के उपराज्यपाल बीडी मिश्रा ने कहा था, चीन ने भारत की एक इंच भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। हमारे सशस्त्र बल किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। मिश्रा ने यह बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन आरोपों के जवाब में कही थी, जिनमें लद्दाख की भूमि के एक भूमि के एक बड़े हिस्से पर चीन का कब्जा होने की बात कही गई थी। मिश्रा ने कहा था, मैं किसी के बयान पर टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन मैं वही कहूंगा जो सही तथ्य हैं। मैंने जमीनी तौर पर खुद देखा है कि चीन ने एक इंच भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। 1962 में जो कुछ भी हुआ, वह सबके सामने है। आज हम अपनी जमीन के आखिरी इंच तक पर काबिज हैं। हमारे सशस्त्र बल किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। अगर पानी सिर से ऊपर चला गया तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
जयशंकर बोले, तब क्या वह मेरा हो जाएगा
अरुणाचल प्रदेश पर चीन द्वारा अपना दावा ठोकना, इस मामले में सोमवार को केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, अगर आज मैं आपके घर का नाम बदल दूं, तब क्या वह मेरा हो जाएगा। अरुणाचल प्रदेश, भारत का राज्य था, है और रहेगा। नाम बदल देने से कुछ नहीं होता है। न ही इससे कोई प्रभाव पड़ता है। गुजरात के सूरत में उन्होंने कहा, आप सब जानते हैं कि हमारी सेना वहां (एलएसी पर) तैनात है। सेना के लोग जानते हैं कि उन्हें वहां क्या करना है। अरुणाचल प्रदेश, भारत का अभिन्न अंग है। काल्पनिक नाम रखने से इस वास्तविकता में कोई बदलाव नहीं आएगा।